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UP: गुजर गए 165 साल, नहीं सुधरे क्रांति स्थल के हालात, अंग्रेजों ने बागपत के 29 गांवों को घोषित कर दिया था बागी

Mon, 18 Jul 2022 04:58 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार/अमित शर्मा, अमर उजाला, बागपत
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बागपत न्यूज - फोटो : अमर उजाला
भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाने का आधारभूत बनी 1857 की प्रथम जंग-ए-आजादी के शुरू होते ही बागपत में क्रांति की मशाल जली। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई के दौरान क्रांतिकारियों के लहू से बागपत की धरती लाल हो गई थी। अंग्रेजों के खिलाफ जनपद के क्रांतिकारियों ने जमकर मुकाबला किया था। जिस कारण अंग्रेजों ने जनपद के 29 गांवों को बागी घोषित कर दिया था और क्रांतिकारियों पर खूब सितम बरपाया, लेकिन जिन स्थलों पर क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की रणनीति बनाई थी, वे आज भी 165 साल गुजर जाने के बाद सरकारी मशीनरी की अपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। क्रांति स्थल, गांव और शहीदों के शहादत स्थल गुमनामी में गुम होते नजर आ रहे हैं। 

ये स्थान हैं उपेक्षा का शिकार
बाबा शाहमल सिंह का जन्म स्थान बिजरौल गांव, तत्कालीन देश खाप के मुखिया अमर शहीद चौधरी श्यो सिंह का शहादत स्थल, बसौद गांव की जामा मस्जिद जहां 180 मुसलमान क्रांतिकारी अंग्रेजी फौज से लड़ते शहीद हुए, बाबा शाहमल का शहादत स्थल आदि अनेक स्थान सरकारी मशीनरी की उपेक्षा का शिकार बने हैं।
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पुरानी तहसील - फोटो : अमर उजाला
आज भी खंडहर है पुरानी तहसील
12 मई 1857 को बाबा शाहमल सिंह के नेतृत्व में हजारों क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकुमरानों द्वारा बनाई गई बड़ौत तहसील (जहां आज वर्तमान में पुरानी तहसील के खंडहर स्थित है) को अंग्रेजों से मुक्त कराकर आजाद घोषित कर दिया, लेकिन 165 साल गुजर जाने के बाद भी पुरानी तहसील खंडहर में तब्दील है।

 
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बाबा शाहमल - फोटो : अमर उजाला
बड़ौत क्षेत्र के सूबेदार नियुक्त हुए थे बाबा शाहमल
थांबेदार यशपाल चौधरी बिजरौल ने बताया कि तत्कालीन बागपत कोतवाल महान क्रांतिकारी वजीर खां और महताब खां के प्रस्ताव पर अंतिम मुगल बादशाह क्रांतिकारी बहादुर शाह जफर ने उस समय बाबा शाहमल सिंह को बड़ौत क्षेत्र का सूबेदार नियुक्त किया।

 

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बागपत न्यूज - फोटो : अमर उजाला
सिंचाई विभाग के डाक बंगले पर सुनते थे जनता की फरियाद
नगर के सिंचाई बंगले को बाबा शाहमल ने अपना न्यायालय बना लिया था और यही पर वे जनता की समस्याएं सुनते थे। यह बंगला 1857 की क्रांति का एक अहम हिस्सा रहा है। इसमें बाबा शाहमल समेत हजारों क्रांतिकारियों की अनगिनत यादें सिमटी हैं।

 
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baghpat - फोटो : अमर उजाला
जुल्म की कहानी बयां करता है बरगद का पेड़
बिजरौल गांव जहां अमर शहीद बाबा शाहमल का जन्म हुआ, अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने और 1857 क्रांति में हिस्सा लेने के कारण अंग्रेजों द्वारा पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया। इसको लेकर अंग्रेजी सरकार ने जुल्म की हद पार कर बिजरौल गांव को बागी करार कर यहां के 32 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर गांव के दक्षिणी छोर पर मौजूद बरगद के पेड़ पर फांसी पर लटका दिया गया था।
 
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baghpat - फोटो : अमर उजाला
29 गांवों को अंग्रेजों ने कर दिया था बागी घोषित
थांबेदार यशपाल चौधरी ने बताया कि बिजरौल, सिरसली, जौहड़ी, बासौद, फतेहपुर पुट्ठी, धनौरा, बिचपड़ी, निबौली, बिलौचपुरा, बाघु सहित 29 गांवों को बागी घोषित कर दिया था।
 
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baghpat - फोटो : अमर उजाला
बड़ौत था क्रांतिकारियों का अड्डा
थांबा चौधरी यशपाल सिंह ने बताया कि 1857 की क्रांति में बड़ौत की पट्टी चौधरान में चौ. श्योसिंह की हवेली क्रांतिकारियों का कार्यालय थी, जहां अंग्रेजों के खिलाफ योजना बनाकर अंजाम दिया जाता। बौखलाकर अंग्रेजों ने इस हवेली को नष्ट कर बड़ौत तहसील को भी खत्म कर दी थी।
 

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1857 की क्रांति - फोटो : amar ujala
पूरे देश मेें भड़क गई थी मेरठ से उठी क्रांति की चिंगारी
अमीनगर सराय। 10 मई 1857 में मेरठ से क्रांति की चिंगारी पूरे देश में भड़क गई थी। बाबा शाहमल के नेतृत्व में बसौद की जामा मस्जिद को मुख्यालय बनाया गया था। अंग्रेजों को क्रांतिकारियों की जानकारी हो गई और 17 जुलाई 1857 को अंग्रेजों ने गांव पर हमला कर दिया। अंग्रेजों ने गांव पर हमला कर 180 क्रांतिकारियों को मार दिया था। क्रांतिकारियों के खून से गांव के तालाब का पानी लाल हो गया था। इसके अलावा अंग्रेजों ने 15 क्रांतिकारियों को बरगद के पेड़ पर लटकाकर फांसी दे दी थी और गांव को आग लगा दी थी।
 
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baghpat - फोटो : अमर उजाला
बसौद में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई
अमीनगर सराय में युवा चेतना मंच बसौद के तत्वावधान में ग्रामीणों ने शहीदों को याद किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। मौके पर मंच महासचिव समीर अहमद, इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन, मा. सत्तार अहमद, ताराचंद गुप्ता, फतेह मौहम्मद, अनिल शर्मा, असर मौ., शौकत, समीर अहमद, गुलजार, पप्पू, कासिम, नवाब अली, मुरसलीन, मौफीद, बिल्लू शर्मा, जाफर नेता जी, इकबाल, फरियाद, आबिद  रामेश्वर सैनी, हाजी रशीद आदि सहित काफी युवा व ग्रामीण मौजूद रहे। वहीं आज बिजरौल गांव में भी शहादत दिवस मनाया जाएगा।
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