फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pope Francis: पोप फ्रांसिस के निधन के बाद अब क्या होगा, कब-कैसे चुना जाएगा उनका उत्तराधिकारी; कौन-कौन दावेदार?

Tue, 22 Apr 2025 12:43 PM IST
अभिषेक दीक्षित स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

पोप फ्रांसिस हमारे बीच नहीं रहे। सोमवार 21 अप्रैल, 2025 को 88 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उन्होंने वेटिकन के कासा सांता मार्टा स्थित अपने निवास पर सुबह 7.30 बजे (स्थानीय समयानुसार) अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बीते दिन ईस्टर के अवसर पर लंबे समय के बाद वे लोगों के सामने आए थे।
विज्ञापन
1 of 10
पोप फ्रांसिस - फोटो : PTI
पोप फ्रांसिस के निधन के बाद पूरी दुनिया में शोक की लहर है। पोप फ्रांसिस जेसुइट ऑर्डर से पहले पोप थे। वे 8वीं शताब्दी के बाद से यूरोप के बाहर से पहले पोप थे। अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो के रूप में जन्मे पोप फ्रांसिस 1969 में कैथोलिक पादरी नियुक्त किया गया था। 28 फरवरी, 2013 को पोप बेनेडिक्ट XVI के इस्तीफे के बाद 13 मार्च को एक पोप सम्मेलन ने कार्डिनल बर्गोग्लियो को उनका उत्तराधिकारी चुना। उन्होंने सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी के सम्मान में फ्रांसिस को अपना पोप नाम चुना। अब आधिकारिक शोक की 14 दिन की अवधि होगी, जिसके बाद कार्डिनल मसीह के नए विकर का चुनाव करने के लिए सम्मेलन में जाएंगे।

कब, कहां और कैसे हुआ पोप फ्रांसिस का निधन?
पोप फ्रांसिस का 21 अप्रैल यानी सोमवार को 88 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उन्होंने वेटिकन के कासा सांता मार्टा स्थित अपने निवास पर सुबह 7.30 बजे (स्थानीय समयानुसार) अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बीते दिन ईस्टर के अवसर पर लंबे समय के बाद वे लोगों के सामने आए थे।
विज्ञापन

2 of 10
पोप फ्रांसिस के निधन के बाद शोक की लहर - फोटो : PTI
पोप फ्रांसिस क्यों खास थे?
फ्रांसिस के पोप का पद ग्रहण करने से पहले कई घटनाएं उनसे जुड़ी। वह अमेरिका या दक्षिणी गोलार्ध से आने वाले पहले पोप थे। सीरिया में जन्मे ग्रेगरी तृतीय की 741 में मृत्यु के बाद से रोम में कोई गैर-यूरोपीय बिशप नहीं था। वह सेंट पीटर के सिंहासन पर निर्वाचित होने वाले पहले जेसुइट भी थे। ऐतिहासिक तौर से रोम में जेसुइट्स को शक की नजर से देखा जाता था। उनके पूर्ववर्ती, बेनेडिक्ट 16 वें लगभग 600 वर्षों में स्वैच्छिक तौर से सेवानिवृत्त होने वाले पहले पोप थे। कैथोलिकों का मानना था कि नया पोप कोई युवा शख्स होगा, लेकिन अर्जेंटीना के कार्डिनल बर्गोग्लियो जब 2013 में पोप बने तो उनकी उम्र 70 से अधिक थी। उन्होंने खुद को एक समझौतावादी उम्मीदवार के तौर पर पेश किया था। यौन मामलों पर अपने विचारों से रूढ़िवादियों को आकर्षित किया तो सामाजिक न्याय पर अपने उदारवादी रुख से सुधारकों को लुभाया।
विज्ञापन

3 of 10
पोप फ्रांसिस - फोटो : PTI
बतौर पोप क्या-क्या अलग किया?
चुनाव के वक्त से ही फ्रांसिस ने संकेत दे दिया था कि वे चीजों को अलग ढंग से करेंगे। उन्होंने कार्डिनल्स का स्वागत पोप के सिंहासन पर बैठने के बजाय खड़े होकर किया। वह शानो-शौकत और भव्यता के बजाय विनम्रता को तरजीह देने के लिए दृढ़ संकल्पित थे। उन्होंने पोप की लिमोजिन से दूरी बना ली और साझा बस पर जोर दिया।
नए पोप ने 1.2 अरब की आबादी वाले चर्च के लिए एक नैतिक मिशन तय किया। कैथोलिक चर्च के प्रमुख के तौर पर उनका आखिरी काम ईस्टर पर रविवार को सेंट पीटर्स स्क्वायर की बालकनी में मौजूद होना था। यहां उन्होंने कई हफ्ते तक अस्पताल में रहने के बाद श्रद्धालुओं का हाथ हिलाकर अभिवादन किया था।

4 of 10
Pope Francis - फोटो : Amar Ujala
पोप बनने से पहले कैसा था जीवन?
जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो नाम से वह 17 दिसंबर 1936 को अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में पैदा हुए। बचपन में गंभीर निमोनिया के बाद फेफड़ों के एक हिस्सा निकाल देने के कारण उन्हें जिंदगी भर संक्रमण का खतरा रहा। एक दशक बाद उन्हें दीक्षा दी गई। 1973 में अर्जेंटीना के प्रांतीय सुपीरियर बने। युवा बर्गोग्लियो ने रसायनज्ञ के तौर पर स्नातक होने से पहले नाइट क्लब बाउंसर और फर्श सफाई कर्मचारी के रूप में काम किया था। 1992 में ब्यूनस आयर्स के सहायक बिशप बने। फिर आर्कबिशप बने। पोप जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें 2001 में कार्डिनल बनाया और उन्होंने चर्च की सिविल सेवा, क्यूरिया में पद संभाला। वे वरिष्ठ पादरी के दिखावों से दूर रहे। वे आमतौर पर इकॉनमी क्लास में यात्रा करते थे और अपने नए पद के लाल और बैंगनी रंग के बजाय काला गाउन पहनना पसंद करते थे। अपने उपदेशों में, उन्होंने समाज के सबसे गरीब लोगों पर ध्यान देने में नाकाम सरकारों की आलोचना की।
विज्ञापन

5 of 10
पोप फ्रांसिस के निधन के बाद शोक की लहर - फोटो : PTI
अब आगे क्या होगा?
पोप की मृत्यु के साथ ही सदियों पुरानी रस्म शुरू हो जाती है, जिसमें कार्डिनल कॉलेज की तरफ से उत्तराधिकारी का चुनाव करने के लिए पवित्र शपथ लेना, मतपत्रों की गिनती के बाद उन्हें सुई और धागे से छेदना और फिर जलाकर सफेद या काला धुआं निकालना शामिल है, ताकि यह संकेत मिल सके कि दुनिया के 1.2 अरब कैथोलिकों के लिए कोई नया नेता चुन लिया गया है।
  • पोप फ्रांसिस के निधन के बाद नौ दिन का शोक मनाया जाएगा। इस अवधि को नोवेन्डिएल कहा जाता है। इसके बाद नए पोप को चुनने की प्रक्रिया शुरू होगी। कुछ दिनों में दुनियाभर के कार्डिनल पापल कॉन्क्लेव के लिए रोम पहुंच जाएंगे।
  • पोप का चयन कार्डिनल का प्रतिनिधिमंडल करेगा, जो कैथोलिक चर्च के सबसे वरिष्ठ पादरी होते हैं। कार्डिनल ही तय करेंगे कि कॉन्क्लेव कब शुरू होगा। आमतौर पर 15-20 दिनों में वेटिकन के सिस्टिन चैपल में नए पोप के चुनाव के लिए पॉपल कॉन्क्लेव शुरू होता है।
विज्ञापन

6 of 10
पोप फ्रांसिस के निधन के बाद शोक की लहर - फोटो : PTI
मतदान में कौन-कौन हिस्सा ले सकता है?
पोप के चुनाव के लिए 80 वर्ष से अधिक उम्र के कार्डिनल मतदान में हिस्सा नहीं ले सकते। हाल में अपडेट वेटिकन के आंकड़ों के मुताबिक 80 वर्ष से कम आयु के 136 ही कार्डिनल मतदान के पात्र हैं। कॉन्क्लेव शुरू होने पर सभी को वहीं रहना होगा। सारे कार्डिनल सिस्टीन चैपल में ही खाना खाते हैं, वोट डालते हैं और सोते हैं। मतदान के दौरान क्या हुआ, इस बारे में बाहर संवाद करने से कार्डिनल्स को सख्त मनाही रहती है।
विज्ञापन

7 of 10
पोप फ्रांसिस के निधन के बाद शोक की लहर - फोटो : PTI
कैसे होता है मतदान?
प्रारंभिक मास के बाद दोपहर को सिस्टिन चैपल में पहला मतदान होता है। यदि कोई पोप नहीं चुना जाता है, तो आने वाले दिनों में प्रत्येक सुबह दो और दोपहर दो मतदान होते हैं। मतपत्र कागज के टुकड़े होते हैं, जिन पर लिखा होता है- एलिगो इन सुम्मम पोंटिफिसम (मैं सर्वोच्च पोप के रूप में चुनता हूं) और इसके आगे कार्डिनल को पसंद का नाम लिखना होता है। प्रत्येक कार्डिनल इसके बाद कागज को आधा मोड़ता है, चैपल के सामने जाता है और घोषणा करता है- मैं अपने गवाह के रूप में मसीह प्रभु को बुलाता हूं, जो मेरा न्यायाधीश होगा। मेरा वोट उस व्यक्ति को दिया जाता है जिसे मैं ईश्वर के सामने चुना जाना चाहता हूं। फिर वह मतपत्र को एक पात्र में डालता है।

8 of 10
पोप फ्रांसिस के निधन के बाद शोक की लहर - फोटो : PTI
मतदान के बाद की क्या प्रक्रिया?
पोप बेनेडिक्ट ने जॉन पॉल के 1996 के कॉन्क्लेव नियमों में संशोधन करके स्पष्ट किया था कि मतदान में भले ही कितना भी समय लगे लेकिन नए पोप के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा। गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए मतपत्रों को स्टोव में जला दिया जाता है।
  • सिस्टिन चैपल की चिमनी से निकलने वाले काले धुएं का मतलब है कि कोई निर्णय नहीं हुआ है, जबकि सफेद धुआं संकेत देता है कि कार्डिनल्स ने पोप चुन लिया है और इसे स्वीकार कर लिया है।
  • चैपल की घंटियां बजने लगती है और अपने नए पोपल नाम के साथ नए पोप बाहर आकर श्रद्धालुओं को आशीर्वीद देते हैं।

9 of 10
पोप फ्रांसिस - फोटो : ANI
पोप फ्रांसिस का उत्तराधिकारी कौन?
फ्रांसिस के निधन के बाद अगले पोप के चुनाव के लिए कई नाम सामने आए हैं।
जीन-मार्क एवलिन, मार्सिले के आर्चबिशप (66 वर्ष)
जीन-मार्क एवलिन को स्थानीय चर्च में जॉन XXIV के नाम से जाना जाता है। उनके पास धर्मशास्त्र में डॉक्टरेट और दर्शनशास्त्र में डिग्री है। उनका जन्म अल्जीरिया में स्पेनिश प्रवासियों के परिवार में हुआ था। एवलिन अपने मिलनसार, सहज स्वभाव और  फ्रांसिस के साथ अपनी वैचारिक निकटता विशेष रूप से आप्रवासन और मुस्लिम दुनिया के साथ संबंधों के लिए जाने जाते हैं।

कार्डिनल पीटर एर्दो-हंगरी (72 वर्ष)
कार्डिनल पीटर एर्दो पोप फ्रांसिस के एकदम विपरीत हैं। जहां फ्रांसिस आप्रवासन, समलैंगिकता और मुस्लिम दुनिया के साथ संबंधों को लेकर उदारवादी रुख रखते हैं। वहीं इसके विपरीत एर्दो रूढ़िवादी खेमे से आते हैं।  2015 के प्रवासी संकट के दौरान वेटिकन में उन्होंने चर्चों से शरणार्थियों को लेने के पोप फ्रांसिस के आह्वान का विरोध किया था और कहा था कि यह मानव तस्करी के बराबर है। 

कार्डिनल मारियो ग्रेक -माल्टा (68 वर्ष)
कार्डिनल मारियो ग्रेक गोजो से आते हैं, जो माल्टा का एक छोटा सा द्वीप है और यूरोपीय संघ का सबसे छोटा देश भी है। पोप फ्रांसिस ने उन्हें सिनोड ऑफ बिशप्स का सेक्रेटरी जनरल नियुक्त किया था। जो वेटिकन में एक अत्यंत प्रभावशाली पद है। शुरुआत में उन्हें एक रूढ़िवादी के रूप में देखा जाता था, लेकिन बाद में वह पोप फ्रांसिस के सुधारों के समर्थक बन गए।

कार्डिनल जुआन जोसे ओमेला  - स्पेन (79 वर्ष)
कार्डिनल जुआन जोसे ओमेला बार्सिलोना के आर्चबिशप हैं और स्पेनिश हैं। ओमेला को पोप फ्रांसिस के खेमे का माना जाता है। अपने सहज, सौम्य स्वभाव और विनम्र जीवन जीने के लिए जाने जानेवाले ओमेला का जन्म 1946 में स्पेन के उत्तर-पूर्वी गांव क्रेटास में हुआ था। 1970 में वे पादरी बने। 1999 से 2015 तक उन्होंने स्पेन की एक संस्था के साथ काम किया, जो विकासशील देशों में भुखमरी, बीमारी और गरीबी से लड़ने का कार्य करती है। वे 1996 में बिशप बने और 2015 में उन्हें बार्सिलोना का आर्चबिशप बनाया गया। ठीक एक वर्ष बाद पोप फ्रांसिस ने उन्हें कार्डिनल की लाल टोपी पहनाई । 2023 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें अपने नौ सदस्यीय सलाहकार मंडल (किचन कैबिनेट) में शामिल किया, जो शासन से जुड़े मुद्दों पर उन्हें परामर्श देता है।

कार्डिनल पिएत्रो पैरोलीन- इटली  (70 वर्ष)
कार्डिनल पिएत्रो पैरोलीन वेटिकन के वरिष्ठ राजनयिक माने जाते हैं। वे वर्तमान में पोप फ्रांसिस के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट हैं। यह पद वेटिकन में प्रधानमंत्री के समकक्ष होता है और कभी-कभी इन्हें डिप्टी पोप भी कहा जाता है क्योंकि ये पोप के बाद वेटिकन में दूसरा सबसे अहम स्थान होता है। वह इस पद पर 2013 से हैं, यानी जिस साल पोप फ्रांसिस चुने गए थे।पैरोलीन को एक ऐसे संतुलित उम्मीदवार के रूप में देखा जाता है जो प्रगतिशीलों और रूढ़िवादियों दोनों को स्वीकार्य हो सकते हैं। इसलिए कई लोग उन्हें कॉन्क्लेव में सर्वमान्य विकल्प मानते हैं।

अपने करियर के अधिकांश समय वे कलीसिया के राजनयिक रहे हैं। पोप बेनेडिक्ट के कार्यकाल में उन्होंने वेटिकन के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर के रूप में काम किया और 2009 में उन्हें वेनेजुएला में वेटिकन का राजदूत नियुक्त किया गया। वे वेटिकन के चीन और वियतनाम के साथ संबंध सुधारने के प्रयासों के प्रमुख सूत्रधार भी रहे हैं। पैरोलीन अगर पोप चुने जाते हैं, तो तीन गैर-इतालवी पोपों (पोलैंड के जॉन पॉल द्वितीय, जर्मनी के बेनेडिक्ट और अर्जेंटीना के फ्रांसिस) के बाद पोप का पद पुनः इटली लौट जाएगा।हालाकि उनका पादरी सेवा का अनुभव सीमित है।
 
कार्डिनल लुइस एंटोनियो टैगले- फिलीपीनो (67 वर्ष)
टैगले को आमतौर पर "एशियाई फ्रांसिस" कहा जाता है, क्योंकि वे पोप फ्रांसिस की तरह सामाजिक न्याय के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखते हैं। यदि वे पोप चुने जाते हैं, तो वे एशिया से चुने जाने वाले पहले पोप होंगे। पोप बनने के लिए सभी अपेक्षित योग्यताओं पर खरे उतरते हैं। 1982 में पादरी बनने के बाद उन्होंने कई दशकों तक सेवाएं दीं। बाद में उन्हें इमस का बिशप और फिर मनीला का आर्चबिशप बनाया गया। जहां उन्होंने प्रशासनिक अनुभव भी अर्जित किया। पोप बेनेडिक्ट ने 2012 में उन्हें कार्डिनल बनाया। 2019 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें मनीला से वेटिकन बुलाकर चर्च के मिशनरी विभाग डिकास्ट्री फॉर इवैंजेलाइज़ेशन का प्रमुख नियुक्त किया। उनकी माता चीनी मूल की फिलीपीनो थीं। टैगले धाराप्रवाह इतालवी और अंग्रेजी बोलते हैं।
 
कार्डिनल जोसेफ टोबिन-अमेरिका (72 वर्ष)
जोसेफ टोबिन- न्यूआर्क के आर्चबिशप हैं। यह संभावना कम ही है कि दुनिया भर के कार्डिनल पहली बार किसी अमेरिकी को पोप चुनें, लेकिन अगर ऐसा हुआ, तो जोसेफ टोबिन एक मजबूत दावेदार माने जा सकते हैं। डेट्रॉएट में जन्मे टोबिन रेडेम्प्टोरिस्ट्स नामक एक प्रमुख कैथोलिक धार्मिक संगठन के वैश्विक नेता रह चुके हैं। उन्होंने दुनिया के कई देशों में समय बिताया है और वे इतालवी, स्पेनिश, फ्रेंच और पुर्तगाली भाषाएं धाराप्रवाह बोलते हैं। उन्हें वेटिकन सेवा और अमेरिका की कलीसिया में शीर्ष पदों का भी व्यापक अनुभव है। 2009 से 2012 के बीच वे वेटिकन के एक विभाग में दूसरे सबसे बड़े पद पर रहे। इसके बाद पोप बेनेडिक्ट ने उन्हें इंडियाना के इंडियानापोलिस का आर्चबिशप नियुक्त किया। 2016 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें कार्डिनल बनाया और बाद में न्यूआर्क का आर्चबिशप नियुक्त किया।

एम मारिया जुप्पी-इटली (69 वर्ष)
मैटेओ मारिया जुप्पी बोलोग्ना के आर्चबिशप हैं। यदि जुप्पी पोप चुने जाते हैं, तो वे 1978 के बाद पहले इतालवी पोप होंगे। वे तामझाम और औपचारिकताओं में विश्वास नहीं करते। वे अक्सर खुद को "फादर मैटेओ" कहकर बुलाते हैं और बोलोग्ना में कभी-कभी आधिकारिक गाड़ी की जगह साइकिल से यात्रा करते दिखते हैं। जुप्पी एक रोमन हैं। उनके पिता एनरिको वेटिकन के समाचार पत्र L'Osservatore Romano के संडे सप्लीमेंट के संपादक थे।
विज्ञापन

10 of 10
Pope Francis - फोटो : PTI
ये नाम भी रेस में  
इसके अलावा घाना के कार्डिनल पीटर टर्कसन का भी नाम पोप का उत्तराधिकारी माना जा रहा है। वह न्याय और शांति के लिए बने परिषद के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। कार्डिनल रेमंड लियो बर्क भी पोप फ्रांसिस के उत्तराधिकारी की रेस में आगे हैं। उन्हें पोप बेनेडिक्ट XVI ने साल 2010 में कार्डियल बनाया था। इसके अलावा गेरहार्ड मुलर, एंजेलो स्कोला, एंजेलो बैग्नास्को और रॉबर्ट सारा भी पोप फ्रांसिस के उत्तराधिकारी हो सकते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें