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प्रयागराजः गंगा-यमुना का गुस्सा शांत होने की ओर, बाढ़ग्रस्त इलाकों की नींव हिली

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Updated Sat, 21 Sep 2019 01:56 AM IST
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
एमपी, राजस्थान या उत्तराखंड में भारी बारिश नहीं हुई या फिर बांधों से बड़ी जलराशि नहीं छोड़ी गई तो अगले 24 घंटे में गंगा-यमुना में बढ़ते बाढ़ के खतरे पर लगाम लग सकती है। शुक्रवार को फिलहाल केन बेतवा या फिर चंबल के बांधों से पानी न छोड़े जाने की वजह से थोड़ी राहत महसूस की गई। कुछ जगहों पर यमुना के घटने से ऊपर से प्रवाह कमजोर होने लगा है। देर शाम जलस्तर के ट्रेंड के अनुसार शनिवार तक यहां भी गंगा-यमुना के स्थिर होने का अनुमान है।

संगमनगरी में रात आठ बजे गंगा खतरे के निशान से करीब 0.84 मीटर और यमुना 0.83 मीटर ऊपर बहती रही। शुक्रवार को दोनों नदियों के जलस्तर के ट्रेंड में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। फाफामऊ में गंगा भोर तक 1.50 सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रही थी, जबकि सुबह इस जगह जलस्तर में वृद्धि की दर दो सेमी प्रति घंटा रिकार्ड की गई। इसी तरह दोपहर 12 बजे के बाद गंगा की रफ्तार घट कर एक सेमी प्रति घंटा पर आ गई।

इसी तरह छतनाग में भी गंगा दो सेमी से घटकर एक सेमी प्रति घंटा की रफ्तार पर आ गई। जबकि यमुना में भी 24 घंटे के भीतर कई बार उतार-चढ़ाव आता रहा। बृहस्पतिवार को यमुना जहां एक और डेढ़ सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रही थी वहीं शुक्रवार को दिन भर सो सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से वृद्धि जारी रही। सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड के अभियंताओं के अनुसार दोपहर से हमीरपुर में चार सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से जलस्तर घटने लगा है।
फिलहाल गंगा-यमुना के रौद्र रूप से तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का संकट गहराया हुआ है। शुक्रवार को गंगा-यमुना के तटवर्ती चार दर्जन से अधिक नए मुहल्लों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। इससे दिन भर गृहस्थी बचाने को लेकर अफरा तफरी मची रही।
 

गंगा का जलस्तर रात 12 बजे अपडेट
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फाफामऊ -85.63 मीटर
छतनाग -  84.90 मीटर
यमुना का जलस्तर
नैनी - 85.10 मीटर
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खतरे का निशान- 84.73 मीटर
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
बाढ़ के साथ गंगा यमुना की लहरें मकानों के लिए काल साबित  हो रही हैं।  तेज हवा के साथ नदियों में उठ रही ऊंची लहरें निचले इलाकों के मकानों से टकरा रही हैं। इस वजह से बाढ़ से प्रभावित कई मोहल्लों के मकानों में दरार आनी शुरू हो गई है। बघाड़ा में शुक्रवार को एक निर्माणाधीन मकान की दीवार गंगा की लहरों में समा  गई। उधर सलोरी के कैलाशपुरी इलाके में भी शुक्रवार भोर एक मकान की बाउंड्रीवाल गिरने से हड़कंप मच गया। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित शहर के तमाम मोहल्लों में पानी से घिरे मकानों में दरार आनी शुरू हो गई। इससे भवन स्वामी खासे परेशान है। बाढ़ की भयावहता की वजह से लोग भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्द यह पानी  उतर जाए। 

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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
कछारी इलाके लबालब होने के बाद बाढ़ का पानी लगातार घनी  बस्ती वाले मोहल्लों की ओर  बढ़ रहा है। इसके साइड इफेक्ट भी दिखने शुरू हो  गए हैं। गंगा  यमुना की तेज थपेड़े लगातार मकान सह रहे हैं। इस वजह से तमाम मकानों में दरार आनी शुरू हो गई है। गोविंदपुर, चांदपुर गांव, सलोरी, भुलई का पुरा, राजापुर कछार आदि इलाकों में बने दो दर्जन से  ज्यादा मकानों में प्लास्टर हटने के साथ ईंटों के बीच लगा सीमेंट बालू का मसाला भी हटने लगा है। इसकी वजह से घरों की दीवारें भी कमजोर होने लगी हैं।

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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
इस बीच बाढ़ के पानी से घिरे मकान में अब भी सैकड़ों की संख्या में लोग रह रहे हैं। एनडीआरएफ की टीम इन लोगों को बाहर निकालने का प्रयास कर रही हैं लेकिन तमाम लोग अब भी अपने घर से बाहर निकलने को तैयार नहीं है। इनमें से कुछ मकान ऐसे भी हैं जिसमें दरार दिखाई पड़ रही है। सलोरी के रविंद्र सिंह, प्रेमलता गुप्ता ने बताया कि उनके तमाम परिचित लोग घर में चोरी न हो इस वजह से उसे खाली करने से कतरा रहे हैं। हर रोज खाना, पानी आदि नाव के माध्यम से संबंधित घरों में रह रहे लोगों को भेजा जा रहा है। एनडीआरएफ सौरभ कुमार ने बताया कि संबंधित घरों से लोग निकलने को तैयार नहीं हो रहें हैं, जबकि उनसे बार-बार घर छोड़ने के लिए आग्रह किया जा रहा है।

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बाढ़ की वजह से शहर के सैकड़ों मकान जलमग्न हो गए हैं। दर्जनों मकान ऐसे हैं जिनका एक-एक तल पानी में डूब गया है। घर में रखे फर्नीचर, बिस्तर आदि भी बाढ़ की वजह से नष्ट हो गए हैं। बघाड़ा के प्रतियोगी छात्र अखिलेश्वर मिश्र ने बताया कि दो दिन पहले आनन फानन में उन्हें बाढ़ के पानी की वजह से लॉज छोड़नी पड़ी। जरूरी किताबें और कुछ कपड़े ही वे साथ लेकर आए। बाकी सामान घर में ही रह गया। अब संबंधित लॉज का एक तल पानी में डूब गया है। रूम में कपड़े, बिस्तर आदि निश्चित ही नष्ट हो गए होेंगे।

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राजापुर कछार में रहने वाली सरोज ने बताया कि घर से जरूरी चीज ही लेकर वे राहत शिविर आई थी। टीवी, फ्रिज आदि को बेड के ऊपर रख दिया था। लेकिन अब दस फीट से  ज्यादा पानी भर जाने से निश्चित ही टीवी, फ्रिज खराब हो गए होंगे। भाजपा नेता रितेश मिश्र ने बताया कि सैकड़ों की संख्या में मकान पानी में डूबे हुए हैं। अधिकांश मकानों में लोगों का समान रखा है। ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि लोगों को करोड़ों रुपये नुकसान अब तक हो गया होगा। अगर एक मकान की औसत कीमत दस से 15 लाख भी मानी जाए तो बाढ़ की वजह से उसका दस से बीस फीसदी हिस्सा खराब होना तय है। अब बाढ़ का पानी घटने के बाद ही नुकसान कितना हुआ उसका वास्तवितक आंकड़ा सामने आएगा। 

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वही हुआ जिसकी आशंका थी। यमुना की बाढ़ से बैक फ्लो हो रहे पानी के दबाव में प्रयागराज में गंगा उल्टी बह रही हैं। विपरीत परिस्थितियों में अब फाफामऊ तक संगम है। कालिंदी (यमुना) के हर घंटे बढ़ रहे जलस्तर से उफनाई यमुना में आ रहा केन, बेतवा का पानी और टोंस का बढ़ता जलस्तर गंगा के प्रवाह को रोक रहा है। बैक फ्लो से देर रात यमुना जल शृंग्वेरपुर तक पहुंच गया। 

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नरौरा और कानपुर बैराज से पानी नहीं छोड़े जाने से गंगा शांति से बढ़ रही हैं। उनकी राह में बाधा बनी है टोंस की विकरालता। मेजा-सिरसा घाट पर पानी मोड़ पर फंस रहा है। गंगा की राह यहीं बाधित हो रही है। गंगा का मद्धम गति से बढ़ रहा जलस्तर उस तेजी से आगे नहीं बढ़ रहा है, जैसा विशेषज्ञों का अनुमान था। अब विकराल हुई यमुना का बैक फ्लो गंगा को उल्टा दिशा में बहा रहा है। 

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सिंचाई विभाग के जानकार बताते हैं कि हमीरपुर, औरेया, चंबल नदी का पानी उतार पर होने से तय है कि छोड़ा गया पानी यहां पहुंच रहा है। ऐसी स्थिति में 12 घंटे जल को स्थिर होने फिर 24 से 48 घंटे के बाद डाउन फाल शुरू होता है। फिलहाल 24 घंटे गंगा उल्टी दिशा में ही बहेंगी और स्थिति ऐसी ही रहने के आसार हैं। ऐसे में यमुना का बढ़ता जलस्तर बाढ़ के हालात और बिगड़ने के संकेत हैं। सिंचाई बाढ़ खंड के एक्सईएन बृजेश सिंह के अनुसार गंगा-यमुना के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। चंबल का जल स्तर तेजी से घटने लगा है। पीछे से आ रहा पानी ही यहां यहां यमुना में जलस्तर वृद्धि का कारण बना है। उल्टी गंगा बहने से शहर के करेली, करेलाबाग, बक्शीमोढ़ा, जेके नगर, गऊघाट, बघाड़ा, सलोरी, अशोक नगर, राजापुर, नेवादा, ढहहरिया, मेंहदौरी, शिवकुटी आदि बाढ़ प्रभावित मोहल्लों के करीब दो हजार और घर बाढ़ की जद में आ गए। इन इलाकों में स्थिति खराब है। 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य दोनों ही शुक्रवार को प्रयागराज में थे, लेकिन इन दोनों की ही आपस में मुलाकात नहीं हुई। सीएम और डिप्टी सीएम की मुलाकात न होना शुक्रवार को भाजपाइयों में चर्चा का विषय रहा। खास बात यह रही कि सीएम योगी को कैंट स्थित जिस स्कूल में राहत सामग्री बांटने को जाना था वहां से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के अलकापुरी स्थित आवास की ज्यादा दूरी भी नहीं थी।



बताया जा रहा है कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद  शुक्रवार को दिनभर  अपने आवास में ही मौजूद थे। अपने आवास में ही वे आम लोगों की शिकायतें सुनते रहे। वहीं दूसरी ओर सीएम के साथ कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह उनके साये की तरह ही साथ रहे। दोनों ही राहत शिविरों में सीएम के साथ   सिद्धार्थ नाथ सिंह भी गए। इस दौरान इलाहाबाद की सांसद डा. रीता बहुगुणा जोशी, फूलपुर की सांसद केशरी  देवी पटेल, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी समेत तमाम भाजपा पदाधिकारी भी सीएम की अगुवानी के लिए पहुंचे। राहत शिविरों में भी इन सभी ने बाढ़ पीड़ित लोगों को राहत सामग्री बांटे जाने में सहयोग किया। इन दोनों ही शिविरों में सीएम के साथ केशव मौर्य क्यों नहीं रहे उसे लेकर भाजपाई आपस में कानाफूसी करते दिखे। नगर अध्यक्ष अवधेश चंद्र गुप्ता से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम ने तमाम शिविरों में एक दिन पूर्व ही राहत सामग्री का वितरण  किया था।

शुक्रवार को वह आम लोगों की शिकायत सुनकर उसका निस्तारण करवा रहे थे।  डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शुक्रवार को भाजपा महानगर की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र एवं राहत शिविर में रह रहे लोगों को लिए खाद्य सामग्री ले जा रहे वाहन को झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने वाहन को झंडी दिखाने के बाद कहा कि बाढ़ में फंसे लोगों के लिए पार्टी कार्यकर्ता एवं जिला प्रशासन तन मन से सेवा के लिए जुट जाए। सरकार भी बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए समुचित व्यवस्था कर रही है। इस दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष ने बताया कि लाई चना, पूड़ी सब्जी आदि खाद्य सामग्री से भरे पांच वाहन दारागंज, सलोरी, गंगानगर, तेलियरगंज एवं फाफामऊ क्षेत्र के लिए पार्टी की ओर से रवाना किए गए। आने वाले दिनों में भी राहत सामग्री का वितरण होता रहेगा। उधर वाहन को झंडी दिखाने के बाद डिप्टी सीएम लखनऊ के लिए रवाना हो गए। इस अवसर पर विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, दीपक  पटेल, गुरु प्रसाद मौर्य, कन्हैया लाल पांडेय, शिवदत्त पटेल, सुबोध सिंह, अरुण  अग्रवाल, शशि वार्ष्णेय, आशीष गुप्ता, आनंद श्रीवास्तव, पवन श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। 

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सात दिन बीते और गंगा-यमुना का पानी अभी कहर बरपा रहा है। बाढ़ का पानी अब नए इलाकों को जद में ले रहा है। शुक्रवार को करेली, करेलाबाग ही नहीं गऊघाट के आसपास के कछारी मोहल्लों के सैकड़ों घर लबालब हो गए। राजापुर, द्रौपदीघाट, गंगानगर, रसूलाबाद, मेंहदौरी, अशोक नगर, पत्रकार कालोनी के पीछे, बक्शी कला, दारागंज समेत कई इलाकों में पांच हजार से अधिक घरों में पानी घुसा है। कहीं एक मंजिल डूबी है तो कहीं दो से 12 फीट पानी भरा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में अव्यवस्था इस कदर है कि मदद सिर्फ राहत केंद्रों तक पहुंच रही है। प्रभावित इलाकों में सांप-बिच्छू समेत अन्य जीवजंतुओं का खतरा बढ़ने के साथ गंदगी परेशानी का कारण बनी है। नए प्रभावित इलाकों मे लोग सामान ढो रहे हैं।

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यमुना में उफान से गऊघाट के अगल-बगल बने दर्जनों घर और करीब तीन सौ झोपड़ियां बाढ़ के पानी से घिर गईं। परेशान लोगों ने छत पर डेरा जमाया। कुछ ने सिर पर ढोकर सामान सुरक्षित निकाला। वहीं नाव न मिलने से रामेश्वर जैसे कुछ लोग ऐसे भी रहे जिन्होंने घर में बिछे तख्त को पानी में तैराकर सामान बाहर निकाला। कोई सिर पर ड्रम रखे पानी में उतरा तो एक पीड़ित कांख में एलईडी टीवी और उसका डिब्बा लेकर घर से बाहर ईसीसी के पीछे बांध पर पहुंचे। 

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गंगा और यमुना की बाढ़ से मछली पकड़ने वालों की चांदी कट रही है। बच्चे जीरा पकड़कर बेच रहे हैं तो बड़े रोहू और भोला समेत अन्य प्रजातियों की मछलियां कटिया फंसा कर 200 रुपये किलो तक बेच रहे हैं। गऊघाट मछली मंडी में सुबह से शाम तक जिंदा मछली के खरीदार जुट रहे हैं। जीरा पकड़ने वाले बच्चे बड़े उत्साहित हैं। चार बच्चे चादर या जाल से बढ़े पानी में जीरा पकड़ते हैं और तुरंत बेचकर फिर काम पर लग जाते हैं।

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गंगा-यमुना के कछारी मोहल्लों में गंदगी से स्थिति नारकीय

घरों में पानी भरने से छतों पर डेरा जमाए बाढ़ पीड़ितों का हाल खराब है। सीवर ओवरफ्लो होने से शौचालय की गंदगी गलियों और सड़कों तक फैली है। जल कुंभी के बीच फंसी गंदगी दुर्गंध का कारण बनी है। सीलन भरे वातावरण में मच्छरों की भरमार से दिन ही नहीं रात का भी चैन उड़ा है। राजापुर के अक्षत बताते हैं कि अब तक राहत तो छोड़िए, कोई पूछने नहीं आया। छोटा बघाड़ा के रजनीश बताते हैं कि बीमार भाई को डॉक्टर के पास ले जाने को गुरुवार से नाव का इंतजार कर रहे हैं, पैसा देने पर भी कोई मदद को तैयार नहीं है। गंगानगर के अनंतराम कुशवाहा बताते हैं कि घर में पानी भरा है। बाहर शरण लिए हैं, कुछ सामान लेने गए थे, लेकिन गंदगी और कीचड़ के कारण हिम्मत ही नहीं जुटा सके। सलोरी के रामू, सीतारानी भी गंदगी से परेशान हैं। ये मामले बानगी भर हैं, गंदगी से बढ़ी ऐसी दुश्वारियां हजारों लोगों के सामने हैं। 

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तो प्रशासनिक अफसर बांटेंगे दवाई

बाढ़ प्रभावित मोहल्लों मे राहत कार्य के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पांच सचल दलों समेत 102 मेडिकल टीमों को लगाया है। स्वास्थ्य सेवाएं राहत केंद्रों तक सिमटी हैं। जहां पानी भरा है, वहां स्वास्थ्य विभाग नाव से दवा वितरण नहीं करा पाया है। लोग सर्दी, जुकाम, बुखार, चर्म रोग आदि से परेशान हैं, लेकिन लोगों को एक गोली भी नहीं मिल रही है। मुसीबत बड़ी है कि पानी लगा होने के कारण लोग चाहकर भी दवा खरीदने घर निकल नहीं पा रहे हैं। ऐसे में जिलाधिकारी द्वारा नामित नोडल अधिकारियों को दवा वितरण के लिए पैकेट उपलब्ध कराए गए हैं। इन मेडिकल किटों में बुखार, दर्द, उल्टी-दस्त की दवा के साथ एंटी फंगल क्रीम और ओआरएस के पैकेट रखे गए हैं। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग ने कलक्ट्रेट स्थित कंट्रोल रूम को 1500 पैकेट उपलब्ध कराए हैं। सीएओ ने ग्रामीण इलाकों का दौरा कर प्रभावित इलाकों में दवाओं का वितरण कराया। वहीं जिले की 20 सीएचसी और 64 न्यू पीएचसी पर भी डॉक्टर टीम और मेडिकल किट उपलब्ध कराई गई हैं। 

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सांसद रीता ने लिया करेली के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दौरा

प्रयागराज। सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने शुक्रवार को शहर के करेली, करैलाबाग स्थित बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का जायजा लिया। यहां बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। इस दौरान अफसरों से वार्ता कर उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को हर संभव मदद देने का निर्देश दिया।
शाम को भाजपा नेताओं के साथ पहुंची सांसद ने करेली आदि क्षेत्र में घर में फंसे लोगों को बाहर सुरक्षित निकलवाने का निर्देश जिला प्रशासन के अफसरों को दिया। कहा कि यहां राहत सामग्री के वितरण में तेजी लाई जाए। इसके पूर्व बारा विधायक डा. अजय भारती के साथ अनंत राम द्विवेदी महाविद्यालय में रह रहे बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की। वहां लोगों द्वारा प्रशासनिक सुविधाएं न मिलने पर उन्होंने एसडीएम बारा एवं अन्य अफसरों पर नाराजगी जताई। इस दौरान संत प्रसाद पांडेय, अभिषेक शुक्ला, हरीश त्रिपाठी, डा. उदय प्रताप सिंह, ज्ञान कुशवाहा, विजय पुर्सवानी, मनु कक्कड़ आदि मौजूद रहे।

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रोशनी न पानी, जागकर बिता रहे रात

प्रयागराज। करेली की जेके कॉलोनी, गड्ढा कॉलोनी, मुल्ला कॉलोनी आदि इलाकों में शुक्रवार को भी जलस्तर का बढ़ना जारी रहा। शाम तक जेके नगर की गली में छोटकऊ के मकान तक पानी भर गया जिससे यहां तक के मकान में रहने वाले लोग अपने घरों में कैद हो गए। जलभराव ज्यादा होने से पानी मुल्ला कॉलोनी की ओर बढ़ने लगा। इस बीच इलाकों में न तो सफाई का इंतजाम है और न ही किसी तरह का छिड़काव ही किया गया है।

जेके नगर का ट्रांसफार्मर हटवा दिया गया था जिससे जेके नगर की ओर अंधेरा छा गया। पानी भरने के बाद यहां की रहने वाली गुड़िया बच्चों को लेकर रिश्तेदार के घर चली गईं। हालांकि इस बीच रेहान सहित कई और लोग परिवार को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से स्वयं घरों पर ही रुके हुए हैं। पिछली बार हुई चोरियों की वजह से सभी के मन में डर है। इसीलिए लोग घर में रुककर पहरा दे रहे हैं।

गली में रहने वाले साहिल सिद्दीकी बोले, पीने के पानी की सबसे ज्यादा दिक्कत है, अब तक यहां दवाएं भी नहीं पहुंची हैं। लोग छतों के रास्ते एक दूसरे के घर पहुंच रहे हैं और जरूरत का सामान लेने के लिए सबसे किनारे वाले घर से बाहर जा रहे हैं। सालियान ने जोड़ा, यहां तीन नावें लगाई गई थीं जिनमें से शुक्रवार को एक नाव में छेद होने से दो ही नावें बची रह गईं। नावें और लगें तो लोगों को घरों से निकलने में सहूलियत हो सके।

वहीं गड्ढा कालोनी के शमशाद अहमद ने कहा, पानी की वजह से दिक्कतें बढ़ती ही जा रही हैं। ज्यादातर लोगों ने घर छोड़ दिया है लेकिन जो घरों में कैद हैं, उन्हें घर से निकलने में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। घरो में वाटरटेप से जो पानी आ रहा है, वह मैला और बदबूदार है। जेके नगर के मेहंदी हसन बोले, पीने के पानी के लिए डिब्बे वाले आरओ पर भी निर्भर रहना पड़ रहा है लेकिन जरूरत के लिए इतना पानी पर्याप्त नहीं है। क्षेत्रीय लोग मदद पहुंचा रहे हैं लेकिन सरकारी या जनप्रतिनिधियों के स्तर पर मदद नहीं मिल पा रही है।

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यमुना में उफान के जलते बघाड़ा गंगानगर व बख्शी बांध इलाकों में पांच ट्रांसफारमर डूब गए। शुक्रवार को यमुना बैंक सब स्टेशन के स्विच यार्ड में पानी आ गया। चार दर्जन से अधिक मुहल्लों में फिर पानी आने से अब तक करीब पांच हजार से अधिक घरों की बिजली आपूर्ति बंद हो चुकी है। बाढ़ के चलते तटीय इलाके के सैकड़ों घरों की बिजली आपूर्ति शुक्रवार को भी बंद करनी पड़ी। यमुना बैंक रोड सब स्टेशन में के स्विच यार्ड में सुबह पानी भर गया। हालांकि पानी से बर्बाद होने वाले तमाम उपकरण इस उपकेंद्र से हटवा लिए गए हैं। इस बीच बघाड़ा में आरसीसी रोड पर लगे दो ट्रांसफारमर बाढ़ के पानी में डूब गए। हालांकि इस इलाके से तीन ट्रांसफारमरों को हटवा यिा गया है। इसी तरह बख्शी बांध इलाके के भी दो ट्रांसफारमर डूब गए हैं। जबकि गंगानगर कॉलोनी में भी एक ट्रांसफारमर डूब गया। इसी तरह आठ से अधिक ट्रांसफारमर बाढ़ग्रस्त इलाकों से शिफ्ट कराए गए। एसडीओ विजय तिवारी केअनुसार सलोरी, चांदपुर, बाघाड़ा को लेकर चार ट्रांसफारमरों से आपूर्ति बंद की गइ है। जल स्तर घटने के साथ ही वहां आपूर्ति शुरू करा दी जाएगी। इसी तरह राजापुर, बेली व गंगानगर के अलावा नेवादा के कई घरों में पानी भर गया और यहां भी बिजली काट दी गई।
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