घाटमपुर में भीतरगांव के बेंहटा-बुजुर्ग गांव स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर के गुंबद में लगे मानसूनी पत्थर से पानी की बूंदे टपकनी शुरू हो गई हैं। मंदिर के पुजारी कुड़हा प्रसाद शुक्ल ने बताया कि पानी की बूंदें 2 जून से टपकनी शुरू हुई हैं, अभी इनका आकार काफी छोटा है।
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गर्भगृह के शिखर पर लगा पत्थर जिसमें आईं पानी की बूदें
- फोटो : अमर उजाला
गांव के बुजुर्गों चतुरी देवी (95), चंद्रकली (85), भगवानदीन (69) और मो.शौकत अली (81) ने बताया कि वह लोग अपने पुरखों से सुनते चले आए हैं कि जगन्नाथ मंदिर की छत पर लगे पत्थर से जब पानी की बूंदें टपकनी शुरू हो जाती हैं तो इसके एक पखवारे बाद मानसून सक्रिय हो जाता है।
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प्राचीन जगन्नाथ मंदिर
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यदि बूंदों का आकार कम होता है तो उस वर्ष बारिश भी कमजोर होती है। गांववालों ने बताया कि वह लोग पत्थर से टपकने वाली बूंदों को मानसूनी बारिश का आगाज मानकर खेती-किसानी के काम शुरू करने की तैयारी करते हैं। जगन्नाथ मंदिर कई सदी प्राचीन है।
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मंदिर के ऊपर लगा अष्टधातु से निर्मित चक्र
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इतिहासकारों के मुताबिक, इसका निर्माण काल 9वीं शताब्दी के आसपास प्रतापी सम्राट हर्षवर्धन के समय का है। देश-विदेश में इसकी ख्याति मानसूनी मंदिर के नाम से है।
बुजुर्गों ने बताई मंदिर की महिमा
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मंदिर का रहस्य आज तक रहस्य है
हालांकि इस रहस्य को जानने के लिए कई बार प्रयास हो चुके हैं पर तमाम सर्वेक्षणों के बाद भी मंदिर के निर्माण तथा रहस्य का सही समय पुरातत्व वैज्ञानिक पता नहीं लगा सके। बस इतना ही पता लग पाया कि मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार 11वीं सदी में हुआ था। उसके पहले कब और कितने जीर्णोद्धार हुए या इसका निर्माण किसने कराया जैसी जानकारियां आज भी अबूझ पहेली बनी हुई हैं, लेकिन बारिश की जानकारी पहले से लग जाने से किसानों को जरूर सहायता मिलती है।