हम तो बेजुबान हैं, हमें क्या मालूम कोर्ट-कचहरी। खुले रेत पर दौड़ने के आदी हम इन चहारदीवारों में कब तक कैद रहेंगे। हमारी क्या खता, जिसकी सजा मिल रही...यह दर्द रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले उन 15 ऊंटों का है, जिसे कोई सुन और समझ नहीं पा रहा है। पिछले एक माह से सभी रामनगर के भीटी स्थित अहाते में कैद हैं। हाईवे से सटे लगभग तीन बिस्वा के इस हाते में ऊंट सही तरीके से रह भी नहीं पा रहे हैं।