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गंगा का रौद्र रूप: वाराणसी में बेघर हुए कई परिवार, आजीविका पर संकट, तस्वीरों में देखें दर्द और बेबसी

Mon, 22 Aug 2022 05:27 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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वाराणसी में गंगा के तटवर्ती इलाकों का नजारा - फोटो : अमर उजाला
भोलेनाथ की नगरी वाराणसी में गंगा ने रौद्र रूप धारण कर रखा है। गंगा में पिछले चार दिन से जारी उफान सोमवार थमा लेकिन तटीय क्षेत्र के लोगों की परेशानियों में कोई विराम नहीं आया। बाढ़ का पानी घुसने के कारण बड़ी संख्या लोग बेघर हो गए हैं। वरुणा पार इलाके में अभी भी पलायन जारी है। अब तक की स्थिति ये है कि करीब एक से डेढ़ हजार मकान डूब चुके हैं। उन्होंने नाते-रिश्तेदारों और जिला प्रशासन के राहत केंद्रों में पनाह ली है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दीं। उनकी आजीविका पर संकट है। चेहरे पर दर्द और बेबसी है। वो बाढ़ का पानी जल्द से जल्द उतरने की कामना कर रहे हैं।

प्रयागराज और मिर्जापुर में जलस्तर घटने से बनारस में भी राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि स्थिति पलट भी सकती है। जलस्तर में घटाव जरूर हो गया मगर गंगा, वरुणा और गोमती के तटवर्ती क्षेत्रों में दुश्वारियों का स्तर बढ़ता जा रहा है। इधर, पहले से ही सभी घाटों का संपर्क टूटा है। महाश्मशान मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह स्थल बदलना पड़ा है। शव जलाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
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हरिश्चंद्र घाट पर गली में दाह संस्कार - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ की वजह से घाटों के किनारे के 1500 से ज्यादा नाव संचालकों का काम ठप है। वहीं, 2000 से ज्यादा कई प्रकार के दुकानदारों का कारोबार ने शट डाउन ले लिया है। खिलौने, वस्त्र, माला-फूल, सामग्री, नाई और टूरिस्ट गाइड का काम भी बंद है। शवों के अंतिम संस्कार कहीं गली में तो कहीं छत पर किए जा रहे हैं। 
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वरुणा नदी में उफान - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी शहर के बीचोंबीच बहने वाली वरुणा नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण उसके किनारे बसे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। कई इलाकों में तो नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया है कि स्थानीय लोग अपने घरों को छोड़ बाढ़ राहत शिविर में गुजारा कर रहे हैं। 

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मारुति नगर कॉलोनी में घुसा बाढ़ का पानी - फोटो : अमर उजाला
उफनाई गंगा के दबाव में असि नदी भी बैक फ्लो कर चुकी है। शहर के दक्षिण कई कॉलोनियों, मोहल्लों तक नालों के जरिए बाढ़ का पानी पहुंच गया है। वहीं, वरुणा के तटवर्ती आधा दर्जन से अधिक मोहल्लों से विस्थापन तेज हो चला है। 
 
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बाढ़ के कारण सीवर लाइन की पाइप में रह रहा परिवार - फोटो : अमर उजाला
खुला आसमान और चेहरे पर सिकन, नजरें दूर-दूर तक गंगा की लहरों को निहारती... अस्सी की लीलावती रूंदे गले से कहती है कि अब अत मत करा गंगा मइया। यह गुहार सिर्फ लीलावती ही नहीं बल्कि अन्य कई महिलाओं और पुरुषों की है। वर्तमान के साथ ही भविष्य की चिंता उन्हें खाए जा रही है। गंगा के रौद्र रूप ने उनके मन में दहशत को भर दिया है। पलायन तो शुरू हुआ है ही, लेकिन कल क्या होगा यह पता नहीं है। 
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राहत शिविर में बच्चों के साथ महिला - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दीं। मजबूरी में उन्हें अपनी रात बनाए गए राहत शिविरों में काटनी पड़ रही है, लेकिन बेघर होने के दर्द से नींद कोसों दूर है। वरुणा पार सरैयां स्थित पुराना पुल निवासी नसीम अहमद ने बताया कि इस विपदा में परिवार के नौ सदस्यों के साथ अपना घर छोड़ राहत शिविर शरण लिया है, हालांकि यह चिंता है कि घर की क्या स्थिति होगी। 
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बाढ़ग्रस्त इलाके का हाल - फोटो : अमर उजाला
सरैयां के जलाल बाबा निवासी रेशमा कहती हैं कि परिवार के सात लोगों के संग राहत शिविर में रहने आई हूं। घर किस हाल में यह पता नहीं है। सामने घाट के मारुति नगर विस्तार में रहने वाले चंद्रमा यादव, गजानंद झा, विजय कृष्ण राय, ज्योति सिंह ठाकुर, जनार्दन पटेल ने बताया कि लोग पलायन कर रहे हैं। अधिकतर लोगों ने अपने परिवार को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया। 

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वरुणा पार इलाके का हाल - फोटो : अमर उजाला
सीर इलाके के लौटूबीर में पानी फैलते हुए मारुति नगर गायत्री नगर के ढलान वाले क्षेत्रों में घुस गया है। सामनेघाट स्थित ज्ञान प्रवाह के बगल में नाले से पानी मारुति नगर, काशी पुरम, गायत्री नगर मदेरवां घाट के समीप नाला के समीप ढलान वाली जगहों में प्रवेश कर गया। मारुति नगर में नाला भरने के बाद पानी जमीन से दो फीट ऊंची सड़क पर चढ़ गया है। 
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वरुणा पार इलाके में परेशानी ज्यादा - फोटो : अमर उजाला
पहले से सूखे की मार झेल रहे बनारस में गंगा नदी पूरे वेग से बह रही है। तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का पानी भरने से सैकड़ों बीघे की फसल जलमग्न हो गई है। 
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