प्रयागराज के करछना इलाके डीहा गांव से सनसनीखेज खबर सामने आई है। यहां एक परिवार 18 वर्षीय बेटी के शव के साथ पांच दिन तक घर में बंद रहा। बदबू आने पर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद घटना की जानकारी हुई। घर में जाने पर 11 अन्य सदस्य भी बीमार पड़े मिले। इनमें से एक की हालत गंभीर थी। पूछताछ में पता चला कि घर में कई-कई दिनों तक खाना नहीं बनता था और परिवार के लोग सिर्फ गंगाजल पीते थे। डीहा गांव में रहने वाले अभयराज के घर पहुंचे पुलिस अफसर परिजनों की हालत देख दंग रह गए। जांच पड़ताल में जब यह पता चला कि घर के कुछ सदस्य पिछले कई दिनों से बीमार थे। चौंकाने वाली बात यह है कि विवाहित बेटियों की भी हालत ठीक नहीं थी। अफसरों को जब यह पता चला कि घर में कई-कई दिनों तक खाना नहीं बनता था और परिवार के लोग सिर्फ गंगाजल पीते थे तो वह स्तब्ध रह गए।
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करछना। डीहा गांव में घर के अंदर लाश की सूचना पर पहुंची पुलिस व जुटी ग्रामीणों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
आसपास के लोगों से नहीं रखते थे कोई मतलब
परिवार बीते डेढ साल से रिश्तेदार व आस-पास के लोगों से कोई मतलब नहीं रखता था। पड़ोसियों ने बताया कि उनके पास खेत है लेकिन दो साल से खेती नहीं की जा रही है। परिवार के कुछ लोग रोज गंगा स्नान कर जल लाते थे। एक और चौंकाने वाली बात यह है कि वह घर में अंदर जाने के लिए दरवाजे की जगह खिड़की का इस्तेमाल किया करते थे।
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घर के अंदर का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
देवी की पूजा कर किया करते थे झाड़-फूंक
परिवार किसी देवी की पूजा करता था और उन्हीं के नाम पर झाड़-फूंक किया करता था। चौथी बेटी बीनू शादी के बाद से ही बीमार थी और उसकी का घर के अंदर ही इलाज किया जा रहा था।
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मौके पर जमा लोग
- फोटो : अमर उजाला
पढ़े-लिखे थे सभी, कर चुके हैं ग्रेजुएशन
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि परिवार पढ़ा लिखा है। अभयराज के सभी बच्चे ग्रेजुएशन कर चुके हैं। ऐसे में सभी हैरान थे कि परिवार अंधविश्वास के फेर में आखिर कैसे फंस गया।
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डीहा गांव में अभयराज के घर के बाहर रोते बिलखते उसके रिश्तेदार
- फोटो : अमर उजाला
उधर सूचना पर अफसर पहुंचे तो परिजनों ने उन्हें घर के भीतर घुसने से भी रोक दिया। काफी मान-मनौव्वल के बाद भीतर दाखिल हो सकी और इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
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करछना। डीहा गांव में घर के अंदर लाश की सूचना पर जुटी ग्रामीणों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
परिवारवालों की जो हालत थी, उससे यही मालूम पड़ता है कि उनकी मानसिक दशा ठीक नहीं थी। जहां तक गंगाजल पीने व बीमारी का इलाज झाड़फूंक से करने की बात है तो इसकी वजह अंधविश्वास है। यह भी हो सकता है कि परिवार किसी अपराध बोध से ग्रस्त रहा हो और इसी वजह से वह गंगाजल पी रहा हो। -ईशान्या राज, नैदानिक मनोवैज्ञानिक
डीहा गांव में घर के अंदर लाश की सूचना पर पहुंची पुलिस व जुटी ग्रामीणों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
मौके के जो हालात थे, उससे यही लगता है कि परिवार अंधविश्वास के फेर में था। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर अन्य परिजनों को अस्पताल भेजा गया है। -सौरभ दीक्षित, एसपी यमुनापार