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भदोही अग्निकांड: बिखरे सामान बयां कर रहे हादसे की भयावहता की दास्तान, डरा रहा पंडाल के अंदर का नजारा

Tue, 04 Oct 2022 02:50 AM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, घोसिया
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भदोही अग्निकांड - फोटो : amar ujala
औराई के कैयरमऊ के दुर्गा पूजा पंडाल में अग्निकांड की तस्वीरें सोमवार को भी हादसे की भयावहता बयां कर रहीं थीं। जिला प्रशासन ने घटनास्थल को पूरी तरह से सील कर दिया था। लेकिन अंदर का नजारा किसी को भी डराने के लिए काफी था। 
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भदोही अग्निकांड - फोटो : amar ujala
कल तक जहां भव्य पूजा पंडाल था, वहां सोमवार को सिर्फ उजड़ा ढ़ांचा नजर आ रहा था। कल जिस पंडाल में लोग मां की महिमा का प्रसंग देख रहे थे, वहां आज एक मातमी सन्नाटा पसरा था। बिखरे सामान, जले अवशेष और राख हो चुकीं पंडाल की अस्थाई दीवारें देख लोग सिहरन से भर उठे। आग की लपटों के बीच बीती रात की भगदड़ के बाद कहीं बच्चे का चश्मा तो कहीं किसी महिला का पर्स गिरा पड़ा था। कहीं स्मार्टवॉच तो कहीं प्रसाद की टोकरी पड़ी थी। बिखरे जूते-चप्पल मानो कह रहे हों कि जो हुआ, बहुत बुरा हुआ। घटना के बाद पंडाल के पास फोर्स की तैनाती भी की गई है। सोमवार को जिले भर से बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंचे। सभी वहां की स्थिति देख अवाक रह गए। हर कोई पुलिस-प्रशासन से लेकर आयोजन समिति को कोसता रहा। उनका कहना था कि अगर व्यवस्था ठीक रहती तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती। 
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भदोही अग्निकांड में बची रही मां दुर्गा की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
माता के दरबार दो परिवारों पर टूटा गमों का पहाड़
औराई के नरथुआं में रविवार की रात हुए अग्निकांड से दो परिवारों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। जेठूपुर के दीपक सेठ के छोटे बेटे अंकुश सोनी कीमौत हो गई है। वहीं, बारीगांव के पूर्व प्रधान रमापति की पत्नी और दो नातियों की जान जा चुकी है। इनके परिवार के पांच से अधिक बच्चों का अस्पतालों में उपचार चल रहा है।

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भदोही अग्निकांड में बची रही मां दुर्गा की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
औराई स्थित पंडाल में आसपास के दर्जन भर गांव की महिलाएं और पुरुष आरती संग शो देखने पहुंचे थे। हादसे में सबसे अधिक जेठूपुर, बारीगांव और सेऊर गांव के लोग प्रभावित हुए हैं। जेठूपुर के करीब 12, बारीगांव के 25 और सेऊर के 15 लोग अग्निकांड के शिकार हुए हैं। बारीगांव के पूर्व प्रधान रमापति के कुनबे के आठ लोग झुलसे हैं। उनकी पत्नी, दो नातियों की मौत हो चुकी है। पांच बच्चे अब भी बीएचयू, ट्रामा सेंटर में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। जेठूपुर गांव के दीपक सोनी पर मानो ईश्वर ने तुषारापात कर दिया है। उनके छोटे बेटे अंकुश सोनी की घटना में मौत हो चुकी है। सोमवार को वह बेसुध घर के बाहर बैठे रहे। महिलाओं और रिश्तेदारों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन नजर आया। 
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भदोही दुर्गा पूजा पंडाल में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
पहले पति और अब इकलौते बेटे को भी खोया
औराई अग्निकांड में झुलसी सीमा देवी (40) का कबीरचौरा हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। शायद वह ठीक होकर घर भी आ जाएं, लेकिन उसे क्या पता कि अब उसकी पूरी दुनिया उजड़ चुकी है। पहले पति और अब एकलौते बेटे को खो कर सीमा कैसे जीएगी, यह सोचकर ही रिश्तेदार चिंतित हैं। 
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पूजा पंडाल के दूसरे हिस्से का बचा हिस्सा - फोटो : अमर उजाला
सीमा के पति की 2018 में रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी थी। जिसके बाद से उसका एकलौता सहारा उनका बेटा हर्षवर्धन ही था। वह उसे बड़े लाड-प्यार से रखती थी। रविवार को अग्निकांड में प्रकृति के क्रूर खेल ने उनसे इकलौता सहारा भी छीन लिया। अगलगी में उनके बेटे हर्षवर्धन (7) की मौत हो गयी। सीमा की पहले मांग उजड़ी और अब कोख भी सूनी हो चुकी है। सीमा की हालत देख हर कोई भगवान से शिकायत करता नजर आया।
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भदोही में दुर्गा पूजा पंडाल में लगी भीषण आग - फोटो : अमर उजाला
झुलसे चेहरों पर उम्र भर रहेगी हादसे की छाप
औराई अग्निकांड पीड़ितों के हिस्से में जिंदगी भर का जख्म दे गया। शायद यह जिले का पहला ऐसा हादसा है जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोग झुलसे हैं। दुर्गापूजा पंडाल में चल रहे शो देखने के लिए जुटे लोगों को यह नहीं पता था कि यह शो उनके जीवन में एक ऐसा जख्म देगा, जो कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। 

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भदोही अग्निकांड में बची रही मां दुर्गा की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
प्रशासनिक आंकड़े के मुताबिक अग्निकांड में कुल 68 लोग झुलसे हुए हैं। पांच लोगों की मौत हुई है। इसमें बड़ी संख्या महिलाओं और युवतियों की है। हालांकि कुछ का कहना है कि अग्निकांड में करीब 50 की संख्या में महिलाएं, युवतियां और बच्चे झुलसे हैं। आग लगने के बाद पंडाल के ऊपर लगा प्लास्टिक का त्रिपाल गर्मी के कारण गल-गल कर गिरने लगा, जिसकी चपेट में महिलाएं-युवतियां आईं। उनके चेहरे तथा शरीर के ऊपरी की चमड़ी उखड़ गई है। इनके चेहरे भर लगा झुलसने का दाग अब ताउम्र बना रहेगा। दिक्कत उन युवतियों को होगी, जो अभी अविवाहित हैं। उनकी शादी में अब दिक्कत आ सकती है। 
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बीएचयू ट्रामा सेंटर लाए गए झुलसे लोग - फोटो : अमर उजाला
झुलसने के दर्द से ज्यादा ज्योति को रुला रही थी गरीबी 
गरीबी आदमी को कितना मजबूर कर सकती है, यह औराई अग्निकांड में झुलसी उपरौत निवासी ज्योति (17) की स्थिति से पता चलता है। देर शाम गांव की सहेलियों के साथ दुर्गा पूजा पंडाल देखने निकली ज्योति आग लगने के बाद बुरी तरह झुलस गयी है। उसके चेहरे का बायां हिस्सा, पैर का निचला हिस्सा और सीना और पीठ बुरी तरह से जल चुका है। गंभीर अवस्था में उसे सीएचसी औराई लाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसका ट्रीटमेंट शुरू किया। उसकी अवस्था बिगड़ता देख डॉक्टर उसे बीएचयू रेफर करने की बात करने लगे। लेकिन रूह कंपा देने वाली दर्द को सहन करके भी वह पड़ी रही। डॉक्टर उसे बार-बार वाराणसी रेफर करना चाहते थे लेकिन वह जाने को तैयार नहीं थी। लोगों ने जब पूछा कि वह बनारस क्यों नहीं जाना चाहती, तब उसने बताया कि हमारे पास इतने पैसे नहीं है कि हम इलाज करा पाएं। बताया कि उसका कोई गार्जियन भी नहीं है। पिता जी बाहर रहते हैं, ऐसे में इलाज कैसे होगा और कौन इसका खर्चा देगा? ये सुनकर हर कोई सिर्फ आह भर कर रह गया। हालांकि बाद में समझाने-बुझाने के बाद वह बनारस जाने को तैयार हो गई।
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