अब तक विदेश सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहीं लिज ट्रस अब ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री होंगी। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी भारतीय मूल के ऋषि सुनक को हरा दिया है।
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ब्रिटेन में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ है। अब तक विदेश सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहीं लिज ट्रस अब ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री होंगी। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी भारतीय मूल के ऋषि सुनक को हरा दिया है। लिज की जीत के साथ ही उनके भारत के रिश्तों को लेकर चर्चा होने लगी है। हर कोई जानना चाहता है कि लिज के प्रधानमंत्री बनने से भारत पर क्या असर पड़ सकता है? भारत को लेकर लिज के कैसे विचार हैं? आइए समझते हैं इसे...
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लिज ट्रस और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर
- फोटो : अमर उजाला
भारत से लिज के रिश्ते कैसे हैं?
हमने ये समझने के लिए विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल से बात की। उन्होंने कहा, 'रूस-यूक्रेन का युद्ध शुरू होने के एक महीने बाद ही बतौर ब्रिटेन की विदेश सचिव लिज ट्रस 31 मार्च को भारत पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने खुलकर भारत की प्रशंसा की थी। लिस दक्षिणपंथी विचारधारा से हैं। ऐसे में उनके और भारत की मौजूदा सरकार के विचार काफी मेल खाते हैं। मतलब साफ है कि दोनों के रिश्ते आने वाले समय में और अच्छे होंगे।'
आदित्य आगे कहते हैं, 'लिज ने अपने पूरे चुनाव अभियान के दौरान भारत के पड़ोसी चीन की खिंचाई की थी। मतलब भारत-चीन मसले पर लिज हमेशा भारत के साथ होंगी।'
आदित्य के मुताबिक, मई में ब्रिटेन-भारत के प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय वार्ता की थी। तब लिज ट्रस विदेश सचिव थीं। उस दौरान भी उन्होंने कहा था कि भारत के लिए ब्रिटेन हमेशा तैयार है। ये बयान भी तब आया था, जब रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था और इसको लेकर ब्रिटेन ने रूस के खिलाफ सख्त कदम उठाए थे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने तो युद्ध के दौरान यूक्रेन का दौरा किया था। लिज ट्रस भी लगातार रूस के खिलाफ बयान दे रहीं थीं। वहीं, दूसरी ओर भारत और रूस के रिश्ते मजबूत हो रहे थे। तमाम विरोध के बावजूद भारत लगातार रूस से अपने व्यापारिक रिश्ते बरकरार रख रहा था।
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लिज ट्रस
- फोटो : अमर उजाला
भारत की नीतियों को आगे बढ़ाने को कहा था
लिज ने अपने दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी। दोनों की द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। तब लिज ने सैन्य सहयोग को लेकर भी बात की थी। ये भी कहा था वह आने वाले समय में भारत की नीतियों को आगे बढ़ाएंगी। मसलन मेक इन इंडिया प्रोग्राम को भी मजबूत करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि रक्षा क्षेत्र में उनकी कंपनियां भारत में काम कर सकती हैं। तब जयशंकर ने लिज के इस प्रस्ताव का स्वागत किया था। अब जब वह खुद प्रधानमंत्री बन गईं हैं, तो जल्द ही इस मसले को लेकर आगे फैसला हो सकता है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला
पीएम मोदी के विजन की कर चुकी हैं तारीफ
लिज ट्रस ने एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री का विजन काफी अच्छा है। वह अपने देश और देश के लोगों के लिए काम करते हैं। आर्थिक, सामाजिक व वैश्विक तौर पर उनकी नीतियां देश के लोगों के हिसाब से होती हैं।
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ऋषि सुनक और लिज ट्रस
- फोटो : अमर उजाला
चुनाव के नतीजे क्या आए?
सात जुलाई को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दिया था। जॉनसन पर कई तरह के आरोप लगे थे। जिसके बाद पार्टी में उनके खिलाफ बगावत शुरू हो गई थी। जॉनसन के इस्तीफे के बाद कंजर्वेटिव पार्टी में नए प्रधानमंत्री के लिए चुनाव हुए। इसमें कई उम्मीदवार थे। हालांकि, मुख्य मुकाबला भारतीय मूल के ऋषि सुनक और लिज ट्रस के बीच हुआ। पार्टी के करीब 1.72 लाख सदस्यों ने वोटिंग की।
आज वोटिंग के नतीजे आ गए। इसमें लिज ट्रस को 81 हजार 326 सदस्यों का वोट मिले। वहीं, ऋषि सुनक के पक्ष में 60 हजार 399 सदस्यों ने वोट किया। 654 वोट रिजेक्ट हुए। इस तरह से लिज ट्रस की जीत हुई और अब वह ब्रिटेन की प्रधानमंत्री के साथ-साथ कंजर्वेटिव पार्टी की प्रमुख भी होंगी।
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ब्रिटेन की विदेश सचिव लिज ट्रस और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों
- फोटो : सोशल मीडिया
कौन हैं लिज ट्रस?
लिज ट्रस का पूरा नाम मैरी एलिजाबेथ ट्रस है। इनका जन्म 26 जुलाई 1975 को इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में हुआ था। पिता जॉन केनेथ और मां प्रिसिला मैरी ट्रस थीं। पिता लीड्स विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर, जबकि उनकी मां एक नर्स थीं। जब ट्रस चार साल की थीं, तब उनका परिवार स्कॉटलैंड शिफ्ट हो गया था। यहां उन्होंने शुरुआती पढ़ाई की। इसके कुछ साल बाद कनाडा शिफ्ट हो गईं। 1996 में ट्रस ने मेर्टन कॉलेज, ऑक्सफोर्ड से दर्शन, राजनीति और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की है।
मेर्टन कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ट्रस लिबरल डेमोक्रेट्स पार्टी के लिए प्रचार करतीं थीं। वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी लिबरल डेमोक्रेट्स की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। इसके अलावा लिबरल डेमोक्रेट्स यूथ एंड स्टूडेंट्स की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी रहीं। छात्रनेता के रूप में ट्रस ने लेबर पार्टी के लिए खूब प्रचार भी किया। हालांकि, स्नातक खत्म होते-होते यानी 1996 में उन्होंने डेमोक्रेट्स छोड़कर कंजरवेटिव पार्टी जॉइन कर ली। तभी से वह इस पार्टी में हैं।
1996 से 2000 के बीच ट्रस ने शेल के लिए अकाउंटेंट के तौर पर काम किया। ब्रिटेन की टेलीकम्युनिकेशन कंपनी केबिल एंड वायरलेस में भी उन्होंने काम किया है। इस कंपनी में वह इकनॉमिक डायरेक्टर के पद तक पहुंची थीं। 2005 में उन्होंने कंपनी छोड़ दी। ट्रस ने 1998 और 2002 में ग्रीनविच लंदन बोरो काउंसिल इलेक्शन भी लड़ा, हालांकि दोनों में ही उन्हें हार मिली। चार मई 2006 को उन्होंने पहला चुनाव पार्षद के तौर पर जीता। इसके बाद 2010 में वह पहली बार सांसद चुनी गईं।
बताया जाता है कि जब वह सांसद का चुनाव लड़ रहीं थीं, तब उनके पिता ने इसलिए प्रचार करने से मना कर दिया क्योंकि ट्रस कंजरवेटिव पार्टी से थीं और वह लेबर पार्टी को पसंद करते थे। हालांकि मां ने जरूर ट्रस के लिए प्रचार किया। सांसद बनने के दो साल बाद वह शिक्षामंत्री भी बन गईं। बतौर शिक्षामंत्री उन्होंने कई बड़े काम किए। एक सर्वे करवाया, जिसमें मालूम चला कि 18 वर्ष तक केवल 20 प्रतिशत ब्रिटिश छात्र गणित पढ़ पाते हैं। ऐसे में उन्होंने पूर्णकालिक बच्चों के लिए गणित विषय अनिवार्य कर दिया। 2014 में उन्हें पर्यावरण मंत्री बनाया गया।