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Mulayam Singh: 'नेता जी' की दूरदर्शिता राजनीति के मैदान में उन्हें देती थी मजबूती, जानें इससे जुड़ा एक किस्सा

Mon, 10 Oct 2022 05:54 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
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मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
सपा प्रमुख के तौर पर मुलायम सिंह यादव की दूरदर्शिता पार्टी को मजबूती प्रदान करती थी। इसी का उदाहरण है उत्तर प्रदेश का बदायूं जिला। यहां यादव-मुस्लिम गठजोड़ के जरिये बदायूं सपा का मजबूत गढ़ बन गया था। बदायूं और संभल लोकसभा सीटों पर यादव-मुस्लिम गठजोड़ के दम पर सपा हमेशा मजबूत रही। सपा के गठन के बाद बदायूं लोकसभा सीट से सपा प्रत्याशी के रूप में सलीम शेरवानी ने पहला चुनाव लड़ा। यादव-मुस्लिम गठजोड़ के दम पर शेरवानी लोकसभा पहुंचे। सलीम शेरवानी कांग्रेस से भी 1984 में सांसद चुने गए थे।
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बदायूं महोत्सव में मुलायम सिंह - फोटो : फाइल फोटो
सपा में आने के बाद सलीम शेरवानी के जरिये सपा को जिले में यादव-मुस्लिम गठजोड़ का काफी फायदा हुआ। इसके बाद सलीम शेरवानी 1996, 1998, 1999 और 2004 के चुनाव में लगातार सांसद चुने गए। उन दिनों केंद्र में अल्पमत की सरकारों की वजह से कई बार मध्यावधि चुनाव हुए।
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मुलायम सिंह यादव - फोटो : फाइल फोटो
2009 के चुनाव में सपा ने सलीम शेरवानी का टिकट काट दिया और बदायूं की विरासत मुलायम सिंह यादव ने अपने भतीजे धर्मेंद्र यादव को सौंप दी।

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सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव - फोटो : फाइल फोटो
धर्मेंद्र यादव भी बदायूं से 2009 और फिर 2014 में मोदी लहर के बीच चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में वह भाजपा की डॉ. संघमित्रा मौर्य से मामूली अंतर से चुनाव हार गए।
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मुलायम सिंह यादव - फोटो : फाइल फोटो
प्रदेश में 2012 से 2017 तक सपा सरकार में काफी विकास कार्य हुए। राजकीय मेडिकल कॉलेज, ओवरब्रिज, बदायूं-बरेली के बीच फोर लेन रोड, राजकीय डिग्री कॉलेज, राजकीय कन्या डिग्री कॉलेज, कछला में गंगा पर सड़क पुल, बाईपास समेत कई बड़े विकास कार्य सपा सरकार में कराए गए।
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