पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कारण है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के खिलाफ तख्तापलट की अटकलें जोर पकड़ रही हैं। सूत्रों और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सत्ता के भीतर असंतोष और सेना के रणनीतिक रुख में बदलाव इस उठापटक के संकेत दे रहे हैं। सेना समर्थक हलकों में इसे अंदरूनी सुधार और रणनीतिक संतुलन की प्रक्रिया बताया जा रहा है, जबकि विपक्ष इसे शहबाज सरकार की कमजोर पकड़ का परिणाम मान रहा है।
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पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर, गृह मंत्री नकवी, पीएम शहबाज, बिलावल भुट्टो और पूर्व पीएम इमरान खान
- फोटो : अमर उजाला/एजेंसी
पाकिस्तान में शहबाज शरीफ सरकार को लेकर तख्तापलट की अटकलें इन दिनों मीडिया और राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही हैं। देश के प्रमुख पत्रकारों, संपादकों और राजनीतिक विश्लेषकों ने खुलकर इन संभावनाओं पर टिप्पणी की है। कुछ का मानना है कि सत्ता के गलियारों में एक बार फिर 'हाइब्रिड सिस्टम' का नया रूप आकार ले रहा है, जबकि सेना समर्थक इसे आंतरिक असंतोष और सैन्य प्रतिष्ठान की रणनीतिक पुनर्रचना से जोड़ रहे हैं।
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पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स / एजेंसी
हाइब्रिड सिस्टम पाकिस्तान की राजनीति में वह व्यवस्था है, जिसमें सिविल सरकार दिखावे के लिए होती है, लेकिन असली सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति सेना और खुफिया एजेंसियों के पास होती है। कराची से इस्लामाबाद तक पाकिस्तानी समाचार चैनल और अखबारों में यह बहस तेज हो गई है कि क्या शहबाज शरीफ की नेतृत्व वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) सरकार अपनी पांच साल की सांविधानिक अवधि पूरी कर पाएगी या नहीं। प्रमुख टीवी चैनल जियो न्यूज, डॉन न्यूज और बोल टीवी जैसे मीडिया प्लेटफॉर्मों ने लगातार बहसों और रिपोर्टों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।
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पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल
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जियो न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता हामिद मीर ने हाल ही में एक टीवी डिबेट में कहा, जिस तरह से कुछ अदृश्य ताकतें मौजूदा सरकार की निर्णय क्षमता को चुनौती दे रही हैं, उससे स्पष्ट है कि कुछ बहुत बड़ा पक रहा है। यह केवल विपक्ष की नाराजगी नहीं है, बल्कि सत्ता के अन्य केंद्रों की बेचैनी भी सामने आ रही है। वहीं, डॉन न्यूज के राजनीतिक विश्लेषक जाहिद हुसैन ने अपने ताजा लेख में लिखा है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था स्थिरता के बजाय अनिश्चितता की ओर बढ़ रही है। यह केवल तख्तापलट की बात नहीं बल्कि एक नए 'नैरेटिव' को स्थापित करने की कवायद भी हो सकती है।
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पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल
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सत्ता के गलियारों में बेचैनी क्यों
पाकिस्तान के रक्षा प्रतिष्ठान और सरकार के बीच पिछले कुछ हफ्तों से कई मसलों पर टकराव की खबरें आ रही हैं। आंतरिक सुरक्षा नीति, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में नई शर्तों और बलूचिस्तान में सैन्य ऑपरेशनों को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। एक वरिष्ठ सुरक्षा विश्लेषक और पूर्व ब्रिगेडियर सईद नजीर का कहना है कि शाहबाज सरकार की आर्थिक नीतियों से लेकर विदेशी कूटनीति तक, कई मामलों में सैन्य नेतृत्व संतुष्ट नहीं दिखता। यदि यह असंतोष गहराया तो हालात 90 के दशक की पुनरावृत्ति की ओर जा सकते है।
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पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल
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भारत विरोधी नीति के पक्षधर रहे हैं सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर
जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान के 17वें सेनाध्यक्ष हैं, जिन्हें नवंबर 2022 में पदभार सौंपा गया। वे पहले ऐसे सेनाध्यक्ष हैं जिन्होंने मदीना में हिफ्ज-ए-कुरआन (कुरआन कंठस्थ) किया और फिर सेना की सेवा में उच्च पद तक पहुंचे। मुनीर पाकिस्तानी सैन्य खुफिया एजेंसी एमआई (मिलिट्री इंटेलिजेंस) और आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) दोनों के प्रमुख रह चुके हैं। वे फोर्स कमांड नॉर्दर्न एरिया (एफसीएनए) की कमान भी संभाल चुके हैं। मुनीर को सेना में गुप्तचर नेटवर्क और भारत विरोधी नीति के पक्षधर अधिकारी के रूप में देखा जाता है। उनका कार्यकाल अब तक सिविल सरकार पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण और विदेश नीति में सेना की बढ़ती भूमिका के लिए जाना जा रहा है।
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लंच डिप्लोमेसी या सत्ता संकेत
फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच लंच डिप्लोमैसी से पाकिस्तानी मीडिया और विश्लेषकों में यह धारणा गहराती जा रही है कि यह केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक समीकरण का हिस्सा है। जियो न्यूज के राजनीतिक विश्लेषक सलाहुद्दीन बाकर ने कहा, वाशिंगटन में ट्रंप के साथ मुनीर की व्यक्तिगत बैठक संकेत देती है कि कूटनीतिक निर्णयों का केंद्र इस्लामाबाद से हटकर रावलपिंडी शिफ्ट हो गया है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून में खालिद मुहम्मद ने लिखा कि शहबाज सरकार को दरकिनार कर सैन्य नेतृत्व की अमेरिका में बढ़ती सक्रियता सरकार के लिए खतरे की घंटी है।
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इमरान की पार्टी बोली-कठपुतली सरकार की तैयारी
जेल में बंद तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) प्रमुख इमरान खान के समर्थकों ने हाल ही में सोशल मीडिया पर # रिजीम चेंज अगेन ट्रेंड चलाया है। पीटीआई नेताओं का दावा है कि देश में नई "इंजीनियरिंग" की जा रही है, जिसमें संसद को बायपास कर कठपुतली सरकार लाने की तैयारी है। पीटीआई की सीनियर नेता शिरीन मजारी ने एक्स पर लिखा जो सरकार जनता के वोट से नहीं बनी, वह कभी स्थिर नहीं रह सकती। जो शक्तियां शाहबाज शरीफ को लाई थीं, अब वही उनसे तंग आ चुकी हैं।
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पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी (फाइल)
- फोटो : एएनआई
राष्ट्रपति-न्यायपालिका की चुप्पी रहस्यमयी
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की चुप्पी को भी संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं, यदि सांविधानिक संस्थाएं तटस्थ रहीं तो सत्ता परिवर्तन सहज हो सकता है। पाक मीडिया, विश्लेषकों और राजनीतिक हलकों में जो संकेत मिल रहे हैं उनसे संकेत मिलता है कि सरकार न सैन्य प्रतिष्ठान में मौजूदा तनाव गहराता जा रहा है।
पद से नहीं हटाए जाएंगे राष्ट्रपति जरदारी: गृह मंत्री
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को पद से हटाए जाने की अफवाहों को खारिज कर दिया। उन्होंने इसे एक दुर्भावनापूर्ण अभियान करार दिया। नकवी का यह बयान उन अटकलों पर आया है, जिनमें कहा जा रहा था कि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर, जरदारी की जगह राष्ट्रपति बनेंगे।
नकवी ने एक्स पर लिखा, हमें पूरी तरह पता है कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख को निशाना बनाकर चलाए जा रहे इस दुर्भावनापूर्ण अभियान के पीछे कौन है। मैंने स्पष्ट रूप से कहा है कि राष्ट्रपति से इस्तीफा देने या सीओएएस के राष्ट्रपति पद संभालने की आकांक्षा रखने के बारे में न कोई चर्चा हुई है और न ऐसा कोई विचार है। राष्ट्रपति जरदारी के सशस्त्र बलों के नेतृत्व के साथ मजबूत और सम्मानजनक संबंध हैं। मुझे पता है कि ये झूठ कौन फैला रहा, वे ऐसा क्यों कर रहे हैं।