मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा पर उपचुनाव की तारीख का एलान हो गया है। एक तरफ रालोद नेताओं ने क्षेत्र में डेरा जमाया हुआ है, तो वहीं भाजपा नेताओं की नजरें भी इस सीट पर टिकी हुई हैं।
मुजफ्फरनगर के खतौली से दूसरी बार भाजपा के विधायक चुने गए विक्रम सैनी की सदस्यता आखिरकार समाप्त कर दी गई। दूसरी पारी में वह सिर्फ सात महीने विधायक रहे। नौ साल पहले अपने गांव कवाल के झगड़े में पुलिस ने विक्रम सैनी को बलकटी के साथ गिरफ्तार किया था। दिलचस्प बात यह है कि सैनी अब तक एक भी चुनाव नहीं हारे हैं।
खतौली के निवर्तमान विधायक विक्रम सैनी अपने बयानों के लिए हमेशा विवादों में रहे। कवाल में 29 अगस्त 2013 के सांप्रदायिक झगड़े में करीब नौ साल बाद 11 अक्तूबर को अदालत ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई है। सैनी के सियासी सफर को लेकर कई दिलचस्प बातें भी है। कवाल में ग्राम पंचायत सदस्य के पद से अपनी सियासत की शुरूआत की।
आरएसएस में सक्रिय हुए और इसके बाद पत्नी को प्रधान पद का चुनाव लड़ाया और जीत गए। मुजफ्फरनगर दंगे के मुकदमे में जेल गए, छूटकर आए तो जिला पंचायत सदस्य चुने गए। इसके बाद 2017 में पहली बार और 2022 में दूसरी बार विधायक बने। विक्रम सैनी ने जो भी चुनाव लड़ा, हमेशा जीत दर्ज की। 10 मार्च को चुनाव के नतीजे आए थे और 11 अक्तूबर को उनकी सदस्यता चली गई।
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बैठक में शामिल रालोद नेता
- फोटो : अमर उजाला
उप चुनाव के लिए चढ़ने लगी सियासी आस्तीन
एक तरफ विक्रम सैनी की सदस्यता चली गई तो दूसरी तरफ सियासी आस्तीनें भी चढ़ने लगी हैं। सैनी की रालोद अध्यक्ष जयंत सिंह पर की गई टिप्पणी के बाद रालोद नेताओं ने खतौली में डेरा जमा लिया है, यहां 15 नवंबर को रालोद अध्यक्ष का रोड शो है। यही नहीं भाजपा नेता भी पूरे मामले पर निगाह रखे हुए हैं। चुनाव आयोग ने इस सीट पर 5 दिसंबर को उपचुनाव कराने का एलान किया है। जबकि मतगणना 8 दिसंबर को होगी।
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भाजपा विधायक विक्रम सैनी बरी।
- फोटो : amar ujala
कुर्सी गई तो सामने आने लगे नए दावेदार
भाजपा के निवर्तमान विधायक विक्रम सैनी की कुर्सी गई तो नए-नए दावेदार भी सामने आने लगे हैं। रालोद में टिकट की चाह रखने वाले सक्रिय हो गए हैं। इनमें पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रमा नागर, अभिषेक गुर्जर, पूर्व सांसद राजपाल सैनी और संजय राठी के नाम अब तक सामने आ चुके हैं। उधर, भाजपा में विक्रम सैनी की पत्नी को चुनाव लड़ाए जाने पर चर्चा है। लेकिन संभावित दावेदारों में सुधीर सैनी, रुपेंद्र सैनी समेत अन्य नेताओं के नाम भी लिए जा रहे हैं।
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पुलिस के साथ भाजपा विधायक विक्रम सैनी।
- फोटो : amar ujala
जिले में पहले भी हुए हैं उप चुनाव
जिले में पहले भी उप चुनाव हुए हैं। रालोद में लंबे समय तक सक्रिय रही पूर्व मंत्री अनुराधा चौधरी के सांसद बन जाने पर खाली हुई बघरा सीट पर उपचुनाव कराया गया था, तब परमजीत मलिक विधायक बने थे। पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के निधन के बाद सदर सीट पर भाजपा से कपिल देव अग्रवाल चुनाव जीते थे। मोरना सीट पर उप चुनाव में मिथलेश पाल ने जीत दर्ज की थी। यह सीट कादिर राना के सांसद बन जाने के बाद खाली हुई थी।
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भाजपा विधायक विक्रम सैनी
- फोटो : अमर उजाला
सैनी की अपील पर तय नहीं हुई तिथि
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ विधायक विक्रम सैनी ने भी हाईकोर्ट में अपील दायर की है। लेकिन अभी सुनवाई के लिए तिथि तय नहीं हुई है।
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भाजपा विधायक विक्रम सैनी।
- फोटो : amar ujala
इन धाराओं में सुनाई गई थी सजा
विधायक विक्रम सैनी को धारा 147, 158, 336, 149, 504, 506 और 7 क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट के अंतर्गत सजा सुनाई गई थी। धारा 307 में वह दोषमुक्त करार दिए गए थे।
मुजफ्फरनगर- जानसठ मार्ग पर कवाल गांव का मुख्य द्वार
- फोटो : amar ujala
यह था मामला
कवाल कांड के बाद गांव में तनाव का माहौल था। 29 अगस्त 2013 को दोपहर 12 बजे दोनों समुदाय के लोग आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए एक-दूसरे के सामने आ गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव किया। लाठी डंडे और अवैध हथियारों से हमला किया। पुलिस ने दोनों पक्षों के 28 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। 15 आरोपी दोषमुक्त हो गए। मुकदमे के ट्रायल के दौरान एक अभियुक्त की मौत हो गई थी।