बिजनौर के महमदाबाद से फरार हुए दीक्षित और शालू के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते थे। लेकिन सामाजिक ताने बाने की वजह से वे अपनी जुबान खोलने से डरते रहे। उन्हें पता था कि उनके रिश्ते को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। समाज के डर से ही उन्होंने इतना बड़ा कदम उठा लिया। दोनों के परिजनों का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनके बच्चे इतना बड़ा कदम उठा लेंगे।
शेरकोट थाने के गांव महमदाबाद निवासी दीक्षित व शालू के बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों की जाति अलग होने के कारण वे खुलकर अपनी शादी के बारे में किसी से बात नहीं कर पा रहे थे। दो माह पहले परिजनों को इसकी जानकारी मिली थी। दोनों के परिजनों ने उन्हें काफी समझाया, लेकिन इसके बावजूद दोनों चोरी छिपे मिलते रहे। इसके बाद शालू के परिजनों ने उसकी शादी नगीना क्षेत्र में तय कर दी। शुक्रवार को उसका लग्न जाना था। शादी से पहले ही दोनों गांव से चले गए। दोनों के परिजन एक साथ उन्हें तलाश करते रहे, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। रिश्तेदारी व परिचितों के यहां भी तलाश किया गया। गुमशुदगी दर्ज होने के बाद से पुलिस भी दोनों की तलाश में जुटी थी। गुरुवार को दोनों के शव स्योहारा क्षेत्र के सरकड़ी के पास नहर में उतराते मिले। शेरकोट पुलिस के मुताबिक, परिजनों ने बताया कि दो माह पहले ही उन्हें दोनों के संबंध के बारे में पता चला था। परिजनों को उम्मीद नहीं थी कि दोनों इतना बड़ा कदम उठा लेंगे।