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संभल हिंसा जांच रिपोर्ट: आजादी के बाद 15 बार सुलगा जिला, हिंदू कर गए पलायन, तुर्क-पठानों की तनातनी का भी जिक्र

Fri, 29 Aug 2025 06:15 PM IST
विमल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, संभल

सार

संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने रिपोर्ट में दंगों के इतिहास, हिंदू आबादी के पलायन, धार्मिक स्थलों पर हमलों और पुराने दंगों के मामलों का उल्लेख किया गया है। आयोग ने पाया कि सांसद जियाउर्रहमान बर्क के जहरीले भाषण के बाद तुर्क और पठानों में हिंसा भड़की थी। आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय भी सुझाए हैं।
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संभल हिंसा (फाइल) - फोटो : संवाद

संभल में बीती 24 नवंबर को भड़की हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। करीब 450 पन्नों वाली रिपोर्ट में हिंसा की वजहों, संभल में दंगों के इतिहास, हिंदुओं की आबादी घटने, धार्मिक स्थलों का अस्तित्व मिटाने समेत तमाम बिंदुओं के बारे में विस्तार से जांच करने के बाद निष्कर्ष दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में हिंदू आबादी के पलायन का भी उल्लेख है। जब भी आयोग के सदस्य संभल दौरे पर पहुंचे तो हिंदू समाज से जुड़े लोग आयोग के सामने पहुंचे। जहां उन्होंने पूर्व में अलग-अलग समय में हुए दंगों की जांच कराने और दोषियों को सजा दिलाने की मांग की थी।

इन मांगों को का भी रिपोर्ट में जिक्र किया गया है। आजादी के बाद से वर्ष 2024 तक हुए दंगे और बवाल से हिंदू आबादी किस तरह प्रभावित हुई और पलायन तक करने के लिए मजबूर हुई। सूत्रों का कहना है कि 1978, 1986, 1992 के दंगों से जुड़े मुकदमों की जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल की गई है।

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Sambhal Violence (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

संभल में बीती 24 नवंबर को भड़की हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बृहस्पतिवार को रिपोर्ट सौंपी है। इसमें भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय भी सुझाए गए हैं। जांच में सामने आया है कि संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क के जहरीले भाषण के बाद तुर्क और पठानों के बीच हिंसा भड़की थी।

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संभल में हिंसा के बाद माैजूद सुरक्षाबल (फाइल) - फोटो : संवाद
रिपोर्ट में दी गई जानकारी से साफ है कि सपा सांसद बर्क, विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल और जामा मस्जिद की इंतेजामिया कमेटी ने मिलकर हिंसा की पूर्वनियोजित साजिश रची थी। नमाजियों को भड़काने से लेकर दंगाइयों को बुलाने और विदेशी हथियारों के इस्तेमाल तक सब कुछ साजिश का हिस्सा था। हरिहर मंदिर में सर्वे होने की सूचना लीक होने के बाद इसे मुफीद अवसर समझकर साजिश रची गई थी ताकि सारा दोष हिंदुओं पर मढ़ा जा सके।

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संभल में तलाशी के दाैरान माैजूद पुलिस बल(फाइल) - फोटो : संवाद

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 22 नवम्बर 2024 को संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने जामा मस्जिद से जहरीला भाषण दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ''हम इस देश के मालिक हैं, नौकर और गुलाम नहीं''। रिपोर्ट के मुताबिक तुर्क खुद को इस देश का मालिक और हिंदुओं एवं कंवर्टेड हिंदू पठानों का अपना गुलाम तथा नौकर समझते हैं।

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कारतूस तलाशती जांच टीम(फाइल) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसलिए यह लड़ाई तुर्क एवं कंवर्टेड हिंदू पठान के बीच हो गई। तुर्क समुदाय का संभल में राजनीतिक वर्चस्व है। डेमोग्राफी बदलने के बाद संभल में रह रहे कंवर्टेड हिंदू पठानों को तुर्क अपना गुलाम मानते हैं। बर्क के इस बयान के बाद संभल में माहौल भड़काया गया। जब कंवर्टेड हिंदू पठानों ने इसका विरोध किया तो 24 नवम्बर को दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।
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नाली से मिले कारतूस (फाइल) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस दौरान क्रॉस फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई। हरिहर मंदिर प्रकरण को लेकर प्रदेश सरकार की सख्ती और पुलिस की मौजूदगी ने हिंदू मोहल्लों को बचा लिया। हिंसा के लिए उपद्रवियों को बाहर से बुलाया गया था, फिर भी दंगा फैल नहीं सका। संभल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि पुलिस की सख्ती से हिन्दू बच गए।
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Sambhal Violence (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
साठा का गिरोह था सक्रिय
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि संभल निवासी शारिक साठा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर जाली नोटों का कारोबार करता था। उसका गिरोह दंगों के दौरान सक्रिय था। हिंसा में कई विदेशी हथियार इस्तेमाल किए गए, जिन पर मेड इन यूएसए अंकित था। इससे साफ हो गया कि यह हिंसा सिर्फ स्थानीय राजनीति का नतीजा नहीं थी, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े थे।

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सीसीटीवी फुटेज में जमा लोग - फोटो : अमर उजाला
तीन सदस्यीय आयोग हुआ था गठित
बता दें कि संभल हिंसा के बाद राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति देवेंद्र नाथ अरोड़ा की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन किया था, जिसमें सेवानिवृत्त डीजीपी एके जैन और सेवानिवृत्त आईएएस अमित मोहन प्रसाद सदस्य बनाए गए थे।

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सड़क पर एकत्र भीड़ (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
करीब 9 माह की जांच के दौरान आयोग ने संभल का तीन बार दौरा किया और सैंकड़ों साक्ष्य व गवाहों के बयान जुटाने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है। आयोग ने सांसद समेत कई आरोपियों, संभल के डीएम-एसपी समेत तमाम लोगों को राजधानी तलब करने के बाद उनके बयान दर्ज किए थे।

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संभल में पथराव और आगजनी के बाद के हालात (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट में क्या क्या लिखा है, इसकी तो हमें जानकारी नहीं है लेकिन हमें पूरी उम्मीद है कि न्यायिक जांच आयोग द्वारा न्याय हित में रिपोर्ट सौंपी गई होगी। रिपोर्ट को लेकर सही जानकारी जल्द सामने आएगी। -जफर अली एडवोकेट, सदर, जामा मस्जिद कमेटी, संभल
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गलियों में पसरा सन्नाटा (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
संभल में आजादी के बाद से लगातार अत्याचार हुए हैं। न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक होगी तो स्थिति और स्पष्ट होगी। शासन और कोर्ट की ओर से निश्चित ही कार्रवाई होगी।  -गुलाब देवी, माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री  

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