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उन्नाव कांड: दुष्कर्म पीड़िता ने एसपी व सीबीआई से लगाई थी सुरक्षा की गुहार, 16 दिन पहले मिली थी धमकी

Tue, 30 Jul 2019 12:37 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
रविवार को रायबरेली में हुए सड़क हादसे में सीबीआई के प्रमुख गवाह की जान चली गई। भले ही पुलिस के अधिकारी इसे हादसा मानकर जांच कर रहे हैं, पर मौत के 16 दिन पहले ही दुष्कर्म पीड़िता ने अपनी व परिवार की जान को खतरा बता एसपी व सीबीआई से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। पूर्व के घटनाक्रम की तरह इस बार भी पुलिस की अनदेखी से पीड़िता के परिवार के दो लोगों की जान चली गई।
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किशोरी, किशोरी का चाचा (फाइल फोटो)
विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली पीड़िता व उसकी चाची ने 12 जुलाई को एसपी एमपी वर्मा व सीबीआई को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि वह व उसके परिजन सीबीआई के गवाह हैं। सात जुलाई की सुबह 9 बजे एक कार से आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर व सह आरोपी शशि सिंह के परिजन व दो अज्ञात व्यक्ति आए और मुकदमों में सुलह का दबाव बनाया।
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उन्नाव दुष्कर्म कांड में आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर
ऐसा न करने पर जानमाल की धमकी दी। पूरे परिवार को फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भिजवाने तक की बात कही। पुलिस ने कार्रवाई तो दूर शिकायत की जांच कराना भी उचित नहीं समझा। रविवार को हुए हादसे में हुई मौतों के बाद अब परिजन सीधे हत्या का आरोप लगा रहे हैं। दुष्कर्म पीड़िता के चाचा की तहरीर पर विधायक कुलदीप सिंह समेत अन्य पर रायबरेली में मुकदमा भी दर्ज हो गया।

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स्वाति मालीवाल उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता से मिलने पहुंची - फोटो : अमर उजाला
पीड़िता ने सुरक्षा से मना किया तो क्यों नहीं दी जानकारी
रायबरेली में हुई घटना के समय दुष्कर्म पीड़िता की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों की गैरमौजूदगी को लेकर पुलिस के अधिकारियों ने बयान दिया कि कार में जगह न होने से पीड़िता ने सुरक्षा कर्मियों को साथ चलने से मना कर दिया। हालांकि पुलिस के पास इसका कोई प्रमाण नहीं है। सवाल यह है कि यदि दुष्कर्म पीड़िता ने सुरक्षा कर्मियों को साथ चलने से मना किया तो उन्होंने अपने अधिकारियों को लिखित या मौखिक तौर पर जानकारी क्यों नहीं दी। आरआई लाइन सुभाष चंद्र मिश्र ने बताया कि सुरक्षा में लगे सिपाहियों ने किसी तरह की लिखित या मौखिक जानकारी नहीं दी।
 
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विधायक कुलदीप सेंगर प्रकरण
बिंदुवार मांगी गई सुरक्षा की डिटेल
दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत और विधायक कुलदीप सिंह, उनके भाई अतुल सिंह समेत अन्य पर मुकदमा दर्ज होने के बाद से अब तक पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा में फोर्स किस तरह तैनात किया गया। आईजी जोन लखनऊ एसके भगत ने एसपी एमपी वर्मा से इसका पूरा ब्यौरा तलब किया गया है। ब्यौरा जुटाने में पूरे दिन एलआईयू की टीम माथापच्ची करती रही।
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विधायक कुलदीप सेंगर प्रकरण
बदले गए सुरक्षा कर्मी
रायबरेली में हुई घटना के वक्त दुष्कर्म पीड़िता की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों की गैरमौजूदगी पर एसपी की बैठाई गई जांच में 24 घंटे बाद भी कोई निष्कर्ष निकलकर सामने नहीं आ सका। जांच कर रहे एएसपी विनोद कुमार पांडेय ने बताया कि देर शाम तक जांच रिपोर्ट एसपी को सौंप दी जाएगी। वहीं आरआइ लाइन सुभाष चंद्र मिश्र ने बताया कि दुष्कर्म पीड़िता की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों को हटाकर उनकी जगह पर कांस्टेबल पुष्पेद्र, प्रीती और पूनम को तैनात किया गया है।
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कुलदीप सेंगर - फोटो : सोशल मीडिया
चाची तीसरे व दादी चौथे नंबर की गवाह थीं
सड़क हादसे में मृत किशोरी की चाची, विधायक के खिलाफ सीबीआई के आरोप पत्र में तीसरे नंबर की गवाह थीं। जबकि पीड़िता और उसका चाचा पहले और दूसरे नंबर के गवाह हैं। इससे पहले 18 जनवरी को बेटे (किशोरी के चाचा) को रायबरेली जेल शिफ्ट किए जाने के बाद 18 फरवरी की रात मौत हो गई थी।

परिवार ने बेटे से मुलाकात न हो पाने के सदमे में मौत होने की बात कही थी। किशोरी की दादी दुष्कर्म के मुकदमे में सीबाआई के आरोप पत्र में चौथे नंबर की गवाह थीं। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए अधिवक्ता महेंद्र सिंह, किशोरी से दुष्कर्म के मुकदमे के साथ ही और चाचा के खिलाफ दर्ज अन्य मुकदमों में भी पैरवी कर रहे हैं।
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उन्नाव कांड
घटना को हादसा नहीं मान रहे वकील के परिजन
रायबरेली जिले में हुए हादसे में घायल अधिवक्ता महेंद्र सिंह के परिजन घटना को महज हादसा मानने को तैयार नहीं है। घर में मौजूद अधिवक्ता के भतीजे शिवांश ने बताया कि चाचा रविवार को अपनी कार से सुबह करीब नौ बजे निकले थे। दोपहर बाद हादसे की सूचना मिली तो पिता मान बहादुर सिंह, पत्नी सीमा और दो बच्चों सहित परिवार के अन्य लोग बेहाल हो गए। शिवांश ने बताया कि परिवार के लोग शाम को ही लखनऊ चले गए थे। सभी लोग अभी वहीं हैं।
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