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रंग लाई मेहनत: बेटी की जिद ने दिलाई जीत, किसान पिता और ममता के संघर्ष ने रूपल को ओलंपिक तक पहुंचाया

Tue, 07 May 2024 11:35 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ की रूपल चौधरी ने परिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर देशभर में नाम रोशन किया है। उनके परिवार में खुशी का माहौल है।
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रूपल चौधरी - फोटो : अमर उजाला
रूपल चौधरी ने 400 मीटर मिक्स रिले वूमेन में किया पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है। भारत की टीम दूसरे नम्बर पर रही है। भारतीय महिला 4x400 मीटर रिले टीम ने सोमवार को विश्व एथलेटिक्स रिले में दूसरे दौर की हीट में दूसरे स्थान पर रहने के बाद पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया।

यह रूपल के माता-पिता की मेहनत का ही नतीजा है कि उसने परिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर देशभर में नाम रोशन किया है। रूपल ने वर्ष 2017 में कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम आना शुरू किया था। उस वक्त रूपल महज 14-15 वर्ष की थी। 
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रूपल चौधरी - फोटो : अमर उजाला
इतनी छोटी उम्र में उन्होंने खेलना शुरू कर दिया था। उनके पिता ओमवीर सिंह और मां ममता भी रूपल की एथलीट बनने की जिद के आगे हार मान गए थे। उन्होंने बेटी को आगे बढ़ाने के लिए काफी संघर्ष किया। रूपल को रोज गांव से स्टेडियम लाना और फिर ले जाना, ये सब उनके पिता करते थे।
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रूपल चौधरी - फोटो : अमर उजाला
मां रूपल के खाने पीने का ध्यान रखती थीं। पिता ने बताया कि वह हाईस्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग करती रहीं हैं। वर्ष 2017 में उन्होंने स्टेडियम में प्रशिक्षण प्राप्त करना शुरू किया। इसके बाद से लगातार नेशनल और इंटरनेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर पदक प्राप्त कर मेरठ सहित पूरे देश का नाम रोशन कर रही हैं। वह अब भुवनेश्वर से बीए कर रही हैं। रूपल के दो भाई-बहन हैं। उनका बड़ा भाई परमजीत यूपी पुलिस में है।

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एथलीट रूपल चौधरी - फोटो : अमर उजाला
घुटने की चोट के बाद भी नहीं हुई मायूस
बीते वर्षों में घुटने की चोट के कारण भी रूपल को परेशान होना पड़ा था। इसके बावजूद वह मायूस नहीं हुई और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहीं। उन्होंने मेरठ को छोड़ मुंबई में रिलायंस फाउंडेशन के तकनीकी विकास केंद्र में जेम्स हीलर कोच की निगरानी में अभ्यास किया। इसका परिणाम सामने है।

पिछले एक वर्ष से वह मेरठ से बाहर ही प्रशिक्षण ले रही थीं। जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव अनु कुमार ने बताया कि रूपल ने जिले की किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने से अपनी दूरी नहीं बनाई बल्कि पूरे मन के साथ प्रतिभाग किया। उन्होंने रूपल को फोन पर बधाई दी। रूपल ने उन्हें बताया कि यह पहली बार था जब उन्होंने रिले रेस को स्टार्ट किया, अन्यथा वह हमेशा दूसरे, तीसरे या चौथे नंबर पर दाैड़ी थीं।
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एथलीट रूपल चौधरी - फोटो : अमर उजाला
ये हैं प्रमुख उपलब्धियां
-जूनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2022 में 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक
-4 गुणा 400 मीटर मिक्स रिले में रजत पदक
-जूनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो पदक प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी 
-61 नेशनल इंटर स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2022 में 400 मीटर दौड़ में रजत पदक
-4 गुणा 400 मीटर मिक्स रिले में स्वर्ण पदक
-81 वीं ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ में रजत पदक
-400 मीटर हर्डल रेस में रजत पदक
-36वीं जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2021 में 400 मीटर में कांस्य पदक
-तीसरी ओपन 400 मीटर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप अंडर 18 में 400 मीटर में स्वर्ण पदक
-35वीं जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप अंडर 16 में 400 मीटर में स्वर्ण पदक
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