चीन सरकार बीजिंग की परेड से दुनिया को ये बताना चाहती है कि वो आर्थिक तौर पर तो मज़बूत राष्ट्र है ही, सेना के लिहाज से भी उतना ही मज़बूत है। अमेरिका के बाद कई ऐसे देश हैं जो ताक़त के लिहाज से अपने आपको दूसरे नंबर पर मानते हैं। इस साल मई में मॉस्को में जो परेड हुई, चीन ने गुरुवार को उससे दोगुनी ताक़त दिखाई। चीन दिखाना चाहता है कि वो एक बहुत मज़बूत देश है और दुनिया में उसकी भूमिका उतनी ही बड़ी होनी चाहिए जितनी अमेरिका की है। चीन ने गुरुवार को बीजिंग में ये परेड दूसरे विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण के 70 साल पूरे होने पर आयोजित हुई। एसडी गुप्ता/वरिष्ठ पत्रकार, बीजिंग
विज्ञापन
दुनिया भर में चीन ने सैन्य परेड से क्या साबित किया?
2 of 5
चीन की क़रीब नौ देशों के साथ तकरार चल रही है, जिनमें वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, जापान, ब्रूनई और भारत जैसे देश शामिल हैं। यहां तक कि रूस के साथ भी उसका तनाव था। हालांकि ये अभी कुछ कम हुआ है। इन सभी देशों को ये लगता है कि चीन की मज़बूती उनके लिए ख़तरनाक है। भारत को भी ऐसा ही लगता है। चीन ने परेड में तीन प्रकार की मिसाइलें दिखाईं। शॉर्ट रेंज मिसाइलें जापान जैसे आसपास के देशों को निशाना बनाने के लिए हैं। मध्यम दूरी मिसाइलों का लक्ष्य भारत है।
विज्ञापन
दुनिया भर में चीन ने सैन्य परेड से क्या साबित किया?
3 of 5
लंबी दूरी की मिसाइलों का लक्ष्य अमेरिका के तीन सैन्य ठिकानें हैं। वो मिसाइल सीधे अमरीकी जहाजों और उनके मिलेट्री बेस पर आक्रमण कर सकती हैं। एक मिसाइल की रेंज आठ हज़ार किलोमीटर है जो सीधी अमरीकी इलाक़े के अंदर निशाना साध सकती है। इसीलिए उसे दिखाया गया।
दुनिया भर में चीन ने सैन्य परेड से क्या साबित किया?
4 of 5
इसमें कोई दो राय नहीं है कि चीन अपनी मज़बूती दिखा रहा है। चीन की परेड में 17 देशों ने अपने सैनिकों को भेजा। बाकी देशों ने अपने मंत्री ही भेजे। 17 देशों में से अफ़ग़ानिस्तान जैसे छह देशों ने सिर्फ़ सात-सात लोगों को भेजा। रूस ने सबसे बड़ा दल भेजा, जिसमें 85 लोग थे। उसके बाद पाकिस्तान का नंबर है जिसमें 75 लोग थे। लेकिन इनमें से कई देश बहुत छोटे हैं। भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह मौजूद थे। उनकी मौजूदगी पर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि 'हम भारत के निर्णय का सम्मान करते हैं।'
दुनिया भर में चीन ने सैन्य परेड से क्या साबित किया?
5 of 5
चीन ने अपनी सेना में तीन लाख सैनिकों की कटौती का एलान किया है। 23 लाख में से तीन लाख की कटौती यानी बारह-तेरह प्रतिशत कटौती की जा रही है। ये अपने आप में बहुत बड़ी बात नहीं है। पांच-छह प्रतिशत सैनिक तो हर साल रिटायर होते हैं और नई भर्तियां बहुत कम हैं। चीन आज ऐसे मुकाम पर है जहां बेरोज़गारी बहुत बड़ी समस्या नहीं है। इसलिए सेना में कटौती से देश को ज़्यादा नुक़सान नहीं होगा। तकनीकी तौर पर चीन की सेना बहुत मज़बूत हो गई है। ऐसे में, सैनिकों की संख्या घटाई जा सकती है। वो एक छोटी आर्मी रख कर उसे ज़्यादा शक्तिशाली और प्रभावी बनाना चाहते हैं। (बीबीसी संवाददाता विनीत खरे से बातचीत पर आधारित)