नदी से तैरकर बाहर निकले किसानों के लिए यह हादसा जीवन भर न भूलने वाला अहसास बन गया। सभी इसे नया जीवन मिलना बता रहे हैं। हादसे के बाद तैरकर बाहर आए रामरहीस ने बताया कि रेलिंग की ठोकर लगने पर वह अन्य साथियों के साथ उछलकर नदी में जा गिरा, ऊपर से ट्रैक्टर-ट्रॉली आकर गिरी। इससे वह ट्राली के नीचे आ गया। लगभग 15 मिनट पानी के अंदर रहकर निकलने का रास्ता तलाशता रहा। पानी के तेज बहाव में तैरते-तैरते थक गया था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और जान बचाई। अगर तैरना न मालूम होता, तो जान बचानी मुश्किल थी। तैरकर बाहर निकले रामधुनी और अजयपाल ने भी हादसे का मंजर बताया। रामधुनी ने बताया कि चचेरे भाई संदीप के साथ ट्रैक्टर पर आगे बैठा था। उसे सिर्फ इतना ही याद है कि ट्रैक्टर का आगे का पहिया निकला और जब तक संभल पाते तब तक पुल की रेलिंग से टक्कर हो गई और हम सब गिर गए।
संदीप उससे पहले नदी से बाहर निकल आया। वह तैरते-तैरते थक गया और नदी के किनारे पहुंचा तो डूबने लगा। लग रहा था कि जान बचानी मुश्किल हो जाएगी, लेकिन तभी संदीप ने बांह पकड़कर बाहर खींच लिया।
नदी से निकले तो किनारे पर चीख-पुकार भरा माहौल मिला। अजयपाल को गिरने से चोट लगने के कारण एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया। वहीं, संदीप जिला अस्पताल में बेहोशी की हालत में भर्ती है।