ब्राजील के रियो द जिनेरो शहर में सैकड़ों मूर्तियों की आंखों पर लाल पट्टी बांध दी गई है। ऐसा ब्राजील में गहराते राजनीतिक संकट के खिलाफ कलात्मक विरोध दर्ज कराने के किया गया है। एक अज्ञात कलाकार ने कहा है कि वह नहीं चाहते थे कि ब्राजील के इतिहास में महत्व रखने वाली हस्तियां देश की शर्मनाक हालात की गवाह बनें।
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आखिर क्यों बांध दी महात्मा गांधी के आंखें पर बांध दी लाल पट्टी?
- फोटो : Project Oraculo
महात्मा गांधी की मूर्ति भी रियो द जिनेरो की उन मूर्तियों में शामिल है, जिनकी आंखों पर पट्टी बांधी गई।
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आखिर क्यों बांध दी महात्मा गांधी के आंखें पर बांध दी लाल पट्टी?
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ब्राजील में एविएशन क्षेत्र के पितामह माने जाने वाले अल्बर्तो सैन्टॉस ड्यूमॉन्ड की मूर्ति। रियो द जिनेरो में सैकड़ों मूर्तियों में से एक ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति और पहले तानाशाह गुतेलियो वर्गास की है, जो ब्राज़ील में 1930 से 1945 के बीच सत्ता पर काबिज रहे। 'प्रोजेक्ट ओरेक्यूलो' के तहत काम करने वाले कलाकार ने कहा कि वह बताना चाहते हैं कि विरोध प्रदर्शन सिर्फ सड़कों पर नहीं किया जाता।
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ब्राजील में बजट और अर्थव्यवस्था में गड़बड़ी की मांग को लेकर राष्ट्रपति दिल्मा रुएफ के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही है। ब्राजील की अर्थव्यवस्था पिछले कई दशकों के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है।
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इजाबेल, प्रिंसेस इंपीरियल ऑफ ब्राजील की मूर्ति। इजाबेल ने स्वर्ण कानून पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बाद 13 मई 1888 को ब्राजील में गुलामों को आजादी दे दी गई थी। ब्राजील में तख्तापलट के बाद सैनिक सरकार के पहले राष्ट्रपति हम्बर्तो दे अलेंकर कास्टेलो ब्रांको की मूर्ति।