राम मंदिर के चढ़ावे घोटाले में एसआईटी को जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य मिला है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट की हर तीसरे माह होने वाली बैठक में मंदिर की आय और नकद दान का विवरण प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन सोने-चांदी एवं अन्य बहुमूल्य दान सामग्री की मात्रा, मूल्यांकन और उपलब्ध स्टॉक का विस्तृत ब्योरा बैठक के एजेंडे का नियमित हिस्सा नहीं था।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के मामले में आशंका है कि कुछ बड़े जिम्मेदारों ने सुबूत मिटाने की कोशिश की, जिससे जांच की आंच उन तक न पहुंच सके। साथ ही उम्मीद थी कि शायद मामला दबाकर मैनेज भी हो जाए। यही वजह है कि ट्रस्ट के पदाधिकारी संदिग्धों को पकड़कर रकम बरामद करने के बाद भी चुप्पी साधे रहे। सात दिनों तक यह सब चलता रहा, ताकि मामले में सिर्फ छोटी मछलियां फंसें। इसको लेकर कुछ अहम तथ्य सामने आए हैं।
चोरी उजागर होने के बाद ट्रस्ट ने संदिग्धों को पकड़ तो लिया था, लेकिन शिकायत नहीं की थी। यहां तक कि उनके घरों आदि में जाकर रकम भी बरामद करने में जुट गए थे। जबकि यह उनके अधिकार क्षेत्र का काम नहीं था। सात दिन बाद उन्होंने एसआईटी के गठन की मांग की थी। तब एसआईटी का गठन हुआ।
जब मामला खुला तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों की सांसें फूल गई थीं। क्योंकि उन्हें अंदाजा था कि राम मंदिर जैसे स्थान पर ऐसी घटना का होना ट्रस्ट से लेकर सरकार तक पर दाग लगाएगा। वहीं, ट्रस्ट के पदाधिकारियों को यह भी अंदाजा था कि सबसे बड़े जिम्मेदार वही ठहराए जाएंगे। इसलिए मामला दबाए रखा गया। प्रयास था कि रकम की रिकवरी कर मामला रफादफा कर दिया जाए, लेकिन ऐसा हो न सका। चोरी की बात लीक हो गई और फिर मामले ने तूल पकड़ लिया।
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राम मंदिर में प्रवेश करती एसआईटी की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राम मंदिर के चढ़ावे घोटाले में एसआईटी को जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य मिला है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट की हर तीसरे माह होने वाली बैठक में मंदिर की आय और नकद दान का विवरण प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन सोने-चांदी एवं अन्य बहुमूल्य दान सामग्री की मात्रा, मूल्यांकन और उपलब्ध स्टॉक का विस्तृत ब्योरा बैठक के एजेंडे का नियमित हिस्सा नहीं था। एसआईटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वर्षों के दौरान प्राप्त हुई बहुमूल्य दान सामग्री का समुचित लेखा-जोखा किस स्तर पर रखा गया और उसकी निगरानी की व्यवस्था क्या थी।
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अयोध्या का राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
सूत्र बताते हैं कि एसआईटी को दान से संबंधित कई रसीदें और अभिलेख मिले हैं, जिनमें श्रद्धालुओं की ओर से सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और अन्य कीमती वस्तुएं चढ़ाने का उल्लेख है। हालांकि कई वस्तुओं के संग्रह, भंडारण और अंतिम स्थिति से संबंधित रिकॉर्ड अभी तक स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। इसी वजह से जांच टीम संबंधित दस्तावेज और जिम्मेदार कर्मियों से जानकारी जुटा रही है।
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अयोध्या का राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
दान में मिली 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारत सरकार की संस्था मिंट (टकसाल) को जांच और गलाने के लिए पहले चरण में 9.44 क्विंटल (944 किलो) चांदी दी थी। राम मंदिर के लिए भक्तों की ओर से दान किए गए सोने और चांदी की गुणवत्ता और मात्रा के मूल्यांकन के लिए ट्रस्ट ने यह फैसला लिया था। चंपत राय ने कुछ महीने पहले यह जानकारी सार्वजनिक करते हुए बताया था कि दान के रूप में कुल 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना प्राप्त हुआ है।
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राम मंदिर
चढ़ावे में चोरी के मिले सुबूत
राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के सुबूत मिले हैं। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। दान राशि की गणना करने वाले कर्मियों और बैंककर्मियों के साथ चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव की भूमिका भी सामने आई है।
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राम मंदिर
इसके अलावा दान राशि की गणना प्रक्रिया का निगरानी तंत्र पूरी तरह विफल रहा। छह दिन की जांच के बाद एसआईटी शनिवार को अयोध्या से लखनऊ लौट गई। जांच रिपोर्ट सोमवार को मुख्यमंत्री के सामने पेश की जा सकती है। इसके बाद दोषियों और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। टिन्नू, गणनाकर्मियों और कुछ बैंककर्मियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है। शासन के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के पदाधिकारियों के जिला छोड़ने पर रोक लगा दी गई है।
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अयोध्या के राम मंदिर की तस्वीर
- फोटो : ANI Photos
एसआईटी (विशेष जांच दल) की प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिससे महासचिव चंपत राय भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। चढ़ाए गए जेवरात में बड़ी गड़बड़ी पाए जाने की बात सामने आई है। सोने, चांदी और हीरे जड़ित जेवरात का हिसाब-किताब ट्रस्ट के पदाधिकारी नहीं दे सके। एसआईटी ने करोड़ों की कीमत के जेवरात के हेरफेर की आशंका जताई है। छह जून को राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मामला सामने आया था।
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक हफ्ते बाद 13 जून को ट्रस्ट ने एसआईटी से जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री से की। उसी दिन मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया। 15 जून को एसआईटी अयोध्या पहुंची थी।
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसआईटी में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज आईजी किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने मंदिर परिसर पहुंचकर तफ्तीश की। इस दौरान ट्रस्ट के पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों, गणना कर्मियों और संदिग्धों से लंबी पूछताछ की।
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सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की जांच में दान राशि की लंबे समय से चोरी की पुष्टि हुई है। हालांकि अभी तक एसआईटी या शासन की तरफ से जांच रिपोर्ट को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। शासन के सूत्रों के मुताबिक एसआईटी अब तक की जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटी है।
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- फोटो : सांकेतिक
सीसीटीवी से भी मिले अहम साक्ष्य
एसआईटी को सीसीटीवी फुटेज से रकम पार किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए जाने के भी संकेत हैं। इस तथ्य को एसआईटी ने जांच में प्रमुखता से दर्ज किया है। इसमें लापरवाही और साजिश दोनों पहलुओं की जांच की गई है।
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- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
40 फीसदी कमीशनखोरी की भी खुली पोल
ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर मंदिर निर्माण और अन्य मामलों में कमीशनखोरी के भी आरोप लगे हैं। राम मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी से जुड़े रहे सेवानिवृत्त इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने शुक्रवार को ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र पर आरोप लगाते हुए दावा किया था कि राम मंदिर परिसर से जुड़े कार्यालय निर्माण के दौरान एल्युमिनियम कार्यों के एक ठेकेदार से कथित रूप से 40 प्रतिशत कमीशन की मांग की गई थी।
इसी उद्देश्य से कार्य का बिल भी 40 प्रतिशत तक बढ़ाकर तैयार कराया गया। उन्होंने इस मामले पर आपत्ति जताई थी और इसकी जानकारी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को भी दी थी। उनका दावा है कि उन्होंने कथित बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग भी सुनाई थी, लेकिन बाद में उन्हें ही कार्य से अलग कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी जांच के दौरान इंजीनियर दीनानाथ समेत अन्य गवाहों ने भी एसआईटी को मामले से जुड़े कुछ साक्ष्य सौंपे हैं, जिनमें 40 फीसदी तक कमीशन लेने की बात सामने आई है।