बुलंदशहर के दोस्तपुर गांव के लोगों का कहना है कि हमारे गांव पर कोई दाग नहीं था। छेड़छाड़ तक की रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी। बाहरी अपराधियों ने देशभर में हमारे गांव को चर्चित करा दिया। नाम बताते ही लोग टोकते थे।
बुलंदशहर का दोस्तपुर गांव के जंगल में एनएच-91 के पास 28 जुलाई की रात मां-बेटी के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और लूट की घटना ने गांव को देश के अंदर शर्मसार कर दिया। घटना के बारे में सोचकर आज नौ साल बाद भी ग्रामीण सिहर उठते हैं।
उनका कहना है कि यह कांड बेदाग गांव को एक ऐसा दाग दे गया कि कभी नहीं धुलेगा। हाईवे कांड पर सोमवार को सुनाई जा रही सजा के बारे में गांव के लोग चर्चा करते रहे।
सोमवार को गांव के प्रवेश द्वार पर खेड़ दोस्तपुर गांव निवासी पृथ्वीराज सिंह ने कहा कि 28 जुलाई की रात जब सोए तो गांव पर किसी भी तरह का कोई दाग नहीं था। 29 जुलाई की सुबह उठे तो देखा कि पुलिस की दबिश से पूरा गांव परेशान था।
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हाईवे पर गांवदोस्तपुर के पास तैनात पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मां-बेटी के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना को पहले गांव के लोगों से जोड़कर देखा जा रहा था। कई दिन तक पुलिस ने गांव के लोगों को उठाकर पूछताछ की। उनका कहना है जब जांच आगे बढ़ी तो गांव का कोई भी व्यक्ति इसमें शामिल नहीं पाया गया।
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हाईवे कांड के दौरान जांच करने पहुंचे तत्कालीन नवनियुक्त एसपी सिटी व देहात कोतवाली प्रभारी(फाइल फोटो)
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आसपास के निर्दोष लोगों को फंसाया गया तो उन्हें भी छोड़ दिया गया। पृथ्वीराज सिंह ने दावा किया है कि जब से यह कांड हुआ है, तब से लूट, चोरी, डकैती के अपराधी भी यहीं से पकड़े जाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार पुलिस अधिकारियों से इस बारे में शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि पहले से ही गांव देशभर में इतना बदनाम हो चुका है। अब और बदनाम न किया जाए।
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हाईवे कांड की जांच करने पहुंची सीबीआई टीम। फाइल फोटो।
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अलाव ताप रहे पूर्व प्रधान देवराज सिंह ने कहा कि घटना के बाद गांव के बाहर जाने में भी लोग डरने लगे थे। क्योंकि प्रमुख सचिव, डीजीपी तक ने दौरा किया। गांव के 10 से अधिक लोगों को उठाकर पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पूछताछ की गई। सीबीआई भी गांव में आई। रात को सोते समय गांव के हर व्यक्ति के मन में बस एक ही डर रहता था कहीं पुलिस उठाकर न ले जाए।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी जुबेर व साजिद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दुकान पर खड़े विजय प्रताप सिंह ने बताया कि उस समय पूरे गांव में भय का माहौल था। वह नोएडा की एक कंपनी में नौकरी करते थे। एक सभ्य और संस्कारी गांव होने के नाते बड़े गर्व से नाम लेते थे। हाईवे दुष्कर्म कांड के बाद से गांव का नाम बताते थे तो लोग कहते थे ये वहीं गांव है जहां मां-बेटी के साथ दुष्कर्म और लूट की घटना हुई थी। शर्म के मारे सिर नीचे झुक जाता था।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी जुबेर व साजिद
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लोकेश कुमार ने कहा कि जीवन में एक घटना सब कुछ बदल देती है। उसका सही उदाहरण हमारा गांव है। पीड़ित और आरोपी दोनों ही बाहर के थे। गांव का कोई लेना देना नहीं था, लेकिन सामूहिक दुष्कर्म और लूट का कलंक गांव के ऊपर लग गया था।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
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संसद में उठाया था मुद्दा
तत्कालीन सपा सरकार के खिलाफ सांसद डॉ. भोला सिंह और तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने संसद में मुद्दा उठाया था। सांसद भोला सिंह ने कहा था कि सपा सरकार अपराधियों पर अंकुश लगाने में नाकाम है। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का इस्तीफा भी मांगा था।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
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हाईवे कांड: 127 पन्नों के फैसले में न्याय का हथौड़ा, दोषियों को कड़ा सबक
बहुचर्चित हाईवे कांड में न्यायालय ने 127 पन्नों के फैसले में न केवल वारदात की बर्बरता को रेखांकित किया, बल्कि जांच में रही खामियों और साक्ष्यों की कड़ियों पर भी कड़ा रुख अपनाया। न्यायाधीश ने आदेश में स्पष्ट किया कि समाज में भय व्याप्त करने वाले ऐसे जघन्य अपराधों में नरमी की कोई जगह नहीं है। फैसले में पन्ना दर पन्ना अदालत ने चश्मदीदों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट का बारीकी से विश्लेषण किया है। कोर्ट ने कहा कि सड़क पर चलते बेगुनाह नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इस मामले में कानून के शासन को चुनौती दी गई थी।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
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हाईवे कांड : पांचों दोषियों को आजीवन कारावास, अंतिम सांस तक रहेंगे जेल में
बुलंदशहर में नेशनल हाईवे-91 पर नौ साल पहले कार सवार परिवार को बंधक बनाकर मां-बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म व लूटपाट करने के पांच दोषियों को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ओपी वर्मा के न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर 1.81 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
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न्यायालय ने कहा कि सभी दोषी अंतिम सांस तक जेल में रहेंगे। साथ ही अर्थदंड की आधी राशि पीड़ित मां-बेटी को दी जाएगी। वारदात के नौ वर्ष चार माह और 25 दिन बाद फैसला आया है। वारदात 28 जुलाई 2016 की रात हुई थी। उस वक्त गाजियाबाद में रहने वाले परिवार (अभी बरेली निवासी) के छह सदस्य शाहजहांपुर स्थित पैतृक गांव तेरहवीं में शामिल होने जा रहे थे। बुलंदशहर के देहात कोतवाली क्षेत्र में दोस्तपुर फ्लाईओवर के निकट बदमाशों ने उनकी कार को रोक लिया था।
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हाईवे कांड के आरोपी धर्मवीर उर्फ राका को जेल लेकर जाती पुलिस
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उन्होंने कार सवार 14 वर्षीय किशोरी, उसकी मां, पिता, ताई, ताऊ व तहेरे भाई को बंधक बना लिया था। सभी को कार समेत सड़क के दूसरी तरफ खेत में ले गए। वहां तीनों पुरुषों के हाथ-पैर बांध दिए। किशोरी व उसकी मां के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद आरोपी लूटपाट कर भाग निकले थे।
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हाईवे कांड के आरोपी जुबैर और साजिद को जेल लेकर जाती पुलिस
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मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच की और छह अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। इनमें बावरिया गिरोह के जुबैर उर्फ सुनील उर्फ परवेज, सलीम उर्फ बीना उर्फ दीवानजी और साजिद निवासीगण गांव इटखारी बिनौरा, तिरवा, कन्नौज के खिलाफ सीबीआई ने अप्रैल 2017 में आरोपपत्र दाखिल किया था।
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हाईवे कांड के आरोपी सुनील और नरेश को जेल लेकर जाती पुलिस
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बाद में हरियाणा पुलिस ने धर्मवीर उर्फ राका उर्फ जितेंद्र, नरेश उर्फ संदीप उर्फ राहुल निवासी गांव गेशनपुर, मोहम्मदाबाद, फर्रूखाबाद और सुनील उर्फ सागर निवासी गांव बानवोई, आजादनगर, मोहम्मदाबाद को गिरफ्तार किया। इनके खिलाफ सीबीआई ने 27 जुलाई 2018 को आरोपपत्र दाखिल किया था।
कोर्ट परिसर में हाईवे कांड की सुनाई गई सजा के दौरान मौजूद पुलिस बल
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एक अभियुक्त सलीम की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई। अन्य अभियुक्तों जुबैर, साजिद, धर्मवीर, नरेश व सुनील को गत शनिवार को न्यायालय ने दोषी करार दिया था। सोमवार को इनको सजा सुनाई गई। प्रकरण में लापरवाही करने के चलते एसएसपी समेत 17 पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी थी।