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अंतरिक्ष में इस तरह पैदा किया जा सकता है भोजन, 2030 तक चंद्रमा पर बनेगी कालोनी

Sat, 31 Mar 2018 08:56 PM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
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इंसान को धरती पर एक अदद छत भले ही नहीं मिल पाई हो लेकिन अंतरिक्ष में इंसानी बस्तियों को बसाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। इन अंतरिक्ष बस्तियों को बसाने में सबसे बड़ी समस्या वहां रहने वालों के भोजन और स्वास्थ्य को लेकर है। लेकिन अंतरिक्ष में भोजन को लेकर अब फिक्र की कोई बात नहीं है क्योंकि अपनी जिंदगी के 500 घंटे अंतरिक्ष में बिता चुकी जापान की 66 वर्षीय महिला ने इसकी तैयारी कर ली है। 
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अंतरिक्ष में भोजन पैदा करने का तरीका ढूंढा

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उन्होंने दावा तक किया कि 2030 तक चंद्रमा पर कालोनी स्थापित की जा सकेगी। अंतरिक्ष में समय बिता चुकी जापान की वैज्ञानिक चिआकी मुकाई अपनी 30 सदस्यों वाली शोध टीम के साथ टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस की हाई-टेक प्रयोगशाला में अंतरिक्ष कालोनी के अपने प्रोजेक्ट पर जी-जान से जुटी हुई हैं।
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2030 तक चंद्रमा पर स्थापित हो सकेगी कालोनी : जापानी वैज्ञानिक

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उनकी टीम इस बात का अध्ययन कर रही है कि चंद्रमा और मंगल पर भविष्य में इंसान को किस प्रकार से जीवित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि हम सबके रहने के लिए यह धरती छोटी पड़ने लगी है, इसलिए हमारा काम संभावनाओं को तलाशना है। उन्होंने कहा कि अब अंतरिक्ष में कालोनी बसाने का काम नए चरण में पहुंच चुका है।

हाई वोल्टेज बिजली सप्लाई कर तरल प्लाज्मा के इस्तेमाल से पैदा हो सकेगा भोजन

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2030 तक चंद्रमा पर कालोनी स्थापित करने के लिहाज से मुकाई की टीम ने अंतरिक्ष में भोजन पैदा करने का तरीका खोज निकाला है। इस कोशिश में एक खारे द्रव्य में हाई वोल्टेज बिजली सप्लाई कर तरल प्लाज्मा तैयार किया जाएगा। इसका इस्तेमाल भोजन के उत्पादन में किया जाएगा। 
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जल्द पैदा किए जा सकेंगे आलू

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इस नई तकनीक से आलू भी जल्द पैदा किए जा सकेंगे। मुकाई की इच्छा है कि वह चंद्रमा पर बनने वाली इस कालोनी को अपने जीते-जी देख ले और एक बार फिर अंतरिक्ष की सैर करके आ जाए।
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बिजली उत्पादन व कचरा प्रबंधन पर भी तैयारी

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चिआकी मुकाई की टीम ने थर्मोइलेक्ट्रिक सेंसरों द्वारा बिजली उत्पादन का सिस्टम भी बनाया है, जिसका आकार आईपॉड नैनो के बराबर होगा। इसके उपयोग से अंतरिक्ष कालोनी में घरों के भीतर सामान्य तापमान बनाया जा सकेगा। वहां दिन का बाहरी तापमान 130 डिग्री सेंटीग्रेड और रात में मायनस 230 डिग्री सेंटीग्रेड होता है, जिसमें यह तकनीकी अलग ढंग से काम करेगी। 
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जरूरत के हिसाब से बनेगी बिजली

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यह पूरी कालोनी की जरूरत के हिसाब से बिजली बनाएगी। उनकी दूसरी टीम अंतरिक्ष में कचरे के प्रबंधन पर काम कर रही है। इसका धरती पर भी नई कालोनी बसाने से पहले इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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बिना मिट्टी के तैयार हो सकेगी फसल

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मुकाई ने बताया कि हमारे शोधकर्ता खाद्य उत्पादन की ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जिसमें मिट्टी की जरूरत नहीं पड़ेगी और फसल तैयार हो सकेगी। यदि यह फार्मूला वास्तव में काम कर जाता है तो दुनिया में चमत्कार हो जाएगा और अफ्रीका के ऐसे कई देश जो संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं वहां भोजन पैदा किया जा सकेगा। 
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