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आंखों में रोशनी नहीं, लेकिन बच्चों के भविष्य को वर्षों से रोशन कर रहे हैं दृष्टिहीन शिक्षक दंपति

घनश्याम सिंह, हाथरस Updated Sat, 05 Sep 2020 05:36 PM IST
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दृष्टिहीन शिक्षक सुग्रीव चौधरी व उनकी पत्नी नेहा मित्तल - फोटो : अमर उजाला

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मंजिल उन्हें मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। सिर्फ पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इन पंक्तियों को हाथरस के दृष्टिहीन शिक्षक दंपति ने पूरी तरह चरितार्थ किया है। दोनों विकास खंड मुरसान के प्राथमिक विद्यालय नगला बनारसी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दृष्टिहीन शिक्षक सुग्रीव दूसरे दृष्टिहीनों की मदद के लिए भी आगे आते हैं।   

 
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सुग्रीव चौधरी की पत्नी नेहा मित्तल - फोटो : अमर उजाला
भगवंतपुर निवासी सुग्रीव चौधरी दृष्टिहीन होने के बाद भी शिक्षा का उजियारा फैला रहे हैं। उन्होंने अपनी दृष्टिहीनता को कमजोरी न बनाकर आगे बढ़ने के लिए हथियार बनाया। बेसिक शिक्षा विभाग के नगला बनारसी स्थित प्राइमरी स्कूल में सहायक अध्यापक की नौकरी प्राप्त की। उनकी पत्नी नेहा भी दृष्टिहीन हैं। सुग्रीव ने बताया कि उन्होंने अपने जैसी ही लड़की से शादी की। उनकी पत्नी नेहा मित्तल भी उनके साथ नगला बनारसी के स्कूल में बच्चों को आखर का उजियारा दे रहीं हैं। 


 

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सुग्रीव चौधरी - फोटो : अमर उजाला
सुग्रीव चौधरी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से स्नातक तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद बीएड किया। फिर एमए अंग्रेजी की पढ़ाई डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से पूरी की। वर्ष 2010 में बीटीसी करने के बाद वर्ष 2013 में टेट परीक्षा पास की। वर्ष 2014 में बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी प्राप्त की। सुग्रीव ने बताया कि वे राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कोऑर्डिनेटर हैं। उनकी संस्था दृष्टिहीनों की शिक्षा व रोजगार संबंधी मदद करती है।

 
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दृष्टिहीन शिक्षक सुग्रीव चौधरी व उनकी पत्नी नेहा मित्तल - फोटो : अमर उजाला
चलाते हैं व्हाट्सएप
सुग्रीव व उनकी पत्नी नेहा ने बताया कि वे एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी चलाते हैं। खुद ही लोगों के नंबर भी अपने फोन में सेव कर लेते हैं। वे अपना फोन टॉकिंग साफ्टवेयर की मदद से चलाते हैं। इसके अलावा वे दृष्टिहीनों को कंप्यूटर चलाने का प्रशिक्षण भी देते हैं।

 

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सुग्रीव चौधरी - फोटो : अमर उजाला
ब्रेल बुक व सामान्य किताबों में बिठाया सामंजस्य
दृष्टिहीनों के लिए ब्रेल बुक होती है, जिनसे वे पढ़ते व पढ़ाते हैं। शिक्षक दंपति ने ब्रेल बुक व सामान्य बुक से सामंजस्य बिठा रखा है। तभी तो वे सामान्य शिक्षकों की भांति बच्चों को पढ़ा पाते हैं। गांव के लोग भी उनके शिक्षण कार्य से प्रभावित हैं।
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