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Republic Day 2023: बरेली के गांव भरतौल में बसता है छोटा हिंदुस्तान, यहां रहते हैं कई प्रदेश के लोग

Thu, 26 Jan 2023 06:09 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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भरतौल गांव का पंचायत भवन - फोटो : अमर उजाला
अनेकता में एकता ही हमारे गणतंत्र की विशेषता है। बरेली से सटा गांव भरतौल इसी अवधारणा को साकार कर रहा है। यह गांव बरेली में तैनात रहे सैनिकों की पहली पसंद है। सेवानिवृत्त होने के बाद वे परिवार सहित यहीं बस गए। यहां कई प्रदेश और 30 जातियों के लोग रहते हैं। 
 
कैंट थाना क्षेत्र के गांव भरतौल में लंबे समय से एक ही परिवार के पास प्रधानी रही है। रीतराम 2005 में यहां प्रधान चुने गए। इस समय उनकी पत्नी प्रवेश प्रधान हैं। गांव की आबादी करीब 7500 है, जिसमें 4694 वोटर हैं। प्रधान के मुताबिक गांव में करीब एक हजार घर हैं, जिनमें 1600 परिवार रहते हैं। इनमें भी करीब 400 घर सेवानिवृत्त सैनिकों के हैं। 

पूर्व सैनिक परिवारों की बात करें तो यहां उत्तराखंड के लोग ज्यादा हैं। इनके अलावा हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, असम और पंजाब आदि प्रांतों के लोग यहां परिवार के साथ बसे हैं। 
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एक कार्यक्रम के दौरान भरतौल की महिलाएं और पुरुष - फोटो : अमर उजाला
गांव भरतौल में छठ पूजा से लेकर लोहड़ी व ओणम आदि सभी त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं। वैवाहिक व अन्य आयोजनों में भी विविधता दिखती है। लोग पड़ोसियों से करीबी के जरिये उनके रीति-रिवाजों, खानपान व सांस्कृतिक गतिविधियों की पूरी जानकारी रखते हैं।

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भरतौल के एक कार्यक्रम में प्रस्तुति देते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
बनवसा उत्तराखंड के लक्ष्मण सिंह खड़ायत व पिथौरागढ़ के खीम सिंह पंचायत घर में ही मिल गए। दोनों ही परिवार के साथ भरतौल में रहते हैं। बताया कि सेना की नौकरी के दौरान ही यहां बसने का फैसला कर लिया था। खीम सिंह भरतौल पूर्व सैनिक कल्याण समिति के सचिव के नाते पंचायत की गतिविधियों में प्रधान की मदद भी करते हैं। 

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भरतौल गांव - फोटो : अमर उजाला
पश्चिम बंगाल के प्रदीप देवनाथ 1998 से यहां बसे हैं। बिहार निवासी सतीश कुमार ने बताया कि उनके पिता ने नौकरी के दौरान 22 साल पहले यहां मकान बनवाया था। प्रधान और ग्रामीणों का इतना सहयोग रहता है कि वह अपने मूल घर लौटने के बारे में कभी सोचते ही नहीं। सभी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं।
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भरतौल की प्रधान प्रवेश - फोटो : अमर उजाला
भरतौल गांव इतना साफ और सुंदर है कि प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर इसे कई पुरस्कार मिल चुके हैं। रीतराम बताते हैं कि 2007 में प्रधान के तौर पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर निर्मल ग्राम पंचायत का पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से लिया था। इस ग्राम पंचायत को पंडित दीनदयाल उपाध्याय पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार भी मिला है। 
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गांव भरतौल के नाम पर हैं कई पुरस्कार - फोटो : अमर उजाला
पिछले साल गांव को मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार मिला था। सभी पुरस्कारों में करीब दस लाख रुपये की राशि मिली जो ग्राम सचिवालय व गांव को सुंदर बनाने में लगा दी गई। गांव की सड़कें साफ हैं। हर वक्त बिजली व पानी की सुविधा है।
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पूर्व विधायक भाजपा नेता पप्पू भरतौल - फोटो : अमर उजाला
बिथरी के पूर्व विधायक भाजपा नेता पप्पू भरतौल इसी गांव के मूल निवासी हैं। अपने नाम के आगे गांव का नाम लगाकर उन्होंने भी इस गांव को राजनैतिक पहचान देने का काम किया है। प्रधान ने बताया कि गांव निवासी राकेश चंद्रा पंजाब पुलिस में एडीजी हैं। गांव निवासी त्रिभुवन पायलट हैं तो अतुल चिकित्सक हैं। यहां के कई और युवा सरकारी नौकरियों में प्रतिष्ठित पदों पर हैं।
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