फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेटी का दर्द: मम्मा अब आप जाओ…भटको मत, मां को याद करते ही फफक पड़ी मेधावी, बोली- जल्दी क्या है ड्राइव करने की

Wed, 21 Aug 2024 04:26 AM IST
हिमांशु अवस्थी नीरज दीक्षित, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 9
saket nagar road accident - फोटो : amar ujala
मम्मा की आत्मा भटक रही है, मेरे सपनों में रोज आती हैं। आंखों में आंसू भरकर मुझे निहारती हैं, मगर कहती कुछ नहीं। मैंने कई बार मम्मा से सपने में कहा कि आप जाओ, भटको मत। हम लोगों ने आपको आजाद कर दिया है। यह कहते-कहते 13 साल की मेधावी फफकने लगती है। ये वही मेधावी है, जिससे दो अगस्त को साकेतनगर में नाबालिग कार चालक ने हमेशा के लिए उसकी मां छीन ली।

ऐसे नाबालिग चालकों पर मेधावी का गुस्सा भी फूटा। कहा कि इतनी जल्दी क्या है ड्राइव करने की, 18 साल का होने के लिए दो-तीन साल इंतजार नहीं कर सकते। हीरो बनने के चक्कर में किसी के मम्मी-पापा को मत छीनो। आज मैं बिना मम्मा के कैसी हूं, मैं ही जानती हूं।
विज्ञापन

2 of 9
saket nagar road accident - फोटो : amar ujala


अपने नाना-नानी के पास ही है मेधावी

कभी स्कूल के स्टेज पर खूब थिरकने वाली मेधावी अब जांघ में पड़ी रॉड पर हाथ रखे हुए सिर्फ एकटक छत को ही निहारती है। समझदार इतनी है कि बूढ़े नाना-नानी को देखती है, तो मुस्कुरा देती है। उसकी मुस्कुराहट देख नाना-नानी की आंखें डबडबा जाती हैं। फिर तीनों लिपटकर रोने लगते हैं। ऐसा दिन में एक नहीं, कई बार होता है। इस समय मेधावी अपने नाना-नानी के पास ही है।
विज्ञापन

3 of 9
saket nagar road accident - फोटो : amar ujala
जांघ का ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने रॉड डाली है
डब्ल्यू ब्लॉक साकेतनगर में रहनी वाली मेधावी दो अगस्त का दिन शायद ही कभी भूल पाए, जब वह मां भावना मिश्रा के साथ स्कूटी से डॉक्टर के पास जा रही थी। साकेतनगर टेलीफोन एक्सचेंज रोड पर तेज रफ्तार कार ने स्कूटी में इतनी जोरदार टक्कर मारी थी कि दोनों उछलकर दूर जा गिरी थीं। हादसे में भावना की मौत हो गई थी, जबकि मेधावी गंभीर रूप से घायल हो गई थी। मेधावी की जांघ का ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने रॉड डाली है।

4 of 9
saket nagar road accident - फोटो : amar ujala
बोली- मेरी मम्मा जैसा कोई नहीं था
अकेले कमरे में गुमसुम बैठकर फूल सी दिखने वाली मेधावी पूरे दिन मोबाइल पर कभी मां भावना के डांस का वीडियो देखती है तो कभी करवाचौथ पर सजी-धजी मां की तस्वीर निहारती है। मेधावी से जब उसकी मां का जिक्र किया गया तो उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट आई, फिर बोली मेरी मम्मा से अच्छा कोई नहीं था।
विज्ञापन

5 of 9
saket nagar road accident - फोटो : amar ujala
मां कहती थी- आओ तुम्हारे बाबा जैसे बाल ठीक कर दूं
वह मंगलवार को भी सपने में आई। मेरे और पापा के साथ ऐसा व्यवहार कर रही थी, जैसे दुनिया से गई ही न हो। इसके बाद मेधावी फिर सुबकने लगती है। मेधावी के मुताबिक मां उसके स्कूल जाने का पूरा ध्यान रखती थी, ड्रेस निकालकर रखती थी और बालों में चोटी करते हुए कहती थी कि आओ तुम्हारे बाबा जैसे बाल ठीक कर दूं। मम्मा ही उसे स्कूल से घर लाती थी।
विज्ञापन

6 of 9
saket nagar road accident - फोटो : amar ujala
मेधावी की जिद ने मां की मौत की जानकारी देने को किया मजबूर
चार अगस्त को ऑपरेशन के बाद जब मेधावी को होश आया तो वह मां से मिलने व उनसे बात करने की जिद करने लगी। परिजनों के मुताबिक वह कहती थी कि मां से फोन पर बात करा दो या वीडियो कॉल करा दो। तब डॉक्टरों ने घरवालों को समझाया कि अभी बच्ची अस्पताल में और डॉक्टरों के बीच है, इसलिए बेहतर होगा कि उसे मां की मौत की जानकारी दे दी जाए। ताकि किसी अनहोनी पर उसे संभाला जा सके। तब 10 डॉक्टरों व स्टाफ को मौके पर खड़ाकर मेधा को मां की मौत के बारे में बताया गया।कर रह गया है।
विज्ञापन

7 of 9
saket nagar road accident - फोटो : amar ujala
आखिरी सांस तक भावना अपनी बेटी के बारे में ही पूछती रही
भावना के पति अनूप ने बताया कि मरते दम तक भी पत्नी को अपनी कम बेटी की फिक्र ज्यादा थी। हादसे के तुरंत बाद भावना को लेकर सबसे पहले पीपीएम अस्पताल पहुंचे थे, जहां उखड़ती सांसों के बीच उसके आखिरी शब्द यही थे कि पुल्लू कैसी है। इसके बाद वह कुछ नहीं बोली और हमेशा के लिए खामोश हो गई। हम लोग बेटी मेधावी को प्यार से पुल्लू कहते हैं।

8 of 9
kanpur road accident - फोटो : amar ujala
इधर बेटी की चिता जल रही थी, उधर नातिन का ऑपरेशन
मेधावी के 75 साल के नाना कृष्णकुमार शुक्ला कहते हैं कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपनी पूरी जिंदगी जी ली। इंतजार था कि किस दिन भगवान बुलावा भेज दें। उससे पहले हमारी प्यारी लीचू (भावना) ही भगवान के पास चली गई। चश्मा उतारकर आंसू पोछते हुए कृष्णकुमार ने बताया कि तीन अगस्त को एक ओर जहां भावना का अंतिम संस्कार हो रहा था, दूसरी ओर अस्पताल में मेधावी का ऑपरेशन चल रहा था। कैसे हमने इस दुख के पहाड़ को उठाया है, उनका कलेजा ही जानता है।
विज्ञापन

9 of 9
kanpur road accident - फोटो : amar ujala
कानून का क्या चला गया, हमने तो लाडो खो दी
मेधावी की नानी ऊषा तो घटना के 18 दिन बाद भी अपने आंसू रोक नहीं पा रही हैं। कहती हैं कि चार-चार चालान वाली कार ने उनकी लाडो को हमेशा के लिए छीन लिया। कानून ने उन हत्यारों का क्या बिगाड़ लिया और क्यों बिगाड़ेगी, बेटी तो हमने खोई है। कोई पुलिस वाला हादसे के बाद झांकने तक नहीं आया। उनके पास यह मामला बस एक फाइल बन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें