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बनारस में 7.5 करोड़ रुपये की नकली दवाएं बरामद: 10वीं फेल है सरगना, मजदूर से बना मालिक, हैरतअंगेज खुलासे

Thu, 02 Mar 2023 11:27 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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छापे में नकली दवाएं बरामद, सरगना गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
ब्रांडेड कंपनियों के नाम से नकली दवाएं खपाने वाले गिरोह का खुलासा यूपी एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने गुरुवार को किया। गिरोह के सरगना को सिगरा क्षेत्र की चर्च कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया।  निशानदेही पर ही एसटीएफ ने सिगरा और लहरतारा स्थित उसके गोदाम से 300 पेटी नकली दवाएं बरामद की हैं। इसकी अनुमानित कीमत 7.5 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोपी की पहचान बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद स्थित टीचर्स कॉलोनी निवासी अशोक कुमार के रूप में हुई है। इसके खिलाफ सिगरा थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

आरोपी पर गैंगस्टर एक्ट और रासुका की भी कार्रवाई होगी। इस मामले में 15 अन्य आरोपियों की तलाश में छापे मारे जा रहे हैं। नामी कंपनियों के नाम की नकली दवाएं बेचने के आरोप में गिरफ्तार सरगना अशोक कुमार हाईस्कूल फेल है। उसने पूछताछ में कई राज उगले हैं। 
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अशोक कुमार - फोटो : अमर उजाला
अशोक  बुलंदशहर में गद्दा बनाने वाली फैक्ट्री में मजदूरी करता था। सात वर्ष तक ऑटो रिक्शा भी चला चुका है। लेकिन, नकली दवाओं की आपूर्ति में मोटा मुनाफा देखकर पूर्वांचल आ गया। एसटीएफ के एडिशनल एसपी ने बताया कि अशोक कुमार ने बुलंदशहर के सिकंदराबाद स्थित किसान इंटर कॉलेज में दाखिला लिया था। 
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छापे में नकली दवाएं बरामद, सरगना गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1987 में हाईस्कूल की परीक्षा दी थी, लेकिन फेल हो गया था। वर्ष 2003 से 2010 के ऑटो चलाता रहा, फिर गद्दा बनाने की फैक्ट्री में 12 हजार रुपये प्रतिमाह पर मजदूरी करने लगा। लापरवाही पर काम से हटा दिया गया तो वह फिर ऑटो चलाने लगा। इसी दौरान उसकी मुलाकात बुलंदशहर के नीरज से हुई। 

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छापे में नकली दवाएं बरामद, सरगना गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
नीरज नकली दवाओं का काम करता था। नीरज के यहां ही वह माल ढुलाई करने लगा। वहीं उसे नकली दवाओं के कारोबार की जानकारी हुई। इसके बाद नीरज से ही नकली दवाओं को खरीद कर झोलाछाप को बेचने लगा। नीरज की नकली दवाएं वर्ष 2019 में अमरोहा में पकड़ी गईं थीं। प्रकरण को लेकर विवाद बढ़ा तो अशोक कुमार ने उसका साथ छोड़ दिया।
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छापे में नकली दवाएं बरामद, सरगना गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
एसटीएफ के मुताबिक, अशोक तीन वर्ष पहले ही वाराणसी आया और कैंट रोडवेज बस स्टेशन के पीछे की चर्च कॉलोनी में किराये पर कमरा ले लिया। इसके बाद उसने हिमाचल प्रदेश के उन लोगों से संपर्क किया, जिनसे कि बुलंदशहर का नीरज नकली दवाएं खरीदता था। 
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‘रंगभरी ठंडई’ से किया गया बाबा विश्वनाथ की बरात का स्वागत - ससुराल विराजे बाबा विश्वनाथ, हर्षित हुई - फोटो : अमर उजाला
दवाएं मंगाकर बसों में सामान रखने वाले कुलियों के माध्यम से उन्हें प्रदेश के अलग-अलग जिलों और अन्य राज्यों में भेजता था। नकली दवाओं की आपूर्ति से उसे तगड़ा मुनाफा होता था। जिस नकली दवा पर कीमत 100 रुपये दर्ज है, वह उसे हिमाचल प्रदेश से 30 रुपये में मिलती थी। उसे वाराणसी तक लाने पर लगभग 10 रुपये खर्च होते थे। इन दवाओं पर 35 से 40 रुपये की बचत हो जाती थी।
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छापे में नकली दवाएं बरामद, सरगना गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
ओडिशा के बरागढ़ और झाड़सूकड़ा जिले में नकली दवाइयों की भारी खेप पकड़ी गई थी। आरोपियों ने पूछताछ में बताया था कि बरामद नकली दवाइयां वाराणसी से भेजी गई हैं। इसी आधार पर एसटीएफ की वाराणसी इकाई और खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन विभाग ने जानकारी हासिल की। 
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- फोटो : सोशल मीडिया
अशोक के बारे में पुख्ता जानकारी मिलने के बाद ही उसके कमरे और गोदामों पर छापा मार कर नकली दवाएं बरामद की गईं। सिगरा इंस्पेक्टर राजू सिंह ने कहा कि आम आदमी के सेहत से जानबूझकर खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कोर्ट में प्रभावी तरीके से पैरवी कर उन्हें कड़ी सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
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