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Mulayam Singh Yadav: आजमगढ़ को धड़कन में बसा दुनिया से रुखसत हुए 'नेताजी', माना जाता है सपा का गढ़

Mon, 10 Oct 2022 01:27 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
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आजमगढ़ में मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
यूपी के आजमगढ़ को धड़कन में बसाकर मुलायम सिंह यादव इस दुनिया से रुखसत हो गए। उनके निधन की सूचना मिलते ही जिले में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं पार्टी के नेता जिले से लखनऊ के लिए रवाना हो गए। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने 83 साल की उम्र में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। मुलायम सिंह यादव ने लंबी सियासी पारी खेली। तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे। केंद्र में रक्षा मंत्री भी रहे।

मुलायम सिंह यादव  को बेहद साहसिक सियासी फैसलों के लिए भी जाना जाता है। उनका आजमगढ़ जनपद से बहुत गहरा नाता था। वह सैफई को दिल तो आजमगढ़ को धड़कन बताते थे। आज जब यह धड़कन ठहर गई तो आजमगढ़ जिले में सन्नाटा पसर गया है। आजमगढ़ जिले में विकास की इबादत लिखने के लिए मुलायम सिंह यादव को अनंत काल तक याद रखा जाएगा। उन्होंने पूर्वांचल में कांग्रेस के वर्चस्व को समाप्त कर आजमगढ़ को सपा का गढ़ बनाया। 
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सठियांव की नवनिर्मित चीनी मिल में मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
मुलायम सिंह यादव जब भी वह भाषण देते तो यही कहा करते थे सैफई दिल है तो आजमगढ़ धड़कन है। महज 28 साल की उम्र में विधायक बने मुलायम सिंह यादव को सियासी दुनिया में प्यार से नेताजी कहा जाता था। मुलायम सिंह यादव की जड़ें गांव से जुड़ी हुई थी। छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। राममनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा से प्रभावित हुए और पहली बार तब उन्हें लोहिया का सानिध्य मिला जब 1966 में लोहिया इटावा पहुंचे थे। 
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मुलायम सिंह यादव (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
1989 का दौर आया तो जनता पार्टी में शामिल होकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। सात बार सांसद रहे मुलायम का राजनीतिक सफर बेहद घुमावदार रहा है। 1996 में एचडी देवगौडा व इंद्र कुमार गुजराल सरकार में रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभालने वाले मुलायम सिंह यादव 1989 में पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री बने। मुलायम सिंह यादव ने चार अक्तूबर 1992 को समाजवादी पार्टी की स्थापना की थी।

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वाराणसी में शतरुद्र प्रकाश के आवास पर मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम 1967 में पहली बार विधायक बने। कांग्रेस विरोध के दौर में 1977 में मंत्री बने। वर्ष 2014 में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी और आजमगढ़ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद उन्होंने मैनपुरी सीट से इस्तीफा दे दिया। यदि विकास की बात आती है तो सबके जुबां पर मुलायम सिंह यादव का ही नाम सामने आता है। कारण कि जिले में जो भी विकास कार्य दिखाई पड़ते हैं वो उन्हीं का किया हुआ है।
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- फोटो : Amar Ujala
आजमगढ़ को कमिश्नरी का दिया दर्जा
बात 1994 की है। जब मऊ जनपद में देश के कद्दावर नेताओं में शुमार कल्पनाथ राय केंद्रीय मंत्री थे। वह मऊ को कमिश्नरी बनाना चाहते थे। लेकिन इसी बीच मुलायम सिंह यादव हेलीकॉप्टर से कमिश्नर को लेकर पहुंचे और आजमगढ़ को कमिश्नरी घोषित किया। इस प्रकार उन्होंने केंद्र सरकार के कद्दावर नेता को पटखनी दी।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
आखिरी बार सात साल पहले जनपद आए थे मुलायम
2014 में आजमगढ़ से सांसद चुने जाने के बाद मुलायम सिंह यादव जनपद नहीं आ सके। सपा की सरकार में उनके कहने पर सठियांव चीनी मिल का नवीनीकरण कर फिर उसे शुरू किया गया। 2 मार्च 2016  को सठियांव की नवनिर्मित चीनी मिल का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने सिधारी ओवरब्रिज को बनाने की घोषणा की थी। जो आज बनकर तैयार है।
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