उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के बीसलपुर की रामलीला का अपना अलग इतिहास है। लोग इसे सच्ची रामलीला भी कहते हैं। यहां वर्ष 1987 में लीला मंचन के दौरान रावण बने कलाकार की सच में मौत हो गई थी। इस घटना ने परंपरा को बदल दिया। तब से यहां रावण वध का मंचन दशहरा के एक दिन बाद होता है। अगर उस दिन शनिवार पड़ गया तो रावण दहन तीसरे दिन होगा। ऐतिहासिक रामलीला में नगर के मोहल्ला दुर्गाप्रसाद के एक परिवार के ही लोग रावण की भूमिका निभा रहे हैं। मेला मैदान में अयोध्या, पंचवटी, शिवकुटी, लंका और अशोक वाटिका के पक्के भवन बने हुए हैं। लीला मंचन के दौरान इन भवनों का इस्तेमाल किया जाता है।