14 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार गुरुवार को मध्य गंगा नहर में पानी छोड़ा गया। बिजनौर बैराज से पांच सौ क्यूसेक पानी नहर में डिस्चार्ज किया, जोकि एक किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आगे बढ़ा। प्रदेश सरकार की इस महत्वपूर्ण परियोजना में 4400 करोड़ रुपये की लागत आई है।
गुरुवार को बिजनौर बैराज पर उत्सव का माहौल रहा। लखनऊ से सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता अनिल कुमार भी बैराज पहुंचे। बैराज को फूलों से सजाया गया। बाकायदा हवन पूजन करने के साथ बैराज के गेट खोलने के लिए प्रमुख अभियंता अनिल कुमार, सूरजपाल सिंह मुख्य अभियंता, अवधेश कुमार मुख्य अभियंता ने बटन दबाया। इससे पहले नारियल फोड़कर नहर में पानी छोड़ने का श्रीगणेश किया गया। फिलहाल बैराज से 500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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मध्य गंगा नहर।
- फोटो : amar ujala
इस परियोजना की मुख्य नहर की लंबाई 66 किलोमीटर है, जिसमें 55 किलोमीटर तक पानी छोड़ा गया है। दरअसल, नहर के किलोमीटर 55 पर अमरोहा में रेलवे का ब्रिज बन रहा है। फिलहाल यहीं तक ही पानी छोड़कर नहर का परीक्षण किया जा रहा है। वहीं दोपहर 1: 30 बजे बैराज के गेट खोले गए तो सिंचाई विभाग के अफसरों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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मध्य गंगा नहर का श्रीगणेश।
- फोटो : amar ujala
बता दें कि इस परियोजना के पूरा किए जाने को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर बने हुए थे। इसकी शुरुआती लागत एक हजार करोड़ रुपये थी, जो कि बाद में बढ़कर 4400 करोड़ रुपये हो गई। परियोजना की लागत का 2800 करोड़ रुपया जमीनों के मुआवजे में ही खर्च हुआ है।
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मध्य गंगा नहर का श्रीगणेश।
- फोटो : amar ujala
हर एक किलोमीटर पर रही एक जेई की तैनाती
पानी छोड़े जाने के इस उत्सव में सिर्फ लखनऊ से ही आलाधिकारी नहीं जुटे बल्कि 14 डिविजन के अधिशासी अभियंताओं ने भी बैराज पर डेरा डाल लिया था। वहीं नहर में पानी छोड़े जाने के बाद नहर की मजबूती का जायजा लेने के लिए हर एक किलोमीटर पर एक जेई की तैनाती रही। जिससे पानी के बहाव और नहर की स्थिति पर नजर रखी जा सके।
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सेल्फी लेते लोग।
- फोटो : amar ujala
डार्क जोन में शामिल 11 ब्लॉक तक पहुंचेगा पानी
मध्य गंगा नहर परियोजना से मुरादाबाद, अमरोहा और संभल जिले के 11 ऐसे ब्लॉक में सिंचाई के पानी मुहैया होगा, जोकि डार्क जोन में हैं। 11 डार्क जोन को मिलाकर कुल 11 ब्लॉक में पानी की आपूर्ति होगी। मुख्य नहर से बहजोई और चंदौसी शाखा नहर निकली हैं। इन शाखाओं से रजबहे और वितरण प्रणाली 1065 किलोमीटर बनाई गई है।