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इतने बरसे बम कि गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्चे

Fri, 01 Jul 2016 03:48 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे - फोटो : Reuters
आज के समय में जब सीरिया का नाम लिया जाता है तो एक भयानक सी तस्वीर सामने उभर कर सामने आती है।
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इतने बरसे बम कि गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे

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गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे - फोटो : Reuters
पिछले पांच वर्षों में सीरिया में इतने बम बरसाए गए हैं कि उनकी संख्या करना भी कठिन होगा।
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इतने बरसे बम कि गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे

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गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे - फोटो : Reuters
इन हमलों में लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई है तो वहीं लाखों लोगों को दूसरे देशों में पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

इतने बरसे बम कि गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे

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गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे - फोटो : Reuters
इसके बावजूद ऐसे लोग भी है जो आज भी सीरिया के इदलिब शहर में रहकर अपनी जिंदगी जी रहे हैं।
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गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे - फोटो : Reuters
सीरिया पर हुई बमबारी का सबसे ज्यादा असर वहां रहने वाले बच्चों पर पड़ा है।
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इतने बरसे बम कि गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे

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गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे - फोटो : Reuters
जिन मासूम बच्चों को आज खुले आसमान के नीचे रहकर पढ़ाई करनी चाहिए थी।
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गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे - फोटो : Reuters
वो बच्चे आज गुफाओं में जाकर पढ़ाई करने को मजबूर है।

इतने बरसे बम कि गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे

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गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे - फोटो : Reuters
सीरिया के इदलिब में रहने वाले बच्चों को अरबी, अंग्रेजी, गणित और धर्म की पढ़ाई कराई जाती है। सीरिया के उत्तरी पश्चिम इदलिब प्रांत में बच्चों की पढ़ाई के कुछ इंतजाम क‌िए गए हैं।

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गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे - फोटो : Reuters
14 साल का एक बच्चा जो गुफा में जाकर पढ़ाई करता है। उसका कहना है कि यहां पर पढ़ने के लिए हालात अच्छे नहीं है। पर फिर भी हमें पढ़ाने वाले प्रोफेसर और पत्नी हमारा अच्छा ख्याल रखते हैं।
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गुफाओं में पढ़ने को मजबूर हुए बच्‍चे - फोटो : Reuters
बच्चे ने बताया कि हम जमीन पर बैठ कर गुफा में पढ़ते हैं। कई बार अंधेरा होने पर हमें साफ भी नहीं दिखाई देता है।
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