कानपुर हादसे में मरने वाली कल्पना का छोटा भाई अंशुमान आजादनगर स्थित नंदलाल खन्ना स्कूल की जूनियर शाखा में पढ़ता था। चालक अमित ने मकड़ीखेड़ा स्थित घर से दोनों भाई बहन को ई-रिक्शा में बैठाया और भव्या, सात्विक व कर्तव्य के साथ स्कूल छोड़ने के लिए सुबह करीब पौने सात बजे निकल पड़ा।
अंशुमान अकेले जूनियर स्कूल में पढ़ता था। इसलिए अमित ने पहले अंशुमान को छोड़ा और फिर आरबीआई कॉलोनी के सामने स्थित स्कूल की तरफ बढ़ चला। पांच मिनट में ई-रिक्शा डॉलफिन चौराहा पहुंचा ही था कि हादसा हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पिता विनोद कुमार और मां दुर्गा अस्पताल पहुंच गए।
सभी का रो-रोकर बुरा हालत था। वहीं, मासूम अंशुमान भी बेसुध सा बैठा बहन के शव को एकटक देखता रहा। हादसे से थोड़ी देर पहले तक वह बहन के साथ था, लेकिन अब दो महीने बाद पड़ने वाले रक्षाबंधन के पर्व पर इस साल उसकी कलाई सूनी रहेगी। वो बोला कि मैं होता, तो शायद ऐसा न होता।