मकान की दीवार
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मुशर्रफ की मां बेगम जरीन और पिता मुशर्रफुद्दीन दोनों ही बागपत के कोताना के रहने वाले थे। हालांकि मुशर्ऱफ का जन्म 1943 में दिल्ली के दरियागंज में हुआ था। उनके जन्म से काफी परिजन दिल्ली चले गए थे। बंटवारे के दौरान उनका परिवार दिल्ली से पाकिस्तान चला गया था। कुछ रिश्तेदार दिल्ली में रहते हैं। परवेज मुशर्रफ के निधन पर कोताना के ग्रामीणों से बात की गई तो उनका कहना कि जो यहां है ही नहीं, उसके मरने से उन्हें क्या लेना-देना ? प्रधान मुकीद खान, जावेद, मिंटू, इमरान, आमिर, कय्यूम, उद्दे खान, इलियास आदि बताया कि उन्हें खूब याद है कि गली के एक तरफ मुशर्रफ के पिता का महल था दूसरी ओर उनके चाचा का, उनकी मां बेगम जरीन भी यहीं की ही थी और यहीं पर उनकी शादी भी हुई। ग्रामीणों का कहना है कि कारगिल युद्ध के लिए हिंदुस्तान के गुनहगार मुशर्रफ ही थे। इस युद्ध में हमारे देश के न जाने कितने लाल शहीद हुए। यही कारण है कि हमें उनके मरने का कोई दुख नहीं हैं।