सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुई पीड़िता किशोरी को शुक्रवार की शाम अग्रिम इलाज के लिए जिला महिला अस्पताल में वापस शिफ्ट किया गया है। अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। पीड़िता के अस्पताल में भर्ती होने के बाद यहां पर पुलिस की ओर से सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
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Ayodhya rape case
- फोटो : अमर उजाला
पूराकलंदर थाना क्षेत्र के भदरसा में सामूहिक दुष्कर्म का शिकार होने के बाद 14 साल छह माह की किशोरी गर्भवती हो गई थी। उसके गर्भ में 12 सप्ताह का भ्रूण पल रहा था। 29 जुलाई को सपा नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू खान के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था।
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इसके बाद पीड़िता को 31 जुलाई को जिला महिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। नौ माह तक शिशु को गर्भ में रखकर प्रसव कराने में अक्षम होने पर किशोरी व उसके परिजनों ने गर्भपात करने की सहमति दी तो बाल कल्याण समिति ने भी संस्तुति प्रदान की।
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गर्भपात के दौरान किशोरी की जान को भी खतरा बताया गया। जोखिमपूर्ण इलाज के लिए महिला अस्पताल में बेहतर इंतजाम नहीं थे।
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इस वजह से किशोरी को पांच अगस्त को केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया गया था। वहां उसका गर्भपात करने और डीएनए सैंपल लेने के बाद हालत में कुछ सुधार हुआ तो शुक्रवार की देर शाम करीब आठ बजे वापस जिला महिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।
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महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. विभा कुमारी ने बताया कि किशोरी की हालत अब खतरे से बाहर है। उसे प्राइवेट वार्ड में कड़ी सुरक्षा के बीच शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज व देखभाल कर रही है। वह स्वयं ही इलाज की निगरानी कर रही हैं।
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केजीएमयू लाई गई दुष्कर्म पीड़िता।
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डीएनए जांच के लिए ब्लड सैंपल भेजा लैब
सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद दोनों आरोपियों के खून का नमूना डीएनए जांच के लिए लिया गया। ब्लड सैंपल को जांच के लिए एफएसएल लैब भेज दिया गया है।
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पीड़िता को एंबुलेंस से रवाना किया गया।
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इसके पहले प्रकरण के विवेचना अधिकारी / थाना प्रभारी पूरा कलंदर देवेंद्र सिंह ने जिला कारागार में निरुद्ध दोनों अभियुक्तों के रक्त नमूना एकत्र किए जाने की अनुमति के लिए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम निरुपमा विक्रम की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था।