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प्रयागराज में बाढ़ से बिगड़ेंगे हालात, सेना से मांगी मदद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Updated Tue, 17 Sep 2019 12:10 AM IST
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flood in prayagraj 2019 - फोटो : प्रयागराज
बाढ़ से जूझ रही संगमनगरी पर संकट और गहराने वाला है। राजस्थान के कोटा व धौलपुर बैराज से सोमवार को 25 लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया। पहले से ही खतरे के निशान के करीब पहुंच चुकी गंगा-यमुना में जब तीन दिन बाद यह पानी पहुंचेगा तो तटवर्ती इलाकों में आई बाढ़ का दायरा और बढ़ सकता है। आशंका जताई जा रही है कि शहर के कुछ और हिस्से भी बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। मंडलायुक्त आशीष कुमार गोयल ने जिला प्रशासन को हालात से निबटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। बाढ़ के खतरे से निबटने के लिए जिला प्रशासन ने सेना की मदद मांगी है। 



लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण गंगा-यमुना अब किसी भी समय खतरे का निशान पार कर सकती हैं। हालांकि सोमवार को गंगा एक सेमी और यमुना के दो सेमी प्रति घंटा बढ़ने से थोड़ी राहत महसूस की जा रही थी, लेकिन दोपहर बाद सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम से जारी बुलेटिन में चंबल का 16 लाख क्यूसेक पानी यमुना में छोड़े जाने की जानकारी दी गई। तीन दिन के बाद जब यह पानी यहां पहुंचेगा तो यमुना का जलस्तर 86 से 87 मीटर तक जा सकता है, जो खतरे के निशान से दो मीटर से अधिक है। शाम पांच बजे बाढ़ खंड ने यमुना में अलग-अलग बांधों से 25 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने का बुलेटिन जारी किया।

जिसमें बताया गया कि राजस्थान के धौलपुर बैराज से 18.93 लाख 567 क्यूसेक और कोटा बैराज से 6.66 लाख, 758 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया है। ऐसा अनुमान है कि इस पानी के यहां आने के बाद गंगा-यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी होगी, जिससे बाढ़ का पानी तटवर्ती इलाकों को पारकर शहर में घुस सकता है। मंडलायुक्त की ओर से डीएम व एसएसपी को हालात से निबटने के लिए तैयार रहने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। मंडलायुक्त ने डीएम से कहा है कि बाढ़ की आशंका को देखते हुए सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। 

चंबल नदी में आई बाढ़ के बाद राजस्थान के बांधों से यमुना में छोड़ी गई भारी जलराशि 19 सितंबर को यहां पहुंच सकती है। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के एक्सईएन बृजेश सिंह ने बताया कि कोटा और धौलपुर से छोड़े गए पानी पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रशासन के संपर्क में अभियंता बने हुए हैं, ताकि किसी भी तरह की स्थिति से निबटा जा सके। तीन दिन बाद यमुना में बाढ़ से पैदा होने वाले हालात से निबटने के लिए प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। 

गंगा का जल स्तर रात आठ बजे
फाफामऊ - 84.48मीटर
छतनाग - 83.78 मीटर

यमुना का जल स्तर
नैनी-84.40 मीटर

खतरे का निशान-84.73 मीटर
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flood in prayagraj 2019 - फोटो : प्रयागराज
फाफामऊ, झूंसी में बिगड़े हालात
प्रयागराज। बाढ़ से फाफामऊ व झूंसी में हालात और बिगड़ गए हैं। फाफामऊ में कुंभ मेले में करोड़ों की लागत से बनाई गई डबल रोड बाढ़ के पानी के दबाव के कारण धंस गईं। इलाके के पांच दर्जन घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। वहीं झूंसी कोहना और नई झूंसी के तटवर्ती एक दर्जन घरों में सोमवार को पानी घुस गया। कछारी गांव बदरा-सोनौटी मार्ग पिछले तीन दिनों से बाढ़ की चपेट में है। तभी से तकरीबन बीस हजार की आबादी वाले एक दर्जन गांवों का संपर्क टूटा हुआ है। इनमें से आधा दर्जन गांव तो टापू में तब्दील हो गए हैं। 

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flood in prayagraj 2019 - फोटो : प्रयागराज
छतों पर गृहस्थी, हजारों लोगों ने फिर घर छोड़ा
प्रयागराज। खतरे के निशान के करीब पहुंचे गंगा-यमुना के जलस्तर ने अब तक तटवर्ती इलाके की दो से ढाई लाख की आबादी को चपेट में ले लिया है। सोमवार को कछारी इलाके की बस्तियों की गलियों-घरों में बाढ़ का पानी घुस गया। शहर के दारागंज, छोटा बघाड़ा, बेली कछार, नेवादा, द्रोपदी घाट, सलोरी, गंगा नगर समेत अन्य बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में सोमवार को हालात और बिगड़ गए। नालियों के सहारे मोहल्ले की संकरी गलियों तक पहुंचा पानी रात में घरों के आंगन और किचन तक फैल गया। राजापुर, गंगा नगर समेत अन्य कछारी इलाकों में देर रात तक लोग सामान समेट कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते रहे। छोटा बघाड़ा, सलोरी में स्थिति सबसे ज्यादा विकराल रही।

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मुआवजा न मिलने से नाराज ग्रामीणों ने किया चक्का जाम
मांडा। गंगा मेंकटान के चलते मकान गंवाने वाले ग्रामीणों ने सोमवार को प्रयागराज-मिर्जापुर राजमार्ग के दिघिया बाजार में चक्काजाम कर दिया। थाना क्षेत्र के नरवर चौकठा, उमापुर कलां, महेवा कलां, डेगूरपुर आदि गांव गंगा के किनारे पर बसे हैं। गंगा में कटान के चलते नरवर चौकठा व उमापुर गांव के दर्जनों परिवारों के मकान गंगा की कटान की भेंट चढ़ गए। मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को एसडीएम को ज्ञापन दिया था। लेकिन मांग पूरी न होने पर ग्रामीणों ने सोमवार को देर शाम एक घंटे राजमार्ग जाम कर दिया। दिघिया प्रधान प्रतिनिधि राम मिश्र के हस्तक्षेप पर ग्रामीण शांत हुए। एसडीएम मेजा दयाशंकर पाठक व सीओ मेजा सही राम के पहुंचने और मुआवजा देने के आश्वासन पर जाम खत्म हुआ।

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छतों पर गृहस्थी, हजारों लोगों ने फिर घर छोड़ा 
प्रयागराज। खतरे के निशान के करीब पहुंचे गंगा-यमुना के जलस्तर ने अब तक तटवर्ती इलाके की दो से ढ़ाई लाख की आबादी को चपेट में ले लिया है। सोमवार को कछारी इलाके की बस्तियों की गलियों -घरों में बाढ़ का पानी घुसता गया और लोग अनाज, बर्तन बिस्तर समेट कर सुरक्षित स्थानों की ओर निकलते रहे। नावों की मदद से बाढ़ के पानी से घिरे घरों से लोगों केसामान निकाले जाते रहे। ग्राउंड फ्लोर पर पानी आने के बाद लोगों ने पहली या दूसरी मंजिल पर शरण ली। हजारों की तादाद में ोग रिश्तेदारों के यहां या फिर राहत शिविरों में पहुंच गए। शहर के दारागंज, छोटा बघाड़ा, बेली कछार, नेवादा, द्रोपदी घाट, सलोरी, गंगा नगर समेत अन्य बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में सोमवार को हालात और बिगड़ गए। नालियों के सहारे मोहल्ले की संकरी गलियों तक पहुंचा पानी रात में घरों के आंगन और किचन तक फैल गया। राजापुर, गंगा नगर समेत अन्य कछारी इलाकों में देर रात तक लोग सामान समेट कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते रहे। छोटा बघाड़ा, सलोरी में स्थिति सबसे ज्यादा विकराल रही।

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बाढ़ग्रस्त मोहल्लों के अभिभावकों की स्कूल बंद करने की मांग
प्रयागराज। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों रह रहे अभिभावकों ने जिलाधिकारी से स्कूल, कॉलेज कुछ दिन बंद करने की मांग की है। बेली क्षेत्र के एक अभिभावक हरीश चंद्र शर्मा ने मांग की है कि उनकी बेटी सिविल लाइंस के एक विद्यालय में ग्यारहवीं में पढ़ती है, मोहल्ले में पानी भरा होने के चलते वह स्कूल नहीं जा रही है। हम लोग घर के छत पर ही रह रहे हैं, इसी बीच विद्यालय में अर्द्घ वार्षिक परीक्षा होने वाली है, इससे बेटी बहुत परेशान है। उन्होंने शहर के सभी स्कूल बंद कराने की मांग की है। इसी प्रकार की मांग शहर के बघाड़ा, सलोरी, राजापुर सहित अन्य मोहल्लों में रहने वाले अभिभावकों ने की है। इस बारे में जिला विद्यालय निरीक्षक का कहना है कि उच्चाधिकारियों का निर्देश मिलने के बाद विद्यालयों के बारे में निर्णय लिया जाएगा। 

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गंगा-यमुना के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए छह एसटीपी के नालों से जुड़े सभी लोवर गेट सोमवार को बंद कर दिए गए। यमुना के उफान पर आने के बाद चाचर नाला का गेट भी बंद कर दिया गया है। ऐसे में बारिश होने पर शहर में जलजमाव के कारण शहरियों की मुुश्किलें बढ़ सकती हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने बक्शी बांध के साथ राजापुर, सलोरी, कोड़रा, नैनी में एसटीपी बंद कर दी हैं। यहां नदियों का पानी डिस्चार्ज पाइप के ऊपर नदियों का पानी बह रहा है। वहीं नैनी पार्ट टू और सलोरी में एसटीपी का एक हिस्सा फिलहाल चलाया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि सीवर का पानी बिना शोधित किए पंपों के सहारे नदियों में छोड़ा जा रहा है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक पीके अग्रवाल के मुताबिक सभी एसटीपी पर कर्मचारियों की तैनाती कर हर घंटे मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि बक्शी बांध एसटीपी के बारे में विशेष एहतियात बरती जा रही है। 

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जलकल विभाग ने बंद किए पंपिंग स्टेशनों के गेट, 40 पंप लगाए
जलकल विभाग ने सभी पंपिंग स्टेशनों के गेट बंद कर दिए हैं। चाचर नाला गेट बंद कर वहां पंप से पानी निकाला जा रहा है। जलकल विभाग के महाप्रबंधक रतन लाल के मुताबिक बारिश होने की दशा में जलभराव न हो इसके लिए 40 पंप लगाए गए हैं। अभी यमुना बैंक रोड के दो फाटक नहीं बंद किए गए हैं। 

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जलस्तर बढ़ने के साथ ही रेल पुलों पर कम कर दी ट्रेनों की स्पीड
नैनी यमुना पुल की मॉनीटरिंग के लिए एनसीआर ने तैनात कर दिए रेल कर्मचारी 
प्रयागराज। गंगा और यमुना में बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए रेलवे ने इन दोनों नदियों पर बने पुलों पर ट्रेनों की स्पीड कम कर दी है। उत्तर रेलवे ने फाफामऊ और पूर्वोत्तर रेलवे ने झूंसी रेल पुल पर काशन लगा दिया है। इन दोनों ही पुलों पर ट्रेनों की अधिकतम गति घटाकर 30 किमी प्रतिघंटा कर दी गई है। उधर एनसीआर प्रशासन ने भी नैनी यमुना ब्रिज की मॉनीटरिंग शुरू कर दी है। हालांकि नैनी पुल पर अभी उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन की ओर से काशन नहीं लगाया है, लेकिन वहां कर्मचारियों की एक टीम जरूर तैनात कर दी गई है। रेलवे अफसरों का कहना है कि नैनी पुल पर अभी ट्रेनों की अधिकतम गति 75 किमी प्रतिघंटा है। अगर यमुना नदी खतरे का निशान पार करती है तो यहां अधिकतम गति 50 से कम कर दी जाएगी। इस बारे में सीपीआरओ अजीत कुमार सिंह का कहना है कि पुल पर तैनात कर्मचारी हर घंटे कंट्रोल रूम को अपडेट दे रहे हैं। 

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सभी बाढ़ चौकियां सक्रिय, बुलाई गई एनडीआरएफ की टीम
लोगाें को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की कवायद शुरू, सभी एसडीएम को निर्देश, हर आधा घंटा में मांगी जा रही रिपोर्ट
प्रयागराज। प्रशासन की ओर से बाढ़ को लेकर हाईएलर्ट जारी किया गया है। सिंचाई विभाग से जल स्तर को लेकर हर आधा घंटे में रिपोर्ट मांगी जा रही है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कवायद शुरू कर दी गई है। सेना को हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार कर दिया गया है। इस बाबत सेना को पत्र लिखा गया है। सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दी गई हैं। साथ में एनडीआरएफ की अतिरिक्त टीम बुलाई गई है। एक टीम मंगलवार को पहुंच भी जाएगी।

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राजस्थान, मध्य प्रदेश में अलग-अलग नदियों में छोड़ा गया पानी यहां तीन दिन में पहुंचेगा। हालांकि जगह-जगह पानी नहरों में डायवर्ट किया जा रहा है। ऐसे में यहां कितना पानी पहुंचेगा यह मंगलवार को स्पष्ट हो पाएगा। हालांकि प्रशासन ने 2013 में आए बाढ़ को ध्यान में रखकर तैयारी कर रखी है। सभी एसडीएम को एलर्ट जारी किया गया है। अभी पांच बाढ़ चौकियों में लोग ठहराए जा रहे हैं। अन्य सभी 92 बाढ़ चौकियों तथा उनमें उपलब्ध संसाधनों की बाबत भी रिपोर्ट मांगी गई है। डीएम की अध्यक्षता में रात में हुई बैठक में सभी विभागों को जरूरी निर्देश जारी किए गए। चौकियों में रहने, भोजन, पानी, बिजली, शौचालय, दवा आदि की व्यवस्था के निर्देश दिए गए। लोगों को भी बाढ़ के प्रति आगाह किया जा रहा है।

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प्रभावित क्षेत्र से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। इसके लिए प्रशासन की ओर से तीन दर्जन से अधिक नावें लगाई गई हैं। और नावों के इंतजाम के लिए एसडीएम सदर से कहा गया है। डीएम भानुचंद्र गोस्वामी का कहना है कि सेना से तैयार रहने के लिए कहा गया है। सिंचाई विभाग से समय-समय पर पूरी रिपोर्ट मांगी जा रही है। अन्य सभी इंतजाम भी किए गए हैं। डीएम वित्त एवं राजस्व मार्तंड प्रताप सिंह का कहना है कि एसडीएम तथा अन्य अफसरों को फील्ड में रहने के लिए कहा गया है। सभी संबंधित विभागों की अलग-अलग टीम बनाई गई है। बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी की है।

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 फूलपुर की सांसद केशरी देवी पटेल ने सोमवार को जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए बाढ़ राहत शिविर का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने शिविर में शरण लिए लोगों से बातचीत कर उनका कुशलक्षेम लिया। कहा कि संकट की इस घड़ी में वह सबके साथ हैं। सलोरी में निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों ने सलोरी से नागवासुकि मंदिर नया बांध बनवाने की मांग सांसद से की। इस पर सांसद ने कहा कि उनका  पूरा प्रयास रहेगा कि यहां नया बांध बने। सांसद केशरी देवी सबसे पहले कैंटोमेंट स्कूल पहुंची। वहां शरण लिए लोगों से मिलने के बाद वे विवेकानंद हाईस्कूल नेवादा, ऋषिकुल विद्यालय सर्कुलर रोड, एनी बेसेंट गर्ल्स इंटर कालेज शिविर में गई। वहां तैनात कर्मचारियों से कहा कि शिविर में रह रहे लोगों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। बाढ़ पीड़ितों के लिए यह संकट का समय है। सांसद ने एसडीएम सदर से वार्ता कर सभी जगह चिकित्सीय व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया। सांसद सलोरी भी गई। वहां बाढ़ की विभीषिका में डूबे मकानों को देखा। वहां मौजूद लोगों ने सलोरी से नाग वासुकी तक नया बांध बनवाने की मांग की। सांसद ने नगर आयुक्त से वार्ता कर मवेशियों को सड़क से ना पकड़ने के संबंध में बात की। इस अवसर पर अरुण अग्रवाल ,सुधीर सिंह, सांसद मीडिया प्रभारी पवन श्रीवास्तव, पुष्पराज सिंह पटेल ,संगीता गोस्वामी, विजय पटेल, संदीप चौहान, चंद्रिका पटेल आदि मौजूद रहे। 

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गंगा-यमुना का हर घंटे बढ़ रहा जलस्तर लोगों की दुश्वारियां बढ़ा रहा है। कछारी मोहल्लों के 3000 से अधिक घरों के भूतल पर पानी पहुंच गया है। बाढ़ के कहर से हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। नदी के किनारे रहने वाले रतजगा कर रहे हैं। प्रभावित मोहल्लों में बिजली कटौती से लोगों को पानी भी नहीं मिल रहा है। बुजुर्गों का इलाज कराना और बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो रहा है। राजापुर,गऊघाट, द्रौपदी घाट में भी हाहाकार मचा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में सोमवार को भी संभावित खतरा भांपते हुए लोगों ने गृहस्थी का सामान समेटा। जहां पानी घुसा वहां से कोई नाव और जहां पानी पहुंचने की आशंका है, वहां से ई रिक्शा और ट्राली से सामान ढोया गया। प्रभावित इलाकों में हर दूसरे मकान की छत पर लोगों ने छतों पर डेरा जमा लिया है। प्रभावित इलाकों में दिन भर नावें चलती रहीं। दिन में जिनके दरवाजे पानी पहुंचा, उन लोगों ने किसी तरह सामान समेटा। परेशान लोग घर में मच्छर हांकते और बाहर पानी ढोकर लाते दिखे। जिनका खुद का मकान था, वह दूसरी मंजिल या छत पर गए और किराए पर रहने वालों ने दोस्तों, रिश्तेदारों के घर शरण ली। 

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पुराना गऊघाट बाढ़ के पानी से घिरा है। रविवार रात यहां पुराने यमुना पुल के नीचे और बगल गऊघाट सीढ़ी, ईसीसी के पीछे बने 24 मकानों में यमुना जल पहुंच गया। प्रभावित लोगों में कुलवंत, डब्बू, सुखवट, दिनेश, जितेंद्र गुप्ता, अनिल, सचिन शर्मा आदि ने छत पर डेरा जमाया है। डब्बू बोले, गनीमत है कि बारिश नहीं हुई अन्यथा मुश्किल बढ़ जाती। यहां आसपड़ोस में रहने वालों में भी बाढ़ की दहशत है। बढ़ते जलस्तर से चिंताएं बढ़ी हैं। लोगों की परेशानी बिजली काट देने से बढ़ी है। नल पानी में डूबे हैं और पीने के लिए लोग बाहर से बाल्टियों में पानी भरकर ला रहे हैं। पानी मे गिरी सिमरन, नाविकों ने बचाया गऊघाट में बाढ़ प्रभावित कुलवंत के छह वर्षीय बेटी सोमवार शाम छत से नीचे यमुना जल में गिर गई। यह देख घर वालों के साथ अन्य लोग शोर मचाने लगे। तभी पड़ोस में रहने वाले नाविकों ने उसे पानी से निकाला। यहां करीब ढाई फीट पानी लगा है। पानी में गिरी सिमरन को खरोंच तक नहीं आई। उसे कुलवंत उठाकर फिर छत पर ले गए। 

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गऊघाट में कछार में रहने वाले 50 परिवारों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। जलस्तर बढ़ने की रफ्तार बनी रही तो मंगलवार सुबह तक 50 और घर बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। यहां लोगों ने नीचे के कमरे खाली कर गृहस्थी समेट ली है। गऊघाट बालू मंडी के मुहाने तक पहुंचीं यमुना से रेत को बचाने के इंतजाम कारोबारियों ने शुरू कर दिए हैं। पुराने पुल के पास से मौजगिरि मंदिर तक कई व्यापारियों ने टीन लगा दी हैं। मजदूरों के साथ जेसीबी से बालू को बगल कराया जा रहा है। 

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छोटा बघाड़ा, ढरहरिया में नालियों से घरों में घुसा पानी
छोटा बघाड़ा और ढरहरिया इलाके में 24 घंटे में ही पीड़ितों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई। रविवार तक बाढ़ प्रभावितों को देखकर तैयारी करने वाले तो बचे लेकिन कई ऐसे रहे जिन्हें हड़बड़ी में सामान हटाना पड़ा। पाल चौराहे के निकट कृष्णा नगर में लक्ष्मी डिजिटल लाइब्रेरी के पास भीड़ इस कदर जुट रही हैं कि लोगों को सामान हटाने में दिक्कत हो रही है। अविनाश दुबे, प्रेम प्रकाश बोले, वह घर छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। उन्होंने बताया कि दूसरी मंजिल और छत पर रहने के इंतजाम कर लिए हैं। इन मोहल्लों मे रहने वाली पानकली, राधादेवी, वंशराजी, रिजवान, बहादुर, मनोज शर्मा, अशोक आदि ने घर छोड़कर एनी बेसेंट बाढ़ राहत शिविर में शरण ली है। 

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छात्रों ने छोड़ दिया लॉज
छोटा बघाड़ा, सलोरी, राजापुर में रहने वाले उन छात्रों ने लॉज का कमरा छोड़ दिया है, जो बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। दीपक के मुताबिक यहां न बिजली है और न ही पानी मिल रहा है। ऐसे में भूखा प्यासा रहने से अच्छा है कि दोस्तों के कमरे में दो चार दिन रह लें। छात्रों ने दूसरी मंजिल पर रहने वाले साथियों या मकान मालिकों के यहां किताबें और जरूरी सामान रखवा दिए हैं। छात्रों में सूरज, वीरेंद्र, संदीप, हसन, राजदीप, संजय सिंह, रमित आदि ने भी कमरों में पानी घुसने के बाद सामान समेट लिया है। ऐसे छात्रों की संख्या अधिक रही जो खाने-पीने के साथ किताबों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंतित दिखे। अविनाश, राजेश, प्रेम प्रकाश आदि ने बताया कि पानी अभी उनके घर से दूर हैं। अभी हालात पर नजर रख रहे हैं। जैसी स्थिति होगी, निर्णय लेंगे। 

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दारागंज, बघाड़ा, सलोरी में सड़क पर पानी से परेशानी
बाढ़ प्रभावित छोटा बघाड़ा इलाके में बांध के नीचे बनी सड़क पर रहने वालों के घरों में पानी पहुंच गया है। मंदिरों और मठों में तो व्यवस्था है, लेकिन परेशान लोगों ने छत पर ठिकाना बनाया है। कई सड़कों और गलियों में पानी लगा है। पुरोहित पवन शुक्ला के मुताबिक अभी बाढ़ का पानी उनके घर दूर है, लेकिन प्रभावित रामराज, हरिकिशन आदि उनके यहां आकर रह रहे हैं। इसी तरह सलोरी और द्रौपदी घाट के साथ छोटा बघाड़ा इलाके में बाढ़ में फंसे लोगों तक स्थानीय लोगों से ही राहत मिली है।सलोरी के राधाकांत, पंडितजी, राघव, सुरेशकांत, पप्पू आदि ने छत पर ठिकाना बनाया है। वहीं रामू, छीता देवी, राधिका, महेंद्र आदि ने रिश्तेदारों के घर शरण ली है। 

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सलोरी, द्रौपदी घाट, दारागंज में जानवर बने आफत
 सलोरी, द्रौपदी घाट, दारागंज में पालतू जानवर आफत बने हैं। इन मोहल्लों में अधिकांश पशुपालक हैं।बाढ़ प्रभावित इलाकों में छुट्टा जानवर इस वक्त बड़ी परेशानी बने हैं। कछार में पानी भरने से जानवरों को दुहने के बाद छोड़ने से सड़कों पर उनके झुंड आफत बने हैं। पशुपालकों की दिक्कत बड़ी है, वह अपने मवेशी कहां ले जाएं, इस पर अनिर्णय की स्थिति है। 

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और बिगड़ गए हालात
शहर के दारागंज, छोटा बघाड़ा, बेली कछार, नेवादा, द्रौपदी घाट, सलोरी, गंगा नगर समेत अन्य बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में सोमवार को हालात और बिगड़ गए। नालियों के सहारे मोहल्ले की संकरी गलियों तक पहुंचा पानी रात में घरों की फर्श पर लगा। राजापुर समेत अन्य कछारी इलाकों में रहने वालों में बाढ़ की दहशत साफ दिखी। छोटा बघाड़ा, सलोरी में स्थिति सबसे ज्यादा विकराल रही। राजापुर में रहने वाले अनंतराम कुशवाहा के मुताबिक अभी घर नहीं छोड़ेंगे, फिलहाल दूसरी मंजिल पर रहेंगे। पानी दो फीट से ज्यादा लगा तब कहीं जाएंगे। वहीं संजय, आनंद, स्वीटी आदि ने सामान समेटकर परिचितों और दोस्तों के घर रहने का निर्णय लिया है। वे मंगलवार सुबह घर से पलायन करेंगे। बक्शी बांध के नीचे गंगा जल से लबालब इलाके में दर्जनों घरों के निचले तल के कमरों पर चार फीट तक पानी लगा। अधिकांश ने घर छोड़ दिया पर कुछ ने छत पर ही ठिकाना बनाया है।

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शहर के कछारी इलाकों में रहने वाले सोमवार तीसरे दिन रतजगा करेंगे। दिन से बाढ़ का बढ़ता पानी देखते हैं और रात में जानकारी लेते रहते हैं। लगभग हर लोग अपने-अपने परिचितों से जलस्तर का हाल पूछते रहे। जिन लोगों के पास कंट्रोल रूम का नंबर रहा, वे हर घंटे वहां के बेसिक फोन पर कॉल करते रहे। बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग बिजली गुल होने के साथ पीने के पानी के लिए भटक रहे हैं। मोहल्लों के आरओ प्लांटों को जनरेटर से चलाया गया। दिन भर पानी की बोतल भराने वालों की भीड़ जुटी रही। कई ऐसे भी रहे, जो बोतल बंद पानी पहले छीनझपटी करते दिखे। हालांकि आरओ का पानी बेचने वाले उन्हीं लोगों को बोतल दे रहे हैं, जो जमानत राशि जमा करा रहे हैं। नियमित ग्राहकों को भी बोतल बंद पानी खुद ही ढोकर ले जाना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में पेयजल के लिए हायतौबा मची रही।
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