डब्लूएचओ ने अपने दिए बयान में कहा कि दुनियाभर के लाखों गेमर्स की पहचान गेमिंग डिसॉर्डर से पीड़ितों के रूप में कभी नहीं होगी, भले ही वह गेम के प्रति अधिक अासक्त हों। यह अवस्था ऐसे बहुत ही कम लोगो में पाई जाती है जो बलपूर्वक गेम खेलते है। संगठन के बयान में यह भी कहा गया है कि यदि कोई इस बीमारी से पीड़ित हो जाता है तो उसमें इस रोग की पहचान कोई कुशल डॉक्टर ही कर सकता है।