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दुष्कर्म के बाद जिंदा जलाया: मेमो नहीं...जान का सवाल था और खामोश रहे अधिकारी, एक-दूसरे पर बला टालते रहे अफसर

Wed, 21 Sep 2022 10:03 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
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Pilibhit case - फोटो : अमर उजाला
ये अफसरों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है कि जो जिंदगी मौत के बीच झूल रही किशोरी के बयान लेने में उनको चार दिन लग गए। अब अफसर उस मेमो को लेकर बहानेबाजी करने में लगे हैं, जो जिला अस्पताल से उनको भेजा गया था। तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक कोई यह बताने को तैयार नहीं कि आखिर वो मेमो गया कहां। माधोटांडा क्षेत्र के गांव की किशोरी को दुष्कर्म के बाद जिंदा जला दिया गया। रविवार रात ढाई बजे उसकी मौत हो गई। घटना सात सितंबर की है। उसी दिन उसे पूरनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया, जहां से शाम 5.45 बजे जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल से उसी दिन शाम 6.25 बजे किशोरी के बयान दर्ज कराने के लिए सदर तहसीलदार को मेमो भेजा गया। छानबीन में पता चला कि बाबू ने मेमो रिसीव किया। आठ और नौ को तहसीलदार का लखनऊ जाना था, लेकिन वह सात की शाम को ही निकल गए।
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Pilibhit case - फोटो : अमर उजाला
तहसील में कोई नायब तहसीलदार है नहीं। लिहाजा मेमो एसडीएम के यहां तत्काल भेजा जाना चाहिए था। लेकिन वहां भी नहीं भेजा गया। बंद लिफाफे में मेमो यूं ही पड़ा रहा। उधर, पीड़िता अस्पताल में तड़प रही थी। हद तो यह है कि दस सितंबर को तहसीलदार के लौटने के बाद भी मेमो का कोई जिक्र नहीं हुआ। 

 
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Pilibhit case - फोटो : अमर उजाला
शाम को जब अस्पताल में पीड़िता ने दुष्कर्म कर जलाने की बात कही तब एसपी अस्पताल पहुंचे। एसडीएम को जानकारी दी गई तब वह अस्पताल बयान लेने दौड़े। मामला उजागर होने पर अब अधिकारी अपने बचाव में लग गए हैं। 

 

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Pilibhit case - फोटो : अमर उजाला
तहसीलदार कह रहे हैं कि वह छुट्टी पर थे एसडीएम कह रहे है कि उनके पास मेमो आया नहीं। बताया जा रहा है कि मामला उजागर होने के बाद एक अधिकारी ने मेमो को अपने पास रख लिया है। ताकि उस पर मन मुताबिक समय डालकर या कुछ और लिखकर खुद को बचाया जा सके। 
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Pilibhit case - फोटो : अमर उजाला
पूर्व डीएम ने भी नहीं लिया संज्ञान
दुष्कर्म कर अनुसूचित जाति की किशोरी को जलाए जाने का मामला लखनऊ तक पहुंच गया था। लेकिन पूर्व डीएम पुलकित खरे ने भी यह जानने का प्रयास नहीं किया कि जब सात सितंबर को ही मेमो भेजा गया था तब बयान लेने में चार दिन क्यों लगे। डीएम महज पुलिस की एफआईआर व आरोपियों की गिरफ्तारी की रिपोर्ट भेजकर शांत हो गए। या यूं कहिए कि उन्होंने अपने अफसरों को बेहद खामोश तरीके बचा लिया। अब शासन तक मामला पहुंचा तो खलबली मची है। 

 
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गांव में तैनात पुलिस - फोटो : अमर उजाला
तत्काल होते बयान तो कुछ और होती तस्वीर 
घटना को लेकर गांव में तरह तरह की चर्चा है। वहीं लोगों में खासा आक्रोश है। बताया जा रहा है कि अगर घटना वाले दिन या दूसरे दिन ही किशोरी के बयान हो जाते तो काफी ऐसी चीजें पता चल जाती जो अभी तक प्रकाश में नहीं आई हैं। घटना क्रम के बार में विस्तार से पता चल जाता। लेकिन पूरे चार दिन लगा दिए अफसरों ने। 

 
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Pilibhit case - फोटो : अमर उजाला
मामला मेरी जानकारी में नहीं है। एसडीएम व तहसीलदार से बात करके पता लगाया जाएगा कि किसकी वजह से बयानों में देरी हुई। इस मामले की जांच कराई जाएगी।- रामसिंह गौतम, प्रभारी डीएम
 
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