आने वाले विधान सभा चुनावों में पाठा के डकैत रूपी ‘रावण’ दखल दे सकते हैं। डोडामाफी में बबुली कोल गैंग की गोलीबारी से गांव में दहशत व्याप्त है। लेटरपैड से रंगदारी वसूलने वाले बबुली ने अपनी धमक बरकरार रखने का संदेश दिया है। दो दिन पहले डोडामाफी में बबुली कोल गैंग ने किसान रामकरन यादव की हत्या कर दहशत फैलाई। इतना ही नहीं 23 सितंबर को डोडामाफी में हुए उपचुनाव में वह अपनी बिरादरी का ग्राम प्रधान निर्विरोध चुनवाने में भी सफल रहा।
सत्तर के दशक से डकौतों के नाम से बदनाम हुआ पाठा
डेमो पिक पाठा के जंगलों में पुलिस कॉम्बिंग
पाठा क्षेत्र 1970 के दशक से ही दस्युओं के अड्डे के रूप में बदनाम हो गया था। शुरुआत ददुआ ने की। तीन दशक तक उसका डंका बजा। उसके बाद ठोकिया, बलखड़िया, सुंदर पटेल उर्फ रागिया आदि ने दहशत फैलाई। बलखड़िया के मारे जाने के बाद बबुली खुद गैंग बनाकर वारदातें करने लगा है। कुछ राजनीतिक नेता बेहद गुपचुप ढंग से डकैतों के जरिये वोट हासिल करने की जुगत भी भिड़ाएंगे। हालांकि डोड़ामाफी में मारे गए युवक के घर जाकर कई नेता सांत्वना भी दे चुके हैं।
चुनाव में हरगिज दखल नहीं दे पाएंगे दस्यु : डीआईजी
डकैत डेमो पिक
विधानसभा चुनाव में दस्यु बबली कोल या किसी अन्य गिरोह की दखलंदाजी के सवाल पर चित्रकूटधाम मंडल पुलिस उप महानिरीक्षक ज्ञानेश्वर तिवारी अपना तर्क देते हैं। उनका कहना है कि डकैत चुनाव में व्यवधान नहीं डाल पाएं, इसके लिए पुलिस तैयार है। डीआईजी ने कहा कि दस्यु बबुली अपने पैतृक गांव डोड़ामाफी या आसपास ही अक्सर रहता है, लेकिन गांव वालों का सहयोग न मिलने से पुलिस उसे दबोच नहीं पा रही। जल्द ही वह पुलिस के हत्थे चढ़ेगा।