हर्षिता की मौत के मामले में राजनीतिक दबाव डालने की कोशिश की जा रही है। इसमें बिहार के एक बड़े सत्ताधारी प्रदेश सरकार के नेताओं के जरिए आरोपियों की पैरवी करवा रहे हैं। हर्षिता के पिता पदम अग्रवाल ने इस संबंध में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य कमलेश गौतम को जानकारी दी है।
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हर्षिता की मौत में साजिश की आशंका, सुबूत मिटाती दिखी सास
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने मामले में हर्षिता के पति उत्कर्ष अग्रवाल, ससुर सुशील अग्रवाल और सास रानू अग्रवाल को जेल भेजा है। पदम अग्रवाल के मुताबिक सुशील के भाई के रिश्तेदार बिहार सरकार में बड़े पद पर हैं। घटना के बाद से उनका दखल जारी है। पदम के मुताबिक सुशील ने इस बारे में अपने रिश्तेदार और बिहार के सत्ताधारी नेता से पूरा मामला बताया।
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सातवीं मंजिल से गिरकर कारोबारी की पत्नी की मौत
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जिसके बाद उन्होंने लखनऊ के किसी नेता व अधिकारी के जरिए दबाव डलवाया। आशंका है कि शायद इसी कारण से पहले दिन पुलिस ने आरोपी हर्षिता के पति उत्कर्ष व उनके ससुर सुशील को जेल नहीं भेजा था। दूसरे दिन जब पुलिस पर हर्षिता के परिजनों ने दबाव बनाया और एसएसपी से मिले, साथ ही मीडिया का दबाव बना तब पुलिस ने पिता-पुत्र को जेल भेजा।
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सातवीं मंजिल से गिरकर कारोबारी की पत्नी की मौत
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दबाव में हुई कार्रवाई तो नपेंगे अफसर
राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य ने शिकायत सुनने के बाद पदम अग्रवाल व उनके परिवार को भरोसा दिया कि मामले में न्याय होगा। अगर किसी भी स्तर पर कोई दबाव में कार्रवाई करता है और दोषियों को बचाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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जस्टिस फॉर हर्षिता की मुहिम में देश का समर्थन
घटना के दूसरे दिन फेसबुक पर जस्टिस फॉर हर्षिता नाम से पेज बनाया गया था। पांच दिन के भीतर ही पेज से देश भर के हजारों लोग जुड़ चुके हैं। वह एक जुट में दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं। वहीं हर्षिता के पिता पदम अग्रवाल ने बताया कि देश भर के कई संगठनों ने संपर्क किया है। जिन्होंने एकजुट होकर हर्षिता को न्याय दिलाने के लिए बड़ा कैंडिल मार्च निकालने की तैयारी शुरू की है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि मार्च कब होगा।