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मुझे बचाओ...लोग मुझे मार डालेंगे: सुरेश मांझी की तबीयत बिगड़ी, इलाज के लिए हैलट में मांगनी पड़ी भीख

Sat, 05 Nov 2022 04:12 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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Human Trafficking Case - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में भिखारी गैंग की यातनाएं सहने वाले नौबस्ता के रविंद्रनगर के सुरेश मांझी (30) को इलाज के लिए सरकारी सिस्टम की ठोकरें भी खानी पड़ीं। सुरेश और उसके परिजनों को हैलट में इलाज के लिए भीख मांगनी पड़ी। रातभर दर्द से तड़पने के बाद शुक्रवार सुबह 10 बजे परिजन उसे नौबस्ता थाने ले गए।

हालत बिगड़ती देख थाना प्रभारी संजय पांडे ने एक दरोगा और दो सिपाहियों के साथ सरकारी जीप से सुरेश को हैलट पहुंचाया। सुरेश के साथ आए पार्षद प्रशांत शुक्ला ने बताया कि 10:30 बजे सुरेश को हैलट इमरजेंसी ले गए, वहां मौजूद डॉक्टर ने बताया कि इस मामले टीम गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

ऐसे में सीएमओ साहब के आदेश पर ही सुरेश को भर्ती किया जाएगा। इस बीच सुरेश की तबीयत और बिगड़ती चली गई। पार्षद के अनुसार काफी जद्दोजहद के बाद दोपहर डेढ़ बजे नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में डॉ. नम्रता पटेल ने उसकी आंखों की जांच की, लेकिन भर्ती नहीं किया।
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Human Trafficking Case - फोटो : अमर उजाला
ओपीडी से निकलते ही सुरेश बेहोश हो गया, लेकिन हैलट के डॉक्टरों ने चिट्ठी का हवाला देकर भर्ती करने से मना कर दिया। सुरेश वहीं तड़पता रहा। सुरेश का भाई रमेश मांझी और उसकी पत्नी छठदेवी उसकी हालत देख डॉक्टरों से इलाज की भीख मांगते रहे।
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Human trafficking case - फोटो : अमर उजाला
पार्षद ने बताया कि पुलिसकर्मी थाना अध्यक्ष की ओर से लिखी गई चिट्ठी ले गए थे जिसमें डॉक्टरों के पैनल द्वारा उसके इलाज करने की दरख्वास्त थी। हैलट में मौजूद चिकित्सा अधिकारी ने पुलिस के किसी बड़े अफसर से सीएमओ के नाम चिट्ठी लिखने की सलाह दी।

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Human trafficking - फोटो : अमर उजाला
दोपहर बाद परिजन व पुलिसकर्मी सुरेश को लेकर कांशीराम अस्पताल के बगल में स्थित सीएमओ कार्यालय पहुंचे। इस बीच डीसीपी साउथ कार्यालय से सुरेश के नाम चिट्ठी बनी। सीएमओ ने डॉक्टरों की पैनल से इलाज कराने का आदेश जारी कर दिया। शाम 5:30 बजे कांशीराम अस्पताल में सुरेश को भर्ती किया गया।
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Human trafficking case - फोटो : अमर उजाला
सुरेश का दर्द देख रोते हुए भाई रमेश ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों का अमानवीय चेहरा देखा है। इससे अच्छा था कि वह आसपड़ोस के लोगों से चंदा कर भाई को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराते। कम से कम भाई का दर्द तो कम होता। हैलट तो कोई भर्ती करने को तैयार नहीं था, जबकि पुलिसकर्मी भी उनके साथ अस्पताल में भटकते रहे।
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Human trafficking - फोटो : अमर उजाला
दूषित सूई से संक्रमण का खतरा
डॉक्टरों के अनुसार सुरेश में किसी तरह का संक्रमण है। माना जा रहा है कि दिल्ली में उसे नशीले इंजेक्शन देकर बेहोश किया जाता था, एक ही इंजेक्शन वहां कैद सभी लोगों को लगाते थे। ऐसे में उसमें संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। कांशीराम में उसे एंटीबायोटिक दी गई है।
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Human trafficking case - फोटो : अमर उजाला
मुझे बचाओ.. बचाओ
यातनाओं के कारण सुरेश का दिमागी संतुलन भी बिगड़ चुका है। वह रुक रुककर बचाओ... बचाओ और लोग मुझे मार डालेंगे। मुझे बचा लो.. चिल्लाने लग रहा है। डॉक्टरों की मानें तो उसे गहरा सदमा लगा है। अभी तक वह सदमे से उभर नहीं सका है।

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Human trafficking case - फोटो : अमर उजाला
सुरेश ने नहीं झपकाई पलकें, होगा अल्ट्रासाउंड
उसकी आंखों की जांच करने वालीं हैलट के नेत्र रोग विभाग की डॉ. नम्रता पटेल ने बताया कि सुरेश की पुतली खराब है। पलकें झपक नहीं रही हैं। देख नहीं पा रहा है। यदि सिर्फ कॉर्निया बदल दिया गया, तो पलकें न झपकने के कारण आंखों में संक्रमण होगा और कॉर्निया खराब हो जाएगा। इसलिए आंख की अंदर तक जांच के लिए अल्ट्रासाउंड कराने की संस्तुति की है।
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हैलट अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
मैंने कांशीराम अस्पताल के सीएमएस को निर्देश दिए हैं कि सुरेश को भर्ती कर इलाज की व्यवस्था करें। वह भर्ती कर लिया गया है। यदि इलाज में कहीं कोताही बरती गई है तो जांच कर कार्रवाई करूंगा।  -डॉ. आलोक रंजन, सीएमओ
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