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मुन्नाबजरंगी हत्याकांड: जांच में हुआ था ये बड़ा खुलासा, जेलर उदय के कंट्रोल से बाहर हो गई थी जेल

Sat, 22 Jun 2019 06:37 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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बागपत जेल और लाल घेरे में बर्खास्त जेलर उदय प्रताप सिंह - फोटो : अमर उजाला
पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में बर्खास्त किए गए तत्कालीन जेलर उदय प्रताप सिंह बागपत जेल पर अपना कंट्रोल खो बैठे थे। हत्यारोपी सुनील राठी के मुलाकातियों की चेकिंग तक नहीं होती थी। यही वजह रही कि पिस्टल आसानी से जेल में पहुंच गया। कानपुर जेल के अधीक्षक ने पूरे मामले की जांच की तो यह स्थिति उजागर हुई।
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बागपत जेल - फोटो : self
बता दें कि बागपत जेल में नौ जुलाई 2018 की सुबह करीब छह बजकर पांच मिनट पर तन्हाई बैरक के निकट पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई थी। हत्या का मुकदमा बागपत के अपराधी सुनील राठी के खिलाफ दर्ज कराया गया था। तत्कालीन जेलर को निलंबित कर दिया गया था। शासन ने इस प्रकरण की जांच आठ अगस्त 2018 को कानपुर के जेल अधीक्षक को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अब उदय प्रताप सिंह को बर्खास्त कर दिया गया है।
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बागपत जेल - फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट से स्पष्ट है कि बर्खास्त जेलर यूपी सिंह का बागपत जेल पर कोई नियंत्रण नहीं था। जांच अधिकारी ने माना है कि यूपी सिंह सिर्फ लिखा पढ़ी करते रहे। जेल में बंदियों और कर्मचारियों पर उनका नियंत्रण अत्यंत शिथिल रहा। तालमेल और नेतृत्व क्षमता का अभाव नजर आया। नियमों के विपरीत मुलाकातें भी हुईं। हालात यह बन गए थे कि सुनील राठी का प्रभाव जेल के कर्मचारियों पर भी बन गया था। सुनील राठी और उससे मिलने आने वाले मुलाकातियों की तलाशी नहीं होती थी। बेरोक टोक मुलाकातें होती रहीं। इस कारण पिस्टल जेल में पहुंच गया। बंदियों, बैरक और अहातों की चेकिंग भी नहीं कराई गई। इन्हीं हालात के बीच नौ जुलाई को मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या कर दी गई।

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बागपत जिला जेल फाइल फो - फोटो : अमर उजाला
ये था मामला
बड़ौत के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित और उनके भाई नारायण दीक्षित से मोबाइल पर रंगदारी मांगने के मामले में झांसी जेल से मुन्ना बजरंगी को सुनवाई के लिए बागपत लाया गया था। नौ जुलाई को अदालत में सुनवाई होनी थी। आठ जुलाई की रात बजरंगी को बागपत जेल में रखा गया। नौ जुलाई की सुबह तन्हाई बैरक के बाहर मुन्ना बजरंगी की पिस्टल से गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या का मुकदमा सुनील राठी पर दर्ज किया गया था। वारदात के बाद तत्कालीन जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, मुख्य बंदीरक्षक अरजिंदर सिंह और माधव कुमार को निलंबित कर दिया गया था। बजरंगी की पत्नी ने सीमा ने जौनपुर से बसपा के सांसद रहे धनंजय सिंह पर साजिश रचने का आरोप लगाया था। पिछले दिनों नारायण दीक्षित की भी हादसे में मौत हो चुकी है।
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बर्खास्त किए गए तत्कालीन जेलर उदय प्रताप सिंह - फोटो : अमर उजाला
छह माह ही बागपत में रहे थे यूपी सिंह
बर्खास्त किए गए जेलर यूपी सिंह करीब छह माह ही बागपत रहे थे। 22 दिसंबर 2017 को वह बागपत के जेलर बने और नौ जुलाई 2018 को मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद यूपी सिंह को निलंबित कर दिया गया था।
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मुन्नाबजरंगी हत्याकांड की पुरानी तस्वीर
इस तरह रहा मुख्य घटनाक्रम
कब                 क्या
09 जुलाई       बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या।
09 जुलाई       जेलर यूपी सिंह को निलंबित किया गया।
08 अगस्त      कानपुर जेल अधीक्षक को जांच सौंपी।
21 अगस्त       जांच अधिकारी का आरोप पत्र दिया।
07 सितंबर       यूपी सिंह को आरोप पत्र तामील कराया।
21 सितंबर        यूपी सिंह ने आरोप पत्र पर जवाब दिया।
04 फरवरी        जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट लगाई।
14 फरवरी         यूपी सिंह को जांच आख्या दी गई।
25 फरवरी         यूपी सिंह ने जांच पर अभ्यावेदन दिया।
20 जून            यूपी सिंह को सेवा से बर्खास्त किया गया।
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सुनील राठी की पुरानी तस्वीर
पिस्टल की फोरेंसिक जांच से उलझ गई थी हत्या की कहानी
पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद बागपत जेल के गटर से बरामद पिस्टल की फोरेंसिक जांच में सामने आया था कि बरामद पिस्टल से गोली नहीं चली थी। इस पिस्टल को दोबारा जांच के लिए भिजवाया गया है। लेकिन दूसरी जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। सवाल है कि बजरंगी की हत्या क्या किसी दूसरे पिस्टल से की गई थी। अगर ऐसा हुआ है तो दूसरा पिस्टल जेल से बरामद क्यों नहीं हो सका।
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कुख्यात डॉन मुन्ना बजरंगी का हत्यारोपी सुनील राठी
बागपत जेल में नौ जुलाई को मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तत्कालीन जेलर यूपी सिंह ने कुख्याल सुनील राठी को नामजद कराया। राठी ने पुलिस को बताया था कि हत्या के बाद पिस्टल गटर में फेंक दिया गया था। पुलिस ने गटर से पिस्टल को बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा था। जांच में सामने आया था कि जिस पिस्टल की जांच कराई गई है, उससे गोली ही नहीं चली। यानि बजरंगी की हत्या में कोई दूसरा असलाह प्रयोग किया गया। हालांकि जेल से दूसरा पिस्टल बरामद नहीं हुआ था। इसलिए यह सवाल अनसुलझा ही रह गया कि जेल में क्या दूसरा पिस्टल भी था, अगर था तो वह कहां चला गया। फिलहाल कहानी पुलिस की जांच में उलझी हुई है।

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