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Siddharthnagar: सिद्धार्थनगर में बूढ़ी राप्ती नदी पर बना बांध टूटा, 20 से ज्यादा गांव जलमग्न

Thu, 13 Oct 2022 10:17 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर में बूढ़ी राप्ती नदी पर बना बांध टूटा - फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर जिले की इटवा तहसील क्षेत्र के बूढ़ी राप्ती नदी पर स्थित अशोगवा मदरहवा बांध बुधवार रात टूट गया और बूढ़ी राप्ती नदी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि 20 से ज्यादा गांव जलमग्न हो चुके हैं। बूढ़ी राप्ती का सैलाब जिस प्रकार बढ़ रहा है, लोगों में दहशत और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है।

आपको बता दें कि यह बांध लोगों के आवागमन का केंद्र होने के साथ ही बाढ बचाव में भी अहम था। बारिश और जलभराव के बाद बांध में रिसाव होने लगा था। लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। जिले में लगातार बाढ़ की तबाही जारी है। पहाड़ से निकलने वाली नदियां लगातार सैलाब बनकर लोगों पर टूट रही हैं। शोहरतगढ़ डुमरियागंज इटावा और बांसी तहसील में लगातार बाढ़ का कहर जारी है। 
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सिद्धार्थनगर में बूढ़ी राप्ती नदी पर बना बांध टूटा - फोटो : अमर उजाला।
इस बीच बुधवार रात इटवा तहसील क्षेत्र के बूढ़ी राप्ती नदी पर स्थित अशोगवा मदरहवा बांध टूट गया। बांध के टूटने से देखते ही देखते 20 से ज्यादा गांव जलमग्न हो गए। हर तरफ सैलाब ही सैलाब नजर आने लगा। 


 
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सिद्धार्थनगर में बूढ़ी राप्ती नदी पर बना बांध टूटा - फोटो : अमर उजाला।
किसी तरीके से लोगों ने बढ़ते हुए पानी से जान बचाने के लिए छतों पर शरण लिया, तो कुछ ने उंचे स्थानों पर। लोगों ने प्रशासन की लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि सिंचाई विभाग को बाद में रिसाव होने की सूचना पहले दे दी गई थी। 

 

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सिद्धार्थनगर में बूढ़ी राप्ती नदी पर बना बांध टूटा - फोटो : अमर उजाला।
बावजूद इसके विभाग ने बड़ी चूक की जिसका नतीजा है कि बांध टूट गया और लोग सैलाब से जूझ रहे हैं। ग्राम प्रधान सहित ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मदद की गुहार लगाई है। लेकिन अभी तक ना तो राहत और ना ही बचाव कार्य शुरू हो पाया है। 

 
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सिद्धार्थनगर में बूढ़ी राप्ती नदी पर बना बांध टूटा - फोटो : अमर उजाला।
सुनौली नानकार के ग्राम प्रधान मुकेश ने बताया कि बाद में रिसाव होने की जानकारी पहले ही सिंचाई विभाग को दी गई थी। बावजूद इसके यहां कोई कदम नहीं उठाया गया जिसका नतीजा है कि गांव पानी के सैलाब में डूब गया है। लोग बांध पर शरण लिए हैं। भारी क्षति हुई है और प्रशासन मौन है।
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