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Khatauli By Election Result: BJP ने गंवाई खतौली सीट, पढ़िए हार की वजह,इन बयानों से बिगड़ा गणित,जयंत का बढ़ा कद

Fri, 09 Dec 2022 02:22 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
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कार्यकर्ताओं के साथ मदन भैया। - फोटो : amar ujala
पश्चिम उत्तर प्रदेश में राजनीति की दृष्टि से खतौली उप चुनाव के नतीजों ने कई संदेश दिए हैं। BJP के इस सियासी दुर्ग को भाजपा के छत्रप नहीं बचा पाए। रालोद ने जाट, गुर्जर, मुस्लिम और दलितों के साथ जातीय समीकरण साध भाजपा से यह सीट छीन ली। 

वहीं चुनावी नतीजे से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में चौधरी जयंत सिंह का कद बढ़ा है और उनके सटीक चुनावी प्रबंधन व जुझारूपन ने जीत का बड़ा अंतर तय किया।
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जयंत चौधरी। - फोटो : amar ujala
चौधरी जयंत ने इस चुनाव में 50 से अधिक गांवों का दौरा किया। तीन गांवों फहीमपुर कलां, खोकनी और बिहारीपुर में घर-घर जाकर मतदाता पर्चियां बांटीं। विक्रम सैनी को सजा सुनाए जाने के बाद रिक्त सीट पर हुए उप चुनाव में भाजपा ने जहां विक्रम सैनी की पत्नी को प्रत्याशी बनाया। वहीं गठबंधन ने मुकाबले में गुर्जर प्रत्याशी मदन भैया को मैदान में उतारा।
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भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी सैनी। - फोटो : amar ujala
उपचुनाव में गुर्जरों और परंपरागत जाट मतदाताओं के साथ मुस्लिमों का साथ उन्हें मिला। आसपा अध्यक्ष चंद्रशेखर को साथ लाकर दलित मतदाताओं को भी साधा। रालोद के साथ सपा और आसपा के पदाधिकारियों की टीमों को गांवों में उतारकर चुनावी प्रबंधन की कमान अपने हाथ में रखी। 

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रालोद कार्यकर्ता - फोटो : amar ujala
वहीं नोएडा के श्रीकांत त्यागी प्रकरण के बाद त्यागी समाज में नाराजगी थी। रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी और श्रीकांत त्यागी ने खुद आकर त्यागी बहुल गांवों में सभा की। जिसका नुकसान भाजपा को हुआ। राजपूत बहुल गांवों में मतदाता उदासीन रहे।
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भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी सैनी। - फोटो : amar ujala
भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभा करने आए, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केशव प्रसाद मौर्य ने सभा की। भाजपा के संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने बूथ सम्मेलन किए। क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल, केंद्रीय पशुधन राज्य मंत्री संजीव बालियान और प्रदेश सरकार में कौशल विकास राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल चुनाव की कमान संभाले रहे। 
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जश्न मनाते कार्यकर्ता। - फोटो : amar ujala
वहीं मंत्री संजीव बालियान ने तो चुनाव को अपनी साख का सवाल बना लिया था और खुद का चुनाव होने की बात कहते वोट मांगें। संघ और संगठन की रणनीति पर रालोद का बेहतर चुनाव प्रबंधन भारी पड़ा। विक्रम सैनी के बिगड़े बोल और बयानों, खासकर चौधरी अजित सिंह को लेकर दिए बयान ने भी भाजपा का गणित बिगाड़ दिया। 22 हजार से अधिक मतों से रालोद प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।
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