फिरोजाबाद के कस्बा पाढ़म में मंगलवार की रात रमन प्रकाश राजपूत के दो मंजिला मकान में लगी आग इतनी भीषण थी कि परिवार के लोगों को बचने का मौका तक नहीं मिला। शाम साढ़े छह बजे तक परिवार में खुशी का मौहाल था। बच्चे और महिलाएं जन्मदिन पार्टी में जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन घर में लगी आग में छह लोग जिंदा जल गए। सारी खुशियां राख हो गईं। लपटों के बीच एक के बाद एक जब शव निकाले गए तो लोगों का कलेजा कांप गया। सभी शव बुरी तरह से जले हुए थे। मृतकों में तीन माह की बच्ची सहित तीन बच्चे भी थे।
रमन प्रकाश राजपूत के दो मंजिला मकान में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई थी। आग में जलकर रमन प्रकाश के बड़े बेटे मनोज कुमार (35), पुत्रवधू नीरज (35) , दोनों नाती हर्ष (12) और भरत (8), छोटे बेटे नितिन कुमार की पत्नी शिवानी (32), उनकी पुत्री तेजस्वी (6 माह) की मौत हो गई। पुलिस ने लोगों की मदद से शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। बुधवार को एक ही चिता पर सभी का अंतिम संस्कार किया गया।
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मनोज के बेटे हर्ष और भरत
- फोटो : अमर उजाला
मनोज की पांच वर्ष की बेटी उन्नति के दांत में दर्द होने पर उसे दिखाने ले गया था। आग लगने का समाचार मिला तो घर पहुंच गया। उन्नति को बाहर छोड़कर आग में फंसे लोगों को निकालने के लिए घर के अंदर घुस गया। घर के अंदर गया मनोज न तो किसी को बाहर निकाल पाया और न ही खुद सुरक्षित निकल सका।
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घर में लगी थी भीषण आग
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार को मनोज के ताऊ परिवार में जन्मदिन पार्टी थी। सभी को उसमें शामिल होना था। इसके लिए महिलाएं और बच्चे तैयारी कर रहे थे। मनोज पांच वर्ष की बेटी उन्नति के दांत में दर्द होने पर उसे दिखाने ले गया था। मनोज के लौटने से पहले ही घर में भीषण आग लग गई। परिवार के सदस्य पहली मंजिल पर फंस गए।
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रमन प्रकाश और नितिन को संभालते रिश्तेदार
- फोटो : अमर उजाला
आग लगने की जानकारी मिलते ही मनोज घर पहुंचा। उन्नति को बाहर छोड़कर आग में फंसे लोगों को निकालने के लिए घर में घुस गया, लेकिन वापस नहीं आ सका। रात करीब 11 बजे तक सभी शवों को घर से बाहर निकाला जा सका। रात में ही शवों को पोस्टमार्टम कराया गया।
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घर में लगी थी भीषण आग
- फोटो : अमर उजाला
हादसे के समय महिलाएं और बच्चे घर पर मौजूद थे। नितिन एक दावत कार्यक्रम में शामिल होने गया था। पिता रमन प्रकाश अपनी गोशाला में चले गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि रमन प्रकाश रोज सोने के लिए गोशाला में ही जाते थे। दोनों लोग घर से बाहर थे, इसलिए उनकी जान बच गई।
एक ही चिता पर दी गई अंतिम विदाई
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम हाउस में मनोज के साले मुकेश राजपूत ने बताया कि एक माह से मनोज से बात नहीं हुई थी। मंगलवार को सुबह मनोज का फोन आया था। बड़ी खुशी के साथ बातें कीं। मनोज ने तीन दिसंबर को घर में माता की चौकी लगाने का बड़ा कार्यक्रम रखा था। इसके लिए उसने न्यौता भी दिया था, लेकिन उसे क्या पता था कि वह आखिरी बार बात कर रहा है।