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डबल मर्डर: बसपा नेता हाजी अहसान का था बड़ा कारोबार, बनना चाहते थे विधायक, देखें ये 11 तस्वीरें

Wed, 29 May 2019 01:13 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी और नीचे हाजी अहसान व भांजे का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बसपा नेता हाजी अहसान विधायक बनना चाहते थे, 2017 के विधान सभा चुनाव में उन्होंने नजीबाबाद से बसपा का टिकट मांगा था। टिकट के लिए उन्होंने पूरा जोर लगा दिया था। दिल्ली से लेकर बिजनौर तक हाजी अहसान का प्रॉपर्टी का बड़ा कारोबार था। पिछले कई साल से दिल्ली में वह प्रॉपर्टी का काम कर रहे थे। इस दोहरे हत्याकांड के बाद अब नजीबाबाद में गैंगवार की आशंका पैदा हो गई है। अगली स्लाइडों में तस्वीरों के साथ जानें पूरा अपडेट:- 
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हाजी अहसान (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
बसपा नेता हाजी अहसान चंद सालों में ही प्रॉपर्टी के कारोबार से अमीर बन गए थे। नजीबाबाद और बिजनौर में उनके पास बेशकीमती जमीन हैं। नजीबाबाद से प्रॉपर्टी में पैसा कमाने के बाद उन्होंने कई साल पहले दिल्ली की ओर रुख कर लिया था। दिल्ली में प्रॉपर्टी के बड़े कारोबार किए। कई बडे़ लोगों से उनके गहरे संबंध रहे।
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मौके पर जांच करने पहुंचे अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
वहीं दिल्ली के साथ-साथ नजीबाबाद में भी उनके प्रॉपर्टी के काम चलते रहे। विवादित प्रॉपर्टी में भी हाथ डालने से हाजी अहसान डरते नहीं थे। हाजी अहसान के बारे में कहा जाता था कि जिस प्रॉपर्टी पर उनकी नजर पड़ गई उसे उन्होंने हासिल ही कर लिया। प्रॉपर्टी की उन्हें बेहद परख थी। प्रॉपर्टी देखकर बता देते थे कि इस प्रॉपर्टी से उन्हें कितनी कमाई होगी। राजनीति में भी उनकी गहरी पकड़ थी। कई दलों के राजनेताओं से उनके गहरे संबंध थे।

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बसपा नेता हाजी अहसान और उनके भांजे का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
हाजी अहसान की तमन्ना विधायक बनने की थी। इसलिए ही उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में नजीबाबाद विधानसभा से बसपा का टिकट मांगा था। टिकट पाने के लिए उन्होंने पूरे जोर लगा दिए थे। पर बसपा हाईकमान ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। हाजी अहसान प्रॉपर्टी को लेकर सदा विवादों में रहते थे। कई लोग उनसे रंजिश भी रखते थे। पर उनका कुछ बिगाड़ नहीं पा रहे थे। जब तक वह दिल्ली में रहे पूरी तरह सुरक्षित थे। दिल्ली से नजीबाबाद कब आते जाते थे। कुछ नजदीकी लोगों को छोड़कर उनके बारे में किसी को कुछ पता नहीं रहता था।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि पिछले छह महीने से हाजी अहसान फिर से नजीबाबाद में आ बसे। अपने बच्चों के साथ नजीबाबाद में ही रह रहे थे। हाजी अहसान नजीबाबाद में भी चौकस रहते थे। किसी बाहरी व्यक्ति से मिलते नहीं थे।
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मौके पर जांच करते पुलिस अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
वहीं मंगलवार को भी दो बदमाशों के कांप्लेक्स में घुसने पर वह इसलिए धोखा खा गए कि दोनों बदमाशों ने उन्हें मिठाई देने की बात कही थी। हाथ में मिठाई का डिब्बा देख उन्होंने सोचा कि रमजान में कोई उन्हें मिठाई देने आया है। हाजी अहसान को नहीं मालूम था कि मिठाई का डिब्बा देने के बहाने बदमाश उनकी जान लेने आए हैं। हाजी अहसान का भांजा शादाब हर वक्त उनके साथ रहता था। शादाब पर बसपा नेता बेहद विश्वास करते थे।
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मौके पर जांच करते पुलिस अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
सीसीटीवी कैमरे खंगालने में जुटी पुलिस 
पुलिस बसपा नेता व उनके भांजे के कातिलों को पहचानने के लिए कांप्लेक्स में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगालने में जुटी है। सीसीटीवी कैमरों के सहारे पुलिस कातिलों तक पहुंचना चाहती है। पुलिस के मुताबिक घटना को अंजाम तीन शूटरों ने दिया। एक शूटर कांप्लेक्स के बाहर खड़ा रहा। दो अंदर मिठाई देने के बहाने गए। शूटरों के चेहरे खुले हुए थे। पुलिस मान रही है कि भाड़े के शूटरों से हाजी अहसान और उनके भांजे की हत्या कराई गई है।

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मौके पर जांच करते पुलिस अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
दोहरे हत्याकांड के बाद नजीबाबाद में गैंगवार की आशंका 
नजीबाबाद में बसपा नेता और प्रॉपर्टी डीलर हाजी अहसान, उनके भांजे की हत्या के बाद नजीबाबाद में गैंगवार छिड़ने की आशंका पैदा हो गई है। हाजी अहसान इस क्षेत्र का बड़ा नाम था। कई हत्याओं में हाजी अहसान का भी नाम आ चुका है, उनका अपना अलग गैंग है। प्रॉपर्टी को लेकर नजीबाबाद में कई बडे़ लोगों की हत्या हो चुकी है।

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मौके पर जांच करने पहुंचे अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
नजीबाबाद के मोहल्ला पठानपुरा में मामूली विवाद में वर्ष 1990 में तीन सगे भाइयों की ईद पर चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। इस तिहरे हत्याकांड में हाजी अहसान का नाम आया था। इसके बाद से ही हाजी अहसान दिल्ली में जा बसा था और वहीं प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू कर दिया था। तीनों भाइयों की हत्या के बाद एक भाई यूसुफ पहाड़ी बचा था। वह तिहरे हत्याकांड की पैरवी कर रहा था। हाजी अहसान से इस केस में समझौते की बात चल रही थी। तीन साल पहले यूसुफ पहाड़ी की भी हत्या कर दी गई थी। इस हत्या का भी हाजी अहसान पर शक किया गया।

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मौके पर जांच करने पहुंचे अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
कई साल पहले प्रॉपर्टी डीलर डॉ. शमशाद की नजीबाबाद में हत्या कर दी गई। डॉ. शमशाद भी नजीबाबाद के लिए बड़ा नाम था। शमशाद की हत्या में भी हाजी अहसान का नाम आया था। पुलिस ने शमशाद की हत्या में मुजफ्फरनगर के अजमल पहाड़ी को दबोचा था। अजमल नजीबाबाद में किराए का मकान लेकर रहता था। उसका ससुर हाजी अहसान के यहां नौकरी करता था। इसलिए डॉ. शमशाद की हत्या में हाजी अहसान का नाम आया था। अजमल बड़ा शॉप शूटर बताया जाता है। वह इन दिनों गाजियाबाद की डासना जेल में बंद है।

डॉ. शमशाद से पहले नजीबाबाद के प्रॉपर्टी डीलर मनीष की हत्या हुई थी। इस हत्या में भी कई लोग जेल गए थे। चार माह पूर्व अजमल पहाड़ी ने दिल्ली में किसी से रंगदारी मांगी थी। रंगदारी मांगने में हाजी अहसान का नाम भी आया था। पुलिस अहसान को भी पकड़ कर ले गई थी। हाजी अहसान और उसके भांजे शादाब की हत्या के बाद नजीबाबाद में गैंगवार छिड़ने की आशंका बन गई है।
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मौके पर जांच करने पहुंचे अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
पुलिस के मुताबिक अहसान का भी अपना अलग गिरोह है। अहसान पर हत्या व अन्य मामलों के नौ मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस इस बात को लेकर उलझी है कि हाजी अहसान की हत्या में किस गैंग का हाथ है। उसकी हत्या किसने कराई है। पुलिस हाजी अहसान की हत्या के बाद प्रॉपर्टी को लेकर गैंगवार छिड़ने से भी चौकस हो गई है। सीओ नजीबाबाद महेश कुमार के मुताबिक पुलिस हाजी अहसान व उसके भांजे शादाब की हत्या करने वाले शूटरों की तलाश में जुटी है। पता किया जा रहा है कि किन शूटरों ने घटना को अंजाम दिया है।

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