अतीक अहमद
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2- सुपारी किलिंग
जिस तरह से हत्याकांड को अंजाम दिया गया, उससे एक आशंका यह भी है कि माफिया भाइयों की हत्या सुपारी देकर कराई गई।
वजह क्यों सही : वारदात को अंजाम देने वाले तीनों शूटरों का अतीक-अशरफ से कोई सीधा कनेक्शन नहीं है। ऐसे में किसी ने सुपारी देकर उनसे इस वारदात को अंजाम दिलवाया। गुमनाम होने की वजह से पुलिस सुरक्षा में भी वह अतीक-अशरफ तक आसानी से पहुंच सकेंगे। वजह क्यों गलत : पूर्वांचल में सुपारी किलिंग करने वाले कई शूटर मौजूद हैं। ऐसे में कोई इतनी बड़ी वारदात के लिए नए-नवेले शूटरों पर दांव क्यों लगाएगा। शूटराें के मुंह खोलने का भी डर था, ऐसे में कोई इतना बड़ा खतरा क्यों मोल लेगा?
3- अपनों की मौत का इंतकाम
माफिया भाइयों पर कुल मिलाकर 150 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए। ऐसे लोगों की संख्या बहुतायत में है जो उनसे पीड़ित हों। ऐसे में निजी रंजिश भी हत्या की एक वजह हो सकती है।
वजह क्यों सही : भले ही कत्ल के एक भी मुकदमे में माफिया भाई दोषी न ठहराए गए हों, लेकिन ऐसे कई मुकदमों में वह आरोपी बने, जिनमें किसी को दिनदहाड़े बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया हो। हो सकता है कि किसी ने इसी निजी रंजिश में यह वारदात कराई हो।वजह क्यों गलत : अतीक-अशरफ पर उमेशपाल के कत्ल से पहले हत्या का आखिरी मुकदमा 18 साल पहले राजू पाल हत्याकांड में दर्ज हुआ। इसके बाद भी अतीक 2016 जबकि अशरफ 2020 तक जेल के बाहर ही रहा। ऐसे में जब अतीक को उम्रकैद हो चुकी हो, तब हत्या इंतकाम में हत्या कराने के तर्क में बहुत दम नहीं नजर आता।