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Boat Accident: चंद मिनटों के लिए दांव पर लगा दी जिंदगी, काल के गाल में ले गया ‘शार्टकट’ का रास्ता

Sat, 13 Aug 2022 11:40 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बांदा
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banda boat accident - फोटो : अमर उजाला
बांदा में 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर और समय बचाने को लेकर ‘शार्टकट’ रास्ता गुरुवार को काल साबित हुआ। लोगों ने अपना पौन घंटा बचाने के लिए पूरी जिंदगी दांव पर लगा दी। क्षेत्रीय ग्रामीणों के मुताबिक औगासी घाट में यमुना नदी पर पुल बना है। आवागमन शुरू है, लेकिन मर्का के औगासी घाट पुल के रास्ते असोथर गांव पहुंचने में लगभग 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर पड़ता है। इसमें करीब पौन घंटा समय ज्यादा लगता है। दूसरी तरफ मर्का से असोथर गांव तक यमुना नदी के रास्ते नाव के जरिये मात्र 600 मीटर की दूरी मात्र 20 मिनट में पूरी हो जाती है। नाविक इसका फायदा उठाकर मनमाने ढंग से नावों में लोगों को बैठाते हैं। गुरुवार को यही शार्टकट नाव सवारों को भारी पड़ गया। इस घटना के लिए ग्रामीण प्रशासन और पुलिस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
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जानकारी लेती केंद्रीय मंत्री - फोटो : अमर उजाला
‘कैसे मिलेंगे लापता, जब अनाड़ियों की तरह डालेंगे जाल’
‘लापता लोग कैसे मिलेंगे, जब अनाड़ियों की तरह जाल डालेंगे’। यह बात फतेहपुर की सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने प्रशासनिक अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कही। शुक्रवार की दोपहर वह मौके पर पहुंचीं। आधी-अधूरी तैयारियों पर नाराजगी जताई। पूछा कि, आप लोग कल से कर क्या रहे हैं? घटनास्थल से उल्टी दिशा में जाल डलवा दिया। उसे सीधा करें, तभी कोई मिल सकेगा। डीएम अनुराग पटेल ने मंत्री साध्वी को व्यवस्थाओं के बारे में बताया। 
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Banda Boat Accident - फोटो : अमर उजाला
स्टीमर से फतेहपुर सीमा पहुंचे मंत्री
फतेहपुर के डूबे लोगों के परिजन अपनी सीमा पर यमुना नदी किनारे इकट्ठा थे। दोनों मंत्री एनडीआरएफ की नाव पर सवार होकर नदी पार कर उनसे मिलने पहुंचे। उन्हें ढांढस बंधाया और खोजबीन के बंदोबस्त के बारे में बताया। दो स्टीमर पर मंत्रियों समेत सात से आठ लोग सवार थे। नदी का जायजा लेने के बाद मंत्री बांदा सीमा पर वापस आ गए।

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Banda Boat Accident - फोटो : अमर उजाला
हर कदम पर लापरवाही
मर्का कस्बे में हुए नाव हादसे में 24 घंटे बीत जाने के बाद भी लापता हुए लोगों का कोई सुराग नहीं लग सका है। नाव में सवार 50 लोग डूबे थे। तीन के शव बरामद हुए, 15 लोग तैर कर निकल आए थे। इसमें 32 लोग अभी लापता है। यहां हर कदम पर लापरवाही दिखाई दी। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 60 सदस्यीय टीम सुबह सात बजे से ही लापता लोगों को ढूंढने में लग गई। थाने से महज 120 मीटर की दूरी पर यह हादसा हुआ है, मगर किसी जिम्मेदार ने कोई यहां इंतजाम नहीं किया।  
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Banda Boat Accident - फोटो : अमर उजाला
पुलिस चेत जाती तो न होता हादसा 
कस्बे और आसपास के लोग बड़ी संख्या में नाव से होकर फतेहपुर जिले के विभिन्न गांवों में आवागमन करते हैं। ये लोग थाने के सामने से होकर गुजरते हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोग नाव पर सवार होते हैं, लेकिन थाने में तैनात पुलिस कर्मियों को ये दिखाई नहीं देते हैं। यह हाल तब है, जब मर्का घाट से चंद कदम पर थाना है। यहां पर थाना प्रभारी समेत कई पुलिस कर्मी तैनात हैं। इसके बाद भी पुलिस मूक दर्शक बनी रही।  
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Banda Boat Accident - फोटो : अमर उजाला
स्टीमर लेकर नहीं आया चालक
ग्रामीणों के मुताबिक, 22 लोगों की क्षमता वाली नाव में लगभग 50 लोग सवार थे। तीन बाइकें व छह साइकिल भी लदी थीं। ज्यादा वजन की वजह से नाव को मोड़ते समय पतवार टूट गई। इससे नाव डूब गई। कुछ दूरी पर बन रहे पुल के स्टीमर के चालक को बचाव के लिए आवाज लगाई गई, लेकिन वह नहीं आया। लोगों का कहना है कि स्टीमर आ जाता तो कई लोगों की जान बच जाती।  
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Banda Boat Accident - फोटो : अमर उजाला
चेतावनी के बाद भी नहीं रोका गया संचालन 
जिलाधिकारी ने मई में सभी एसडीएम को आदेश दिए थे कि बाढ़ और बारिश के समय अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी करें। बाढ़ सहायता एवं निगरानी केंद्र बनाए जाएं। एक हफ्ते पहले भी प्रशासन की ओर से निर्देश दिया गया था कि यमुना नदी उफान पर है। ऐसे में अगर लहर उठ रही है तो नाव न चलाएं। बावजूद इसके नावों का संचालन नहीं रोका गया है।
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Banda Boat Accident - फोटो : अमर उजाला
...तो बच जाती लोगों की जान 
यहां के 12 से 15 गांवों की 25 हजार की आबादी रोज यमुना पार जाने के लिए नाव से ही आवागमन करती है। छह नावों से रोज करीब 1400 से 1600 लोगों का आवागमन होता है। ऐसे में एक नाव में एक बार में 30 से 35 लोग एक साथ यात्रा करते हैं। लोगों का कहना है कि अगर पुल चालू हो गया होता तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता।
 
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