बिकरू में हुए हत्याकांड की साजिश काफी समय पहले से रची जा रही थी। इसमें एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर, विधायक, खनन माफिया भी शामिल थे। इस बात का खुलासा अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने बिकरू कांड की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग के सामने किया। उन्होंने हत्याकांड से जुड़े कुछ ऑडियो-वीडियो भी जल्द आयोग को सौंपने की बात कही।
विज्ञापन
2 of 7
विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ ने आयोग को दिए शपथपत्र में कहा है कि जांच में फंसे तत्कालीन डीआईजी व पुलिस अधिकारियों तथा जय बाजपेई का नार्को ब्रेन मैपिंग, लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया जाए। सौरभ ने आयोग को विकास दुबे, उसके खजांची जय बाजपेई व उसके गिरोह के सदस्यों द्वारा खरीदी गई संपत्तियों का ब्योरा भी सौंपा।
विज्ञापन
3 of 7
गैंगस्टर जय बाजपेई और विकास दुबे
- फोटो : amar ujala
बिकरू कांड की दाखिल चार्जशीट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारने के कुछ घंटे बाद विकास दुबे के खास राम सिंह ने दरोगा केके शर्मा को फोन किया था। उसने पुलिस की कार्रवाई का पूरा अपडेट और हालात के बारे में जानकारी ली थी। तब उसको पता चला था कि गोली कांड में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे। दरोगा से बात करने के बाद उसका मोबाइल बंद हो गया था।
4 of 7
विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
पुलिस की विवेचना के मुताबिक सीडीआर से पता चला कि दो जुलाई शाम को चार बजे सबसे पहले आरोपी दरोगा केके शर्मा की विकास दुबे से बातचीत हुई थी। इसके कुछ ही देर बाद केके शर्मा ने राम सिंह को फोन किया। फिर रात करीब 11 बजे केके शर्मा ने राम सिंह को कॉल की। इस बीच एक कॉल थाने के मुंशी ने आरोपी हीरू दुबे को की। फिर विकास पर एफआईआर दर्ज होने के बाद रात 12:11 मिनट पर विकास की सिपाही राजीव से बातचीत हुई।
विज्ञापन
5 of 7
kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
इसकी कॉल रिकॉर्डिंग भी वायरल हुई थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक वारदात के बाद रात ढाई व साढ़े तीन बजे राम सिंह ने फिर केके शर्मा को कॉल की और शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई की उसको पूरी जानकारी दी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकास दुबे ही नहीं उसका पूरा गिरोह पुलिस के संपर्क में था। दरोगा, सिपाही और थानेदार सभी उसके कारखास रहे हैं।
विज्ञापन
6 of 7
kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
मोर्चा लेने के बजाए भागे थे एसओ
दबिश के दौरान चौबेपुर का तत्कालीन थानेदार विनय तिवारी सबसे पीछे था। जब गोलियां चलने लगीं तो उसने अपने पुलिसकर्मियों का साथ नहीं दिया बल्कि वहां से भाग गया था। सूत्रों के मुताबिक विवेचना में पुलिस ने दावा किया है कि ये पूरी साजिश के तहत विनय ने किया। उसको पता था कि गोलियां चलेंगी, गैंग हमला करेगा, इसलिए पहले ही भाग निकला।
सिपाही ने दी थी एसओ को जानकारी
पुलिस की जांच के मुताबिक जब विकास ने सिपाही राजीव को फोन कर धमकी दी थी कि आज वो सबका खून कर देगा तब उसने ये बात एसओ विनय तिवारी को बताई थी लेकिन विनय तिवारी ने उसको नजरअंदाज कर दिया था क्योंकि वो भी विकास दुबे की साजिश में शामिल था। तभी उसने किसी भी अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं दी।