विश्वभर में फैले कोरोना वायरस जैसी महामारी से निपटने के लिए हर देश लॉकडाउन का तरीका अपना रहा है। भारत भी इन्ही देशों में से एक है। मौजूदा वक्त में हेल्थ इमरजेंसी के तहत देश के तमाम हिस्सों में लॉकडाउन लगाया गया है। लोगों को घरों में रहने की सलाह दी जा रही है ताकि इस महामारी को रोका जा सके। सोशल डिस्टेंसिंग इसमें सबसे कारगर साबित हो सकता है। लेकिन इस बीच एक परिवार ऐसा भी है जिन्होंने कोरोना वायरस से बचने के लिए विश्व के तमाम देशों का कई बार दौरा किया और आखिरकार उन्हें ये समझ आया कि वह कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं।
शहर छोड़ने का फैसला गलत
कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए हॉन्ग कॉन्ग की मैरी वोंग अपनी एक साल की बेटी और पति के साथ 20 फरवरी को हांगकांग छोड़कर चली गईं। वहां की स्थिति ठीक नहीं थीं। शहर में COVID-19 से 70 लोग संक्रमित थे और दो लोगों की मौत हो चुकी थी। बावजूद इसके चीन की सीमा पूरी तरह से बंद नहीं की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वोंग ने अपने परिवार के साथ फिलाडेल्फिया जाने का फैसला किया। अब चूंकि वहां अभी तक कोई मामला नहीं था ऐसे में COVID-19 के संक्रमण से बचने के लिए उन्होंने दो महीने तक वहीं रहने का फैसला किया।
काम आया अपना ही देश
अभी महीना भी खत्म नहीं हुआ था कि वोंग को दोबारा हॉन्ग कॉन्ग आना पड़ा। जिस दिन वोंग अपनी वापसी की टिकट बुक कर रही थीं यानी 13 मार्च को उसी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी। उस समय तक फिलाडेल्फिया में COVID-19 का पहला मामला सामने आया था। वहीं न्यूयॉर्क में कोरोना से सैकड़ों लोग संक्रमित हो चुके थे। अमेरिका भर में 2,000 से अधिक मामले सामने आ चुके थे। ऐसे में वोंग को अपने शहर लौटना ज्यादा ठीक लगा। वोंग का परिवार एशिया के उन लोगों में से एक है जो इस वायरस से बचने के लिए यहां वहां की यात्राएं करते रहे और इस यात्रा ने आखिर में उनकी ही जान को जोखिम में डाल दिया। हालांकि वोंग समय पर अपने देश वापस लौट आईं लेकिन उन्हें चीनी सरकार की एडवाइजरी के मुताबिक 14 दिनों तक खुद को होम क्वारंटाइन करना पड़ा।
क्या कर सकती थीं वोंग
कोविड 19 के संक्रमण से बचने के लिए वोंग अपने ही शहर में रहकर खुद को बाहरी दुनिया से दूर रख सकती थीं। वह खुद को होम क्वारंटाइन कर सकती थीं। अभी तक के कोरोना के मामलों को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि होम क्वारंटाइन कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में काफी मददगार साबित हुआ है। अगर वोंग इस यात्रा के दौरान किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ जाती तो वह न जाने कितने लोगों तक यह संक्रमण फैलता। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संक्रमण के 80 फीसदी मामले यूरोप और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में हैं, जिसमें एशिया का एक बड़ा हिस्सा शामिल है।
चीन ने उठाए ये कदम
सिंगापुर, हांगकांग और ताइवान में शुरुआत में ही कोरोना वायरस फैल गया था। हालांकि जितनी तेजी से चीन में इस वायरस ने रफ्तार पकड़ी उतनी ही तेजी से उन्होंने इसके लिए उपाय भी किए। चीन ने बड़े पैमाने पर टेस्ट करवाए, संक्रमित लोगो को अलग किया और सोशल डिस्टैंसिंग यानी भीड़भाड़ में जाने और लोगों के करीब जाने पर पाबंदी लगा दी। जिन लोगों को खुद ही अकेले रहने के लिए कहा गया है, वे ऐसा कर रहे हैं या नहीं, यह जांचने के लिए कई तरीके अपनाए गए।
भारत को भी पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है। इस दौरान बेहद जरूरी सेवाओं के अलावा अन्य चीजों को बंद किया जाएगा। ताकि संक्रमण के फैलने की दर को कम किया जा सके।
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