ईराक और सीरिया में आतंक का पर्याय बने आईएस के खिलाफ जंग पर उतरी महिला फाइटर्स इस आतंकी संगठन को जड़ से खत्म करने के लिए बेताब हैं। इस जंग में हिस्सा लेते हुए उनके निजी जीवन में क्या चल रहा है और उनकी आखिरी ख्वाहिश क्या है यह जानना काफी दिलचस्प है।
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महिला फाइटर के लिए एके-47 से भी ज्यादा जरूरी मेकअप
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- फोटो : Daily Mail
इस्लामिक स्टेट से लड़ाई में भले ही लिपिस्टिक का इस्तेमाल हथियार के तौर पर न हो लेकिन यहां आतंकी संगठन से लोहा ले रही महिला लड़ाकों के लिए यह बेहद जरूरी है। इन महिला फाइटर्स की ख्वाहिश है कि वह मर जाएं तब भी खूबसूरत दिखती रहें।
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36 साल की कुर्दिश फाइटर पेशमर्गा अहमद मोहम्मद सुबह उठते ही अपनी आईब्रो सही करती हैं और लिपिस्टिक लगाती हैं। एके-47 उठाने से पहले मेकअप करती हैं। इस बारे में उनका कहना है कि वह हमेशा खूबसूरत दिखना चाहती हैं। यहां तक की अगर वह मर भी जाएं तब भी खूबसूरत दिखती रहें।
महिला फाइटर के लिए एके-47 से भी ज्यादा जरूरी मेकअप
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आजकल ईराक सेना की महिला कमांडो की टुकड़ी ब्रिटिश सैनिकों के साथ ट्रेनिंग ले रही है और आईएस के हमले से मोसुल बांध को सुरक्षित रखे हुए हैं। 36 वर्षीय महिला फाइटर अपनी आखिरी के ख्वाहिश के बारे में बताया है।
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कानून की पढ़ाई छोड़कर सेना में शामिल होने वाली मोहम्मद का कहना है कि उन्होंने अभी तक किसी आतंकी को नहीं मार पाई लेकिन मौका मिला जरूर मारेंगी। यह तस्वीर अलहाम नाम की महिला फाइटर की है।
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महिला फाइटर का कहना है कि वह आईएस से लड़ना बहुत मुश्किल है। वह बहुत ही खतरनाक लोग हैं। हम उन्हें मारना चाहते हैं क्योंकि वह हमें मारना चाहते हैं। वैसे तो हम किसी से लड़ना नहीं चाहते।
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वहीं महिला लड़ाकों की कमांडर ने अपने सिपाहियासें की तारीफ करते नहीं थकतीं। उनके अनुसार, महिला फाइटरों के पास लड़ने की हर तकनीक है और वह सब तरह के हथियार चलाने में सक्षम हैं। ये महिला जवान आईएस को खत्म करने में सक्षम हैं।
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जिन महिलाओं और किशोरियों का आईएस के लड़ाकों ने महीनों बलात्कार किया है उनका भी आईएस से लड़न के लिए खून खौल रहा है। आईएस के शोषण का शिकार हुई 16 साल की सुशान मोहम्मद राशिद शरणार्थी कैंप पर रह रही हैं। उनका कहना है कि जब वह 18 साल की हो जाएंगी तब आर्मी में शामिल होंगी और आईएस के खिलाफ जंग लड़ेंगी।
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रिफ्यूजी कैंप में रह रही सुशान के चाचा पिछले साल आईएस से लड़ाई में मारे जा चुके हैं लेकिन भी अब आईएस से सेना में शामिल होने के लिए तैयारी कर रही हैं।
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स्थानीय लोगों के अनुसार आईएस के आतंकी महिला लड़ाकों से ज्यादा खौफ खाते हैं। क्योंकि वह महिलाओं के हाथों नहीं मरना चाहते। ऐसा कहा जाता है कि महिलाओं के हाथों मरने से जन्नत नहीं मिलती इसलिए आईएस के आतंकी महिला फाइटर्स से खौफ खाते हैं।