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PM Modi US Visit: 'भारत-US के बीच जटिल मुद्दों के जल्द समाधन पर संशय', ध्रुव जयशंकर बोले- व्यक्तिगत रिश्ते अहम

Wed, 12 Feb 2025 07:35 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी अमेरिका यात्रा पर विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के पुत्र ने कहा, इस बैठक से चार अलग-अलग चीजों की उम्मीद कर रहा हूं। ध्रुव ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन अमेरिका के कार्यकारी निदेशक भी हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के दौरे के दौरान दोनों नेताओं के बीच किस तरह के व्यक्तिगत संबंध फिर से स्थापित हो सकते हैं, इस पर भी नजरें रहेंगी।
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पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात पर विदेश मंत्री जयशंकर के बेटे का बयान - फोटो : अमर उजाला / एएनआई
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में भारत और अमेरिका संबंध कैसे रहेंगे, ये सवाल तमाम लोगों के मन में कौंध रहा है। ट्रंप ने शपथ ग्रहण के बाद पहले तीन हफ्ते में ही कई कड़े फैसले लिए हैं। पीएम मोदी की आगामी यात्रा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक  के संबंध में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन अमेरिका के कार्यकारी निदेशक ध्रुव जयशंकर ने कहा, 'मैं इस बैठक के परिणाम में 4 अलग-अलग चीजों की उम्मीद करूंगा। पहली चीज ये कि वे किस तरह के व्यक्तिगत संबंध फिर से स्थापित कर सकते हैं? भारत और अमेरिका के बीच संरचित जुड़ाव के लिए मौजूदा उच्च-स्तरीय प्रारूपों की निरंतरता कैसे बरकरार रहेगी, इस पर भी नजर रहेगी।

दोनों देशों के बीच मुद्दों को हल करने का मौका
ध्रुव जयशंकर ने कहा, क्या संबंधों में कठिनाइयों, विशेष रूप से टैरिफ और आव्रजन को दूर करने का कोई रास्ता है? इस पर भी नजरें रहेंगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कई जटिल मुद्दे हैं, इसलिए उन्हें जल्द ही समाधान की उम्मीद नहीं है। साथ ही जयशंकर ने यह भी कहा, 'अगले साल दोनों देशों के बीच अहम मुद्दों को हल करने के कुछ स्पष्ट रास्ते सामने आ सकते हैं।' अंत में दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा हो, ऐसी आम सहमति बननी चाहिए। अमेरिका का भारत में अहम योगदान
ऐसे ही कुछ बिंदुओं के कारण ट्रंप को यह कहने का मौका भी मिलता है कि अमेरिका में व्यापार घाटे और रोजगार सृजन में भारत की भूमिका है। हालांकि, यह भी हकीकत है कि अमेरिका भारत में मेक इन इंडिया और भारत में तकनीकी विकास कार्यक्रमों में योगदान दे रहा है।
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डोनाल्ड ट्रंप के साथ पीएम मोदी। - फोटो : PTI
रक्षा मोर्चे पर दोनों देशों के रिश्ते कैसे रहेंगे?
बता दें कि पीएम मोदी फ्रांस दौरे पर हैं। इसके बाद वे अमेरिका जाएंगे। बदलते वैश्विक परिदृश्य में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में भारत-अमेरिका सामरिक संबंध कैसे रहेंगे? इस पर सभी सवाल हो रहे हैं। ध्रुव जयशंकर ने इस पहलू पर कहा, पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक के दौरान दो तरह के रक्षा समझौते होंगे। ये आंशिक रूप से अमेरिका और भारत की विभिन्न प्राथमिकताओं को भी दर्शाते हैं। कुछ ऐसी चीजें हैं जो भारत के पास पहले से ही हैं, जो अमेरिका की सूची में हैं। इन चीजों को भारत और अधिक खरीदना चाहता है। उदाहरण के लिए विमान। यह क्षेत्र अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे नौकरियां पैदा करने और व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी। यह राष्ट्रपति ट्रंप के लिए भी बड़ी प्राथमिकता है। भारत को कुछ सह-उत्पादन या सह-तकनीकी लाभ के अवसर भी हैं। उन्होंने कहा कि भारत इन क्षेत्रों में भी अवसरों की तलाश करना चाहेगा।
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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल) - फोटो : एएनआई
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी नजर रहेगी
ध्रुव जयशंकर ने कहा कि पीएम मोदी के आगामी दौरे के दौरान अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते पर भी नजर रहेगी। उन्होंने कहा, 'हम कुछ समझौतों की उम्मीद कर सकते हैं। जिसमें दोनों पक्ष टैरिफ के एक सेट और एक अन्य व्यवस्था पर सहमत हों, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हम अगले 4 वर्षों में एक दूसरे के साथ व्यापार विवादों में न फंसें। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर स्टील का एक बहुत बड़ा उत्पादक है, इसलिए दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में व्यापारिक रिश्ते बढ़ने की संभावना वास्तविक है।

ट्रंप से टैरिफ कटौती पर होगी चर्चा
गौरतलब है कि विदेश यात्रा पर रवाना होने से पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत और अमेरिका के लोगों के पारस्परिक लाभ के लिए वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर काम करेंगे और दुनिया के बेहतर भविष्य को आकार देंगे। उन्होंने कहा, उनकी आगामी अमेरिका यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने और प्रौद्योगिकी, व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में भारत-अमेरिका साझेदारी मजबूत करने की दिशा में एजेंडा तय करेगी। माना जा रहा है कि पीएम मोदी द्विपक्षीय वार्ता में राष्ट्रपति ट्रंप से टैरिफ कटौती पर चर्चा कर सकते हैं। फ्रांस और अमेरिका के चार दिनी दौरे पर रवाना होने से पहले सोमवार को पीएम मोदी ने कहा, मैं अपने मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने के लिए उत्सुक हूं।

अमेरिका में स्टील और एल्युमीनियम आयात पर 25% टैरिफ
यह भी रोचक है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी व्यापार नीति को लेकर गत रविवार को कहा कि वह सोमवार से स्टील और एल्युमीनियम आयात पर 25% टैरिफ लगाने जा रहे हैं और इस हफ्ते के अंत तक इसका पता लगेगा। ट्रंप का मकसद अमेरिकी उद्योगों की रक्षा व व्यापार भुगतान सुधारना है, लेकिन इसका सीधा असर, कनाडा, मेक्सिको, ब्राजील, ब्रिटेन, जापान और ईयू पर पड़ेगा। भारत में स्टील उत्पादकों को निर्यात चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप के इस फैसले पर मूडीज रेटिंग्स ने सोमवार को कहा, गत एक वर्ष में भारत में उच्च स्टील आयात ने पहले ही भारतीय उत्पादकों की कीमतें और कमाई घटा दी है। 2018 में व्यापार युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी स्टील व एल्यूमीनियम आयात में वृद्धि जारी है। मूडीज ने कहा, इससे अमेरिकी स्टील उत्पादकों को फायदा होगा। अमेरिकी टैरिफ से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और भारतीय उत्पादकों की चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ट्रंप ने स्पष्ट नहीं किया कि पारस्परिक टैरिफ में किन देशों पर उनका फोकस रहेगा, लेकिन ये साफ कर दिया कि सभी देशों पर यह लागू होगा।

भारत पर ज्यादा असर नहीं
हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि इस फैसले का बड़ा असर नहीं होगा। स्टील सचिव संदीप पौंड्रिक ने कहा, स्टील आयात पर शुल्क लगाने की अमेरिकी घोषणा का भारतीय उद्योग पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि घरेलू बाजार मजबूत है और थोड़ी मात्रा में अमेरिका को निर्यात किया जाता है। हमने पिछले साल 14 करोड़ टन स्टील का उत्पादन किया, जिसमें से 95,000 टन अमेरिका को निर्यात किया गया।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। - फोटो : ANI
अवैध प्रवास के मुद्दे पर क्या कहा?
अमेरिका से अवैध भारतीय प्रवासियों को वापस भेजने के बारे में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन अमेरिका के कार्यकारी निदेशक ध्रुव जयशंकर ने कहा, भारत की न केवल अमेरिका बल्कि अन्य देशों के साथ भी एक पुरानी नीति रही है... अगर प्रवासी लोगों के भारतीय पहचान की पुष्टि हो जाती है और वे अपने वीजा की अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रुके हैं या उनके पास अमेरिका में रहने के वैध दस्तावेज नहीं हैं। तो ऐसी स्थिति में भारत उन्हें वापस लेने के लिए तैयार है। ध्रुव जयशंकर ने कहा कि भारत पहचान के लिए तंत्र खोजने के लिए कई देशों के साथ काम कर रहा है। अवैध प्रवासियों को देश से निकाला जाना (Deportation) कोई नई नीति नहीं है। हालांकि, इसके असर के कारण भारत में स्पष्ट रूप से बहुत नकारात्मक चीजें हुई हैं। इस बारे में बहुत गंभीरता से बात करना जरूरी है। इसे कैसे बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है और आगे क्या किया जा सकता है, इस पर मंथन करना मददगार होगा।
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